July 22, 2026

श्री बगलामुखी व्रत कथा नलखेड़ा क्षेत्र - Shri Baglamukhi Vrat Katha: The Divine Legend of Nalkheda Kshetra

अथ प्रथमोऽध्यायः  एक समय नैमिषारण्य तीर्थ में मालवा क्षेत्र के राजाओं ने सूत जी से पूछा, "हे मुनिवर! कलियुग में मनुष्यों के शत्रुओं का नाश करने वाला, विजय दिलाने वाला और कष्टों को हरने वाला कौन सा सुलभ मार्ग है? कृपया वह हमें बताएं।"

सूत जी बोले- "हे ऋषियों! एकाग्र मन से सुनो। आगर-मालवा जिले की नलखेड़ा तहसील में, लखुंदर नदी के पावन तट पर त्रिशक्ति स्वरूपा माँ बगलामुखी का एक परम सिद्ध दिव्य स्थान है।" यह स्थान समस्त सिद्धियों को देने वाला और शत्रुओं का स्तंभन करने वाला है। यहाँ माता स्वयंभू रूप में विराजमान हैं, जिनके दर्शन मात्र से ही मनुष्य के मनोरथ सिद्ध हो जाते हैं।

अथ द्वितीयोऽध्यायः 

सूत जी बोले- "अब मैं इस मंदिर की प्राचीन कथा कहता हूँ। महाभारत काल में जब कौरवों और पांडवों के बीच भयंकर युद्ध की स्थिति बनी, तब भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों को विजय प्राप्त करने हेतु शक्ति की उपासना का आदेश दिया।" श्री हरि कृष्ण की आज्ञा पाकर पांडवों ने लखुंदर नदी के किनारे कठोर तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवती बगलामुखी प्रकट हुईं और पांडवों को कौरवों पर विजय का आशीर्वाद दिया। इसके पश्चात बड़े भाई धर्मराज युधिष्ठिर ने यहाँ माता के भव्य मंदिर का निर्माण करवाया। ईस्वी सन् 1816 में इस प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया, जो आज भी भक्तों की आस्था का केंद्र है।

अथ तृतीयोऽध्यायः 

सूत जी बोले- "हे ऋषियों! अब माता के अद्भुत स्वरूप और महिमा का वर्णन सुनो। माता का मुख बगुले के समान तेजस्वी है, जिसके कारण उन्हें 'बगलामुखी' कहा जाता है।" वे पीले वस्त्र धारण करती हैं, इसलिए उन्हें 'पीताम्बरा' भी कहते हैं। भारत में माता के केवल तीन ही प्रमुख ऐतिहासिक मंदिर हैं दतिया (मप्र), काँगड़ा (हिमाचल) और यह नलखेड़ा (मालवा) का मंदिर।

यहाँ माँ के साथ-साथ श्री लक्ष्मी, सरस्वती, चामुंडा, भगवान श्रीकृष्ण, हनुमान जी और काल भैरव भी विराजमान हैं। शास्त्रों में वर्णित दस महाविद्याओं में माता बगलामुखी का स्थान अत्यंत विशिष्ट है।

अथ चतुर्थोऽध्यायः 

सूत जी बोले- "अब माता की पूजा का विधान सुनो। माँ को पीला रंग अत्यंत प्रिय है।" साधक पीले वस्त्र धारण कर, पीले फूल, पीली मिठाई और हल्दी की गांठ की माला से माता का पूजन करते हैं। यह पूजन विशेषकर तांत्रिक विधि और नियमों के साथ किया जाता है। यहाँ देश-विदेश से विशिष्ट जन, जीवन में उपस्थित कठिन संघर्ष में सफलता की कामना लेकर आते हैं। जो मनुष्य भक्ति भाव से माता की शरण में आता है, माता उसके शत्रुओं का नाश कर उसे अभय प्रदान करती हैं।

जो इस पावन कथा को सुनता या सुनाता है, भगवती बगलामुखी की कृपा से उसके जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं और अंत में वह परम पद को प्राप्त करता है।

॥इति श्रीमदाचार्योपदेशावस्थिविरचिता श्रीबगलामुखीपुराणान्तर्गता श्रीनलखेड़ामाहात्म्यकथा सम्पूर्णा॥

बोलिए पीताम्बरा माई की जय!