October 7, 2026

'पाकिस्तान से ड्रोन से हथियार-ड्रग्स सप्लाई का ट्रेंड बढ़ा': दिनेश एमएन बोले- कॉन्स्टेबल का रोल SHO और SP से कम नहीं, वीरप्पन ऑपरेशन इनके कारण सफल रहा था - Alwar News

अलवर37 मिनट पहले

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दीक्षांत समारोह में एडीजी दिनेश एमएन पहुंचे। वहां कांस्टेबल को संबोधित करते हुए मोटवेट किया। - Dainik Bhaskar

दीक्षांत समारोह में एडीजी दिनेश एमएन पहुंचे। वहां कांस्टेबल को संबोधित करते हुए मोटवेट किया।

राजस्थान पुलिस की एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) के एडीजीपी दिनेश एमएन ने राज्य में बढ़ते साइबर क्राइम, नारकोटिक्स और पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हो रही ड्रग्स और हथियारों की तस्करी को पुलिस के लिए बड़ा चैलेंज बताया है।

उन्होंने कहा कि सीमा पार से ड्रोन ड्रॉपिंग का यह नया ट्रेंड बीते 4-5 सालों में तेजी से बढ़ा है, जिस पर राजस्थान पुलिस, गंगानगर, बाड़मेर पुलिस और एटीएस मिलकर प्रभावी कार्रवाई कर रही हैं। न केवल लोकल नेटवर्क ध्वस्त किए गए हैं, बल्कि विदेश में बैठकर गैंग चलाने वालों को भी दबोचा गया है।

दिनेश एमएन ने गुरुवार को अलवर में आईटीबीपी के दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि कही। उन्होंने पुलिसिंग, टीम वर्क और अपने 30 साल के सेवा अनुभव को साझा करते हुए आईटीबीपी के जवानों से कहा कि पुलिस में एक कॉन्स्टेबल से लेकर डीजीपी तक सब अफसर हैं।

सबके पास समान अवसर होते हैं। हम आमजन को बड़ी सुरक्षा देने का काम कर सकते हैं। वीरप्पन ऑपरेशन व रनपाल सिंह एनकाउंटर का जिक्र करते हुए बताया कि बड़े-बड़े ऑपरेशन व एनकाउंटर में एक कॉन्स्टेबल से लेकर अफसर की बड़ी भूमिका होती है।

ड्रोन ड्रॉपिंग नया ट्रेंड, विदेश में बैठे आकाओं तक पहुंची पुलिस

दिनेश एमएन ने कहा कि मौजूदा पुलिस के सामने पाकिस्तान सीमा से हीरोइन, ड्रग्स और हथियारों की ड्रोन से सप्लाई को रोकने की बड़ी चुनौती है। जिसमें राजस्थान पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। भारी मात्रा में जब्ती के साथ ही स्थानीय और विदेशी नेटवर्क पर शिकंजा कसा गया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी बड़े एनकाउंटर या ऑपरेशन में नाम भले ही किसी अधिकारी का सामने आए, लेकिन सफलता पूरी टीम की मेहनत का नतीजा होती है। पुलिस का मुख्य लक्ष्य ऐसा माहौल बनाना है जिससे अपराधी डरे और आम जनता दिन-रात खुद को महफूज महसूस करे।

कॉन्स्टेबल का रोल SHO और SP से कम नहीं

दिनेश एमएन ने कहा कि पुलिस में कॉन्स्टेबल से लेकर डीजीपी तक सभी ऑफिसर हैं और सभी को काम साबित करने का बराबर मौका मिलता है। उन्होंने याद दिलाया कि वीरप्पन ऑपरेशन हो या 10 साल पहले राजस्थान का रणपाल सिंह एनकाउंटर दोनों में ही कॉन्स्टेबल और हेड कॉन्स्टेबल की सूचना व सटीक कार्रवाई से ही ऑपरेशन सफल हुए थे।

वर्दी सिर्फ नौकरी नहीं, आमजन की तकलीफ दूर करने का जरिया

30 साल की नौकरी का निचोड़ बताते हुए उन्होंने कहा कि वेतन, इज्जत और सुविधाओं से इतर सबसे बड़ी संतुष्टि किसी परिवादी की तकलीफ दूर करने और उसे सुरक्षा का अहसास कराने से मिलती है।

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