Updated: Friday, July 31, 2026, 15:29 [IST]
Shehzad Poonawalla vs Tehseen Poonawalla: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे शहजाद पूनावाला (Shehzad Poonawalla) ने भाजपा के प्रवक्ता का पद छोड़ दिया है। खबर है कि उन्होंने बीजेपी भी छोड़ दी है। शहजाद के इस्तीफे की खबरों के बीच एक बार फिर उनकी और उनके बड़े भाई तहसीन पूनावाला की पुरानी राजनीतिक तकरार चर्चा में है। दोनों भाइयों के संबंध कुछ खास अच्छे नहीं हैं। समय-समय पर उनकी आपसी रंजिश जगजाहिर होती रही है।
दोनों भाई कई बार सार्वजनिक तौर पर एक-दूसरे के खिलाफ बयान दे चुके हैं। कभी कांग्रेस को लेकर दोनों के रिश्तों में दरार आई, तो हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान UPI भुगतान को लेकर भी दोनों सोशल मीडिया पर आमने-सामने आ गए। दिलचस्प बात यह है कि दोनों भाइयों की राजनीतिक विचारधारा अलग-अलग रही है और यही मतभेद कई बार राष्ट्रीय सुर्खियां बन चुके हैं। आइए जानते हैं कि आखिर किन मुद्दों पर शहजाद और तहसीन के बीच सबसे बड़ी टकराव देखने को मिला।
जब UPI को लेकर भिड़ गए दोनों भाई
कुछ समय पहले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी झारग्राम में एक झालमुड़ी विक्रेता के पास पहुंचे थे। वहां उन्होंने झालमुड़ी खाने के बाद दुकानदार को 10 रुपये का नोट दिया। इस वीडियो को प्रधानमंत्री ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी शेयर किया। इसके बाद तहसीन पूनावाला ने एक्स (X) पर वीडियो शेयर करते हुए तंज कसा था। उन्होंने लिखा था, "माननीय प्रधानमंत्री जी ने नकद भुगतान किया। दुकानदार के पास UPI या ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम नहीं था। लेकिन कुल मिलाकर, यह एक सुखद अनुभव रहा।"
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शहजाद को ये बात बिलकुल नागवार गुजरी। तहसीन की पोस्ट के कुछ ही समय बाद शहजाद पूनावाला ने उसी दुकानदार की दूसरी तस्वीर शेयर की, जिसमें दुकान पर लगा UPI QR कोड साफ दिखाई दे रहा था। शहजाद ने पोस्ट में लिखा था, "दुकानदार के पास UPI था - वही UPI जिसे कांग्रेस के वित्त मंत्री चिदंबरम ने घमंड में यह कहकर खारिज कर दिया था कि गरीब लोग कभी इसका इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। 10 रुपये का नोट इसलिए दिया गया था ताकि दुकानदार उसे हमेशा के लिए संभालकर रख सके।" इसके बाद दोनों भाइयों के बीच सोशल मीडिया पर यह बहस काफी चर्चा में रही।
2017 में कांग्रेस को लेकर आई सबसे बड़ी दरार
शहजाद और तहसीन के रिश्तों में सबसे बड़ा सार्वजनिक विवाद 2017 में सामने आया था। उस समय शहजाद कांग्रेस में थे। उन्होंने राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा था कि पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र नहीं है और अध्यक्ष पद का चुनाव पहले से तय है। शहजाद के इन बयानों के बाद तहसीन पूनावाला ने खुलकर उनका विरोध किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि वह शहजाद से अपने सभी रिश्ते खत्म कर रहे हैं। तहसीन का कहना था कि अगर शहजाद को पार्टी से शिकायत थी तो उन्हें उसे सार्वजनिक करने के बजाय पार्टी के भीतर उठाना चाहिए था।
गांधी-वाड्रा परिवार से रिश्ते भी बने चर्चा की वजह
इस विवाद की एक और वजह तहसीन पूनावाला का गांधी-वाड्रा परिवार से जुड़ाव भी माना जाता है। तहसीन की शादी मोनिका वाड्रा से हुई है, जो रॉबर्ट वाड्रा की चचेरी बहन हैं। ऐसे में शहजाद के राहुल गांधी पर हमलों को गांधी-वाड्रा परिवार से जुड़े रिश्तों के संदर्भ में भी देखा गया, जिससे यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया।
2017 के विवाद के बाद शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस छोड़ दी और बाद में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। आगे चलकर वह भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता बने और पार्टी का प्रमुख चेहरा रहे। वहीं, तहसीन पूनावाला राजनीतिक विश्लेषक और टीवी डिबेटर के रूप में सक्रिय रहे। अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं की वजह से दोनों भाइयों के बीच समय-समय पर सार्वजनिक मतभेद सामने आते रहे हैं, जिसने कई बार राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं।
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