वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ भक्तवत्सल गजानन की यह कथा श्रद्धा और विश्वास की अनूठी गाथा है, जिसे स्थानीय लोग पीढ़ियों से सुनते और सुनाते आ रहे हैं। इस कथा का श्रद्धापूर्वक श्रवण करने और श्री बाचावानी गणेश का संकल्प लेने से नवीन व्यवसाय, विवाह, संतान, शिक्षा एवं प्रतियोगी परीक्षा, एवं परिवार के सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलती है।
लगभग 800 वर्ष पूर्व बाचावानी का यह क्षेत्र फतेहपुर रियासत के अधीन था। एक समय यहाँ के एक भाग्यशाली किसान को स्वप्न में भगवान गणेश ने दर्शन देकर अपने आगमन का संकेत दिया। जब वह किसान अपने खेत में हल जोत रहा था, तब अचानक भूमि से एक अलौकिक प्रतिमा प्राप्त हुई। एक ही पत्थर पर तराशी गई इस दिव्य प्रतिमा में न केवल भगवान गणेश, बल्कि रिद्धि-सिद्धि, मूषकराज और शुभ-लाभ की आकृतियाँ भी अत्यंत सुंदरता से उकेरी गई थीं।
जब फतेहपुर रियासत के राजगोंड राजा को इस दिव्य प्रतिमा की सूचना मिली, तो वे इसके सौंदर्य पर मोहित हो गए। उन्होंने आदेश दिया कि इस प्रतिमा को रियासत के मुख्य केंद्र फतेहपुर लाकर भव्य मंदिर में स्थापित किया जाए। प्रभु श्री गणेश की प्रतिमा को धूमधाम से ले जाने के लिए एक विशाल और शक्तिशाली हाथी लाया गया। किंतु जैसे ही प्रतिमा को हाथी पर सवार किया, बलशाली हाथी उसको लेकर एक कदम आगे बढ़ाने में भी असमर्थ होकर वहीं बैठ गया। अनेक प्रयासों के बाद भी जब हाथी टस से मस नहीं हुआ, तब राजा को बोध हुआ कि स्वयं गणपति महाराज इसी पावन भूमि पर विराजमान रहना चाहते हैं। तब राजा ने अपनी भूल स्वीकार की और उसी स्थान पर एक भव्य मंदिर का निर्माण कराया।
बाचावानी के गणेश जी की सबसे बड़ी विशेषता उनकी दाहिनी ओर मुड़ी हुई सूंड है, जिसके कारण उन्हें 'सिद्धिविनायक' कहा जाता है। गणेश जी न केवल संकटमोचक हैं, बल्कि पूरे गाँव के रक्षक भी हैं। मान्यता है कि जब भी गाँव पर ओलावृष्टि का संकट आता है और मंदिर का घंटा बजाया जाता है, तो विघ्नहर्ता की कृपा से ओले पड़ना तुरंत बंद हो जाते हैं। यहाँ की एक और अद्भुत परंपरा यह है कि गणेश चतुर्थी (श्री गणेश उत्सव) पर पूरे गाँव में कहीं भी अलग से गणेश प्रतिमा स्थापित नहीं की जाती; पूरा गाँव केवल मंदिर के इन्हीं गणेश जी को अपना आराध्य मानता है।
भक्तों की आस्था और महोत्सव इस जागृत देवस्थान पर जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से मन्नत मांगता है, चाहे वह संतान प्राप्ति हो, विवाह की बाधा हो या न्यायालय के मामले, भगवान उनकी झोली अवश्य भरते हैं। प्रतिवर्ष माघ मास की तिल चतुर्थी पर यहाँ विशाल मेला लगता है और राज्य स्तरीय भजन प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाती हैं, जहाँ हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़ते हैं। आज भी एक ही परिवार की आठवीं पीढ़ी अटूट श्रद्धा के साथ प्रभु की सेवा में लीन है।
ऐसे मंगलकारी, विघ्नविनाशक और सिद्धिविनायक बाचावानी गणेश जी के चरणों में हम बारंबार प्रणाम करते हैं।
॥ बोलो बाचावानी के श्री गणेश महाराज की जय ॥
बाचावानी गणेश मंदिर कैसे पहुंचे?
बाचावानी गांव मुख्य रूप से पिपरिया और बनखेड़ी के बीच स्थित है। यह पिपरिया से लगभग 18 किलोमीटर और बनखेड़ी से लगभग 7-8 किलोमीटर की दूरी पर है।
रेल मार्ग द्वारा (सबसे सुविधाजनक): यदि आप ट्रेन से आ रहे हैं, तो सबसे नजदीकी प्रमुख रेलवे स्टेशन पिपरिया (PPI) है। यह स्टेशन इटारसी-जबलपुर रेल मार्ग पर स्थित है और देश के प्रमुख शहरों से सीधे जुड़ा हुआ है। पिपरिया स्टेशन पर उतरने के बाद आप स्थानीय बस, ऑटो-रिक्शा या निजी टैक्सी किराए पर लेकर आसानी से बाचावानी पहुंच सकते हैं। (कुछ पैसेंजर ट्रेनें बनखेड़ी स्टेशन पर भी रुकती हैं)।
सड़क मार्ग द्वारा: नर्मदापुरम, भोपाल, जबलपुर या इंदौर से पिपरिया के लिए नियमित बसें चलती हैं। पिपरिया से बनखेड़ी जाने वाले मुख्य मार्ग पर ही बाचावानी स्थित है, इसलिए निजी वाहन या कैब से भी यहाँ आसानी से पहुंचा जा सकता है।
वायु मार्ग द्वारा: सबसे नजदीकी हवाई अड्डा राजा भोज विमानतल (भोपाल) है, जो यहाँ से लगभग 160 किलोमीटर दूर है। वहां से आप ट्रेन या टैक्सी के जरिए आ सकते हैं।
गूगल मैप लोकेशन लिंक: गूगल मैप पर यदि आप "Shree Ganesh Mandir Bachavani Narmadapuram" सर्च करेंगे तो आपको मंदिर की लोकेशन मिल जाएगी। यहां क्लिक करके आप डायरेक्ट गूगल मैप पर मंदिर की लोकेशन ओपन कर सकते हैं।
बाचावानी के आसपास प्रमुख धार्मिक और दार्शनिक स्थल
चूंकि बाचावानी पिपरिया के पास है, इसलिए आप अपनी यात्रा में मध्य प्रदेश के कुछ सबसे प्रसिद्ध पर्यटन और धार्मिक स्थलों को शामिल कर सकते हैं:
1. पचमढ़ी (सतपुड़ा की रानी)
बाचावानी से लगभग 70 किलोमीटर दूर स्थित पचमढ़ी मध्य प्रदेश का एकमात्र और बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन है। यह प्रकृति प्रेमियों और आध्यात्मिक यात्रियों दोनों के लिए स्वर्ग के समान है।
प्रमुख आकर्षण: बी फॉल्स (Bee Falls), धूपगढ़ (मध्य प्रदेश की सबसे ऊंची चोटी और सनसेट पॉइंट), हांडी खोह, और अप्सरा विहार।
धार्मिक महत्व: यहाँ स्थित जटाशंकर गुफा, महादेव गुफा और चौरागढ़ मंदिर (जो एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित भगवान शिव का प्रसिद्ध मंदिर है) अत्यंत पवित्र माने जाते हैं।
2. सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान (Satpura National Park)
यदि आप वन्यजीव और साहसिक पर्यटन (Adventure Tourism) के शौकीन हैं, तो सतपुड़ा टाइगर रिजर्व का दौरा जरूर करें। पिपरिया के पास स्थित 'मढ़ई' (Madhai) इसका मुख्य प्रवेश द्वार है, जहाँ से आप जंगल सफारी और बोट सफारी का आनंद ले सकते हैं।
3. तिलकसिंदूर (Tilak Sindur)
यह पिपरिया के पास ही एक और प्रसिद्ध धार्मिक और प्राकृतिक स्थल है। यहाँ एक पहाड़ी पर भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है। महाशिवरात्रि के समय यहाँ विशाल मेला लगता है और प्राकृतिक गुफाएं पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।
4. नर्मदा घाट (नर्मदापुरम और सोहागपुर के पास)
नर्मदापुरम जिला मां नर्मदा के पावन तटों के लिए प्रसिद्ध है। यदि आपके पास समय है, तो आप जिला मुख्यालय पर स्थित प्रसिद्ध सेठानी घाट जा सकते हैं, अथवा बाचावानी के पास बनखेड़ी क्षेत्र में पड़ने वाले नर्मदा नदी के विभिन्न स्थानीय शांत घाटों (जैसे सांडिया घाट) पर जाकर शांति और आध्यात्मिक सुकून का अनुभव कर सकते हैं।
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