Published: Wednesday, September 9, 2026, 15:05 [IST]
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें $100 के करीब पहुंचने से 9 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड ने कुछ देर के लिए 100 डॉलर का आंकड़ा पार कर लिया, जिससे बाजार में घबराहट फैल गई। सेंसेक्स 450 से 600 अंक तक फिसल गया, जबकि निफ्टी 23,500 के स्तर को टेस्ट करने के बाद थोड़ा संभलने में कामयाब रहा। कच्चे तेल में तेजी भारत के लिए महंगाई और कंपनियों के मार्जिन पर जोखिम बढ़ा देती है। इससे रुपये की मजबूती और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को भी झटका लगा है। नए निवेशकों को इस उतार-चढ़ाव को बाजार के अनुशासन की परीक्षा (Discipline Check) के रूप में देखना चाहिए।
अगर आपकी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) चल रही है, तो बिना किसी बदलाव के इसे जारी रखें। रुपी-कॉस्ट एवरेजिंग (Rupee-cost averaging) का असली फायदा ऐसे ही उतार-चढ़ाव में मिलता है। वहीं, नए निवेशक बाजार में एकमुश्त पैसा लगाने के बजाय अगले 4 से 6 हफ्तों में 3 या 4 किस्तों में धीरे-धीरे एंट्री करें। इसके अलावा, 6 से 12 महीने के जरूरी खर्चों के लिए लिक्विड इमरजेंसी फंड अलग रखें। शेयर बाजार में निवेश शुरू करने से पहले पर्याप्त हेल्थ और टर्म लाइफ इंश्योरेंस लेना न भूलें।

Sensex, Nifty: एसआईपी में अनुशासन, कैश बफर और निवेश के नियम
बाजार में भावनाओं के आधार पर फैसले लेने से बचने के लिए सख्त नियम बनाएं। अपने पसंदीदा फंड्स या इंडेक्स के स्तर पर प्राइस अलर्ट लगा लें। ऑटो-एसआईपी की तारीख तय रखें और दिनभर के उतार-चढ़ाव वाले शोर (Intraday noise) से दूर रहें। लेवरेज्ड ट्रेडिंग और सट्टेबाजी वाले ऑप्शंस सेगमेंट से बचें, क्योंकि इनमें नुकसान बहुत तेजी से बढ़ता है। अगर आपके लक्ष्य 1 से 3 साल दूर हैं, तो पोर्टफोलियो को तुरंत रीबैलेंस करें। ऐसे में हाई-क्वालिटी डेट और गोल्ड में निवेश को तरजीह दें। इक्विटी में तब तक बड़े कदम न उठाएं जब तक कि बाजार का रुख पूरी तरह साफ न हो जाए।
Sensex, Nifty: पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग और रिटर्न की तुलना
ब्याज दरें ही आपके निवेश का सही मिक्स तय करती हैं। फिलहाल बड़े बैंकों की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर लगभग 6.4 से 6.9 फीसदी का ब्याज मिल रहा है। वहीं, पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) पर इस तिमाही में 7.1 फीसदी रिटर्न है। नीचे दिए गए चार्ट से समझें कि ₹1 लाख का निवेश समय के साथ कैसे बढ़ता है। बाजार की गिरावट में खरीदारी करने से पहले अपने रिटर्न की सही उम्मीद तय करने के लिए इसका ध्यान रखें।
| इन्स्ट्रूमेंट | दर | 5 साल | 10 साल | 15 साल |
|---|---|---|---|---|
| बैंक एफडी (सांकेतिक) | 6.5% | ₹1,37,009 | ₹1,87,714 | ₹2,57,184 |
| पीपीएफ (वर्तमान) | 7.1% | ₹1,40,912 | ₹1,98,561 | ₹2,79,796 |
दोपहर 3:30 बजे बाजार बंद होने के बाद या अपनी वीकली समीक्षा के दौरान ही एसेट एलोकेशन पर फैसला लें। अगर बिकवाली का दौर गहराता है, तो किस्तों में निवेश की रणनीति (Staggered plan) पर कायम रहें और बची हुई किस्तों के लिए कैश तैयार रखें। कमजोर सेक्टर्स में बिना सोचे-समझे एवरेजिंग करने से बचें। हड़बड़ी में ट्रेड करने के बजाय क्रूड ऑयल, रुपये के रुझान और एफआईआई (विदेशी पूंजी) के प्रवाह पर बारीक नजर रखें।
Story first published: Wednesday, September 9, 2026, 15:05 [IST]
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