September 5, 2026

म्यूचुअल फंड सेटलमेंट पर सेबी का नया प्रस्ताव: क्या आपकी SIP और NAV पर होगा असर?

Published: Saturday, September 5, 2026, 16:35 [IST]

मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने 3 सितंबर 2026 को म्यूचुअल फंड सेटलमेंट को लेकर एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसमें प्रस्ताव दिया गया है कि म्यूचुअल फंड स्कीमों के कैश मार्केट ट्रेड्स के लिए पैसों का 'नेट सेटलमेंट' किया जाए। हालांकि, शेयरों का सेटलमेंट पहले की तरह ग्रॉस यानी डिलीवरी बेसिस पर ही होगा। इस कदम का मकसद फंड हाउसों की अस्थायी उधारी (शॉर्ट-टर्म बोरोइंग) को कम करना और लिक्विडिटी मैनेजमेंट को बेहतर बनाना है। जब तक सेबी का फाइनल सर्कुलर नहीं आ जाता, तब तक आम निवेशकों के लिए कुछ भी नहीं बदलेगा।

इसे एक उदाहरण से समझें—मान लीजिए आपकी 5,000 रुपये की SIP आज जानी है। अगर आपका पैसा दोपहर 3 बजे से पहले फंड हाउस पहुंच जाता है, तो आपको आज की ही NAV मिलती है। अभी स्कीम के अंदर होने वाले ट्रेड क्लीयरिंग कॉरपोरेशन में 'ग्रॉस' बेसिस पर सेटल होते हैं। इससे खरीदारी और बिकवाली आपस में कटने के बावजूद फंड हाउस को शॉर्ट-टर्म उधारी लेनी पड़ती है। सेबी का नया प्रस्ताव इन सौदों में सिर्फ कैश वाले हिस्से का नेट सेटलमेंट करेगा। आपके लिए NAV लागू होने के नियम में कोई बदलाव नहीं होगा।

SEBI Mutual Fund Net Settlement Proposal 2026: Impact on SIP, NAV, and Redemption Explained

सेबी के नेट सेटलमेंट से कैसे बदलेगा म्यूचुअल फंड्स का कैश फ्लो?

नेट सेटलमेंट व्यवस्था के तहत फंड स्कीम को केवल नेट कैश का ही भुगतान करना या लेना होगा। इससे एक ही सेटलमेंट साइकिल में शेयरों की बिक्री से मिली रकम का इस्तेमाल नए शेयरों की खरीदारी में हो सकेगा। हालांकि, शेयरों का ट्रांसफर हर ट्रेड के हिसाब से अलग-अलग ही होगा, जिससे डिलीवरी सिस्टम में कोई ढील नहीं आएगी। बाजार में उथल-पुथल या दबाव के समय कैश की जरूरत कम होने से उसी दिन आने वाले रिडेम्पशन के दबाव से राहत मिल सकती है। हालांकि, जब तक सेबी नियमों में संशोधन नहीं करता, रिडेम्पशन का पैसा मिलने की समयसीमा पुरानी ही रहेगी।

कट-ऑफ टाइम में कोई बदलाव नहीं है—ज्यादातर स्कीमों के लिए यह दोपहर 3 बजे और लिक्विड फंड्स के लिए दोपहर 1:30 बजे ही रहेगा। एनएवी मिलना इस बात पर निर्भर करता है कि पैसा वास्तव में फंड हाउस के पास कब उपलब्ध हुआ। 2021 के बदलावों के बाद से यह नियम सिस्टेमैटिक प्लान (SIP) पर भी लागू है। फिलहाल रिडेम्पशन का पैसा मिलने में सेबी की तय गाइडलाइन के मुताबिक तीन वर्किंग डे का समय लगता है। कुछ लिक्विड फंड्स में मिलने वाली इंस्टेंट रिडेम्पशन की सुविधा फंड हाउस की अपनी स्कीम का फीचर है, न कि कोई नियम।

लागत, लिक्विडिटी और ट्रैकिंग एरर में क्या आएगा फर्क?

कम अस्थायी उधारी से ब्याज का खर्च घटेगा, जिससे इंडेक्स फंड्स का 'ट्रैकिंग एरर' कम करने में मदद मिल सकती है। कैश नेटिंग से पेनल्टी और ऑपरेशन्स से जुड़ी दिक्कतें भी कम होंगी। हालांकि, इसका पूरा फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि क्लीयरिंग कॉरपोरेशन की प्रक्रियाएं और एएमसी (AMC) इसके लिए कितनी तैयार हैं। अगर सेबी सुझाव मिलने के बाद इस फ्रेमवर्क को अंतिम रूप देता है, तो इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है।

FD बनाम इंडेक्स फंड रिटर्न: एक नजर

बाजार के रिटर्न और गारंटीड ब्याज दरों की तुलना के लिए एक आसान उदाहरण देखते हैं। लंबी अवधि में निफ्टी 50 टोटल रिटर्न्स इंडेक्स (TRI) ने दो अंकों (डबल-डिजिट) में रिटर्न दिया है, जबकि बैंक एफडी का रिटर्न लगभग 6 से 6.75 फीसदी के बीच रहा है। एफडी के आंकड़े 1 साल से अधिक की अवधि के लिए आरबीआई की मौजूदा दरों पर आधारित हैं, वहीं इंडेक्स के आंकड़े 2 सितंबर 2026 तक के हैं।

इंस्ट्रूमेंट5 साल (वार्षिक)10 साल (वार्षिक)15 साल (वार्षिक)
निफ्टी 50 TRI10.55%12.28%10.23%
बैंक FD (RBI रेंज, >1Y, मौजूदा)6.00%–6.75%6.00%–6.75%6.00%–6.75%

अभी आपके लिए क्या बदला है और आगे क्या ट्रैक करें?

आगे आपको किस बात पर नजर रखनी चाहिए? ध्यान रखें कि यह सिर्फ एक प्रस्ताव (कंसल्टेशन) है, कोई लागू नियम नहीं। अंतिम सर्कुलर और समयसीमा की जानकारी के लिए सेबी के रिपोर्ट्स पेज पर नजर रखें। इसके अलावा एम्फी (AMFI) और अपने फंड हाउस के अपडेट्स भी देखते रहें। 5 सितंबर 2026 की स्थिति के मुताबिक, रिटेल निवेशकों के लिए SIP प्रोसेस, NAV क्रेडिट और रिडेम्पशन टाइमलाइन में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

Story first published: Saturday, September 5, 2026, 16:35 [IST]

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