
शारदीय नवरात्रि 2026Image Credit source: pexels
Shardiya Navratri 2026 Date: शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा के साथ मंदिर और पूजा स्थान की सजावट का भी विशेष महत्व माना जाता है. पंचांग के अनुसार साल 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026, रविवार से हो रही है. नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है. भक्त माता रानी को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग व अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि कुछ ऐसी वस्तुएं भी हैं, जिन्हें नवरात्रि के दिनों में मंदिर में रखना शुभ माना जाता है. आइए जानते हैं.
मां दुर्गा के मंदिर में रखें लाल चुनरी
मां दुर्गा की पूजा में लाल रंग का विशेष महत्व माना जाता है. लाल रंग को शक्ति, ऊर्जा और सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है. इसलिए नवरात्रि में माता रानी को लाल चुनरी अर्पित करने की परंपरा हर घर में देखने को मिलती है.
अखंड ज्योत या दीपक रखें
नवरात्रि में दीपक और अखंड ज्योत का विशेष महत्व माना जाता है. कई भक्त नवरात्रि के पूरे नौ दिनों तक अखंड ज्योत जलाते हैं. दीपक को ज्ञान, प्रकाश और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि पूजा के दौरान दीपक जलाने से वातावरण पवित्र और भक्तिमय होता है.
नारियल जरूर रखें
मां दुर्गा की पूजा में नारियल का भी विशेष महत्व माना जाता है. नवरात्रि में कलश स्थापना के दौरान नारियल रखने की परंपरा है. नारियल को पूर्णता और शुभता का प्रतीक माना जाता है. कलश के ऊपर नारियल रखने से पूजा की धार्मिक विधि पूरी मानी जाती है.
लाल फूल और गुड़हल रखें
मां दुर्गा को लाल फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है. खास तौर पर गुड़हल का फूल देवी पूजा में काफी लोकप्रिय है. लाल रंग को शक्ति और ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है. इसलिए नवरात्रि में मां दुर्गा को लाल फूल अर्पित करने की परंपरा है.
मंदिर में कलश रखें
नवरात्रि में कलश स्थापना को पूजा की महत्वपूर्ण विधियों में शामिल किया जाता है. कलश को मंगल और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. कलश में जल भरकर उसके ऊपर नारियल रखा जाता है और उसके आसपास जौ बोए जाते हैं. इसलिए घरों में नवरात्रि के पहले दिन विधि-विधान से कलश स्थापना की जाती है.
मां दुर्गा के मंदिर में रखें जौ
नवरात्रि में जौ बोने की परंपरा भी काफी पुरानी है. कलश स्थापना के दौरान मिट्टी के पात्र में जौ बोए जाते हैं और नौ दिनों तक उनकी देखभाल की जाती है. नवरात्रि के दौरान जौ के अंकुर धीरे-धीरे बढ़ते हैं. इन्हें धार्मिक दृष्टि से शुभ संकेत के रूप में देखा जाता है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

वरुण चौहान
इलेक्ट्रानिक और डिजिटल मीडिया में करीब एक दशक से ज्यादा का अनुभव. 2008 में एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन (AAFT) नोएडा से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद कुछ अलग और नया करने की सोच के साथ मीडिया में अपने सफर की शुरुआत की. शुरुआत से ही मेरी रुचि उन विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने में रही है, जो भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं. अपने करियर के दौरान Channel One News, Sahara Samay, A2Z News, News Express, National Voice और पंजाब केसरी डिजिटल जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. इन संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, फील्ड रिपोर्टिंग,और डिजिटल कंटेंट को सीखने का अनुभव मिला. फिलहाल देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में धर्म और आस्था से जुड़ी खबरों, धार्मिक आयोजनों, ज्योतिष, वास्तु, पौराणिक कथाओं, मंदिरों की परंपराओं और व्रत-त्योहारों से जुड़े विषयों को सरल, सहज और तथ्यपूर्ण भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहा हूं. महाकुंभ 2025 की कवरेज मेरे करियर के महत्वपूर्ण अनुभवों में शामिल है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, अखाड़ों की परंपराओं, संत समाज की गतिविधियों और कुंभ से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर विस्तार से लिखने का अवसर मिला. इसके अलावा चारधाम यात्रा, सावन, नवरात्रि, दीपावली, होली, छठ पूजा, अमरनाथ यात्रा, रमज़ान और अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों पर भी लगातार लेखन किया है. भारतीय संस्कृति, धर्म-दर्शन, ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, पुराणों और लोक आस्थाओं के अध्ययन में विशेष रुचि रखता हूं. मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है कि धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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