
शिवलिंग और ज्योतिर्लिंग में अंतरImage Credit source: PTI
Sawan 2026: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है. इस पूरे माह में शिवभक्त मंदिरों में जाकर शिवलिंग और देश के 12 ज्योतिर्लिंगों पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करते हैं. कांवड़ यात्रा से लाया गया गंगाजल भी शिवलिंग पर चढ़ाने की परंपरा है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि जिस शिवलिंग की वे पूजा कर रहे हैं, वह सामान्य शिवलिंग है या ज्योतिर्लिंग. दोनों भगवान शिव के ही स्वरूप हैं, लेकिन धार्मिक मान्यताओं और आध्यात्मिक दृष्टि से इनमें बड़ा अंतर बताया गया है.
क्या है ज्योतिर्लिंग की उत्पत्ति?
पुराणों के अनुसार, एक बार भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु के बीच यह विवाद हुआ कि दोनों में श्रेष्ठ कौन है. उसी समय भगवान शिव एक अनंत प्रकाश स्तंभ (ज्योति) के रूप में प्रकट हुए. उन्होंने दोनों देवताओं से उस प्रकाश स्तंभ का आदि और अंत खोजने को कहा, लेकिन कोई भी उसकी सीमा तक नहीं पहुंच सका. तब दोनों ने भगवान शिव की महिमा स्वीकार की. मान्यता है कि इसी दिव्य प्रकाश स्तंभ के अंश पृथ्वी पर 12 स्थानों पर प्रकट हुए, जिन्हें आज 12 ज्योतिर्लिंग के नाम से जाना जाता है. इन्हें भगवान शिव का स्वयंभू और साक्षात स्वरूप माना जाता है.
सामान्य शिवलिंग कैसे होता है?
सामान्य शिवलिंग अधिकांश मंदिरों और घरों में स्थापित किए जाते हैं. इनका निर्माण पत्थर, धातु, मिट्टी, संगमरमर, स्फटिक या बाकी पदार्थों से किया जाता है. स्थापना के समय वैदिक मंत्रों और प्राण-प्रतिष्ठा के माध्यम से इनमें भगवान शिव का आवाहन किया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इन शिवलिंगों की नियमित पूजा, अभिषेक और मंत्र जाप से उनकी दिव्यता बनी रहती है. इसलिए घर या मंदिर में स्थापित शिवलिंग की नित्य पूजा का विशेष महत्व बताया गया है.
ज्योतिर्लिंग क्यों माने जाते हैं विशेष?
मान्यता के अनुसार, सभी 12 ज्योतिर्लिंग मानव निर्मित नहीं हैं. इन्हें भगवान शिव का स्वयं प्रकट (स्वयंभू) स्वरूप माना जाता है. कहा जाता है कि इनमें भगवान शिव की दिव्य चेतना और ब्रह्मांडीय ऊर्जा सदैव विद्यमान रहती है. इसी कारण ज्योतिर्लिंगों को अत्यंत जाग्रत और चमत्कारी माना जाता है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां दर्शन और जलाभिषेक करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है तथा जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं.

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग, महाराष्ट्र फोटो: PTI
शिवलिंग और ज्योतिर्लिंग में क्या है बड़ा अंतर?
शिवलिंग और ज्योतिर्लिंग दोनों भगवान शिव के पूजनीय स्वरूप हैं, लेकिन दोनों की उत्पत्ति और धार्मिक मान्यता अलग-अलग है. सामान्य शिवलिंग का निर्माण मनुष्य द्वारा किया जाता है और उसकी स्थापना प्राण-प्रतिष्ठा के साथ होती है. वहीं ज्योतिर्लिंग स्वयंभू माने जाते हैं और इनमें भगवान शिव की दिव्य उपस्थिति सदैव विद्यमान रहने की मान्यता है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, सामान्य शिवलिंग में पूजा-अर्चना के माध्यम से दिव्य ऊर्जा का आवाहन किया जाता है, जबकि ज्योतिर्लिंगों की ऊर्जा को अनादि, अनंत और खुद से जाग्रत माना गया है.
देश के 12 ज्योतिर्लिंग कौन-कौन से हैं?
भारत में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग माने गए हैं, जिन्हें बहुत ही पवित्र और स्वयंभू शिव स्वरूप माना जाता है. इनमें सोमनाथ (गुजरात), मल्लिकार्जुन (आंध्र प्रदेश), महाकालेश्वर (उज्जैन, मध्य प्रदेश), ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश), केदारनाथ (उत्तराखंड), भीमाशंकर (महाराष्ट्र), काशी विश्वनाथ (वाराणसी, उत्तर प्रदेश), त्र्यंबकेश्वर (महाराष्ट्र), बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग, (झारखंड), नागेश्वर (गुजरात), रामेश्वरम (तमिलनाडु) और घृष्णेश्वर (महाराष्ट्र) शामिल हैं. धार्मिक मान्यता है कि इन सभी ज्योतिर्लिंगों के दर्शन और श्रद्धापूर्वक जलाभिषेक करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

वरुण चौहान
इलेक्ट्रानिक और डिजिटल मीडिया में करीब एक दशक से ज्यादा का अनुभव. 2008 में एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन (AAFT) नोएडा से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद कुछ अलग और नया करने की सोच के साथ मीडिया में अपने सफर की शुरुआत की. शुरुआत से ही मेरी रुचि उन विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने में रही है, जो भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं. अपने करियर के दौरान Channel One News, Sahara Samay, A2Z News, News Express, National Voice और पंजाब केसरी डिजिटल जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. इन संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, फील्ड रिपोर्टिंग,और डिजिटल कंटेंट को सीखने का अनुभव मिला. फिलहाल देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में धर्म और आस्था से जुड़ी खबरों, धार्मिक आयोजनों, ज्योतिष, वास्तु, पौराणिक कथाओं, मंदिरों की परंपराओं और व्रत-त्योहारों से जुड़े विषयों को सरल, सहज और तथ्यपूर्ण भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहा हूं. महाकुंभ 2025 की कवरेज मेरे करियर के महत्वपूर्ण अनुभवों में शामिल है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, अखाड़ों की परंपराओं, संत समाज की गतिविधियों और कुंभ से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर विस्तार से लिखने का अवसर मिला. इसके अलावा चारधाम यात्रा, सावन, नवरात्रि, दीपावली, होली, छठ पूजा, अमरनाथ यात्रा, रमज़ान और अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों पर भी लगातार लेखन किया है. भारतीय संस्कृति, धर्म-दर्शन, ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, पुराणों और लोक आस्थाओं के अध्ययन में विशेष रुचि रखता हूं. मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है कि धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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