October 3, 2026

Shardiya Navratri 2026: कब से शुरू हो रहे हैं शारदीय नवरात्र, नोट कर लें महाअष्टमी, महानवमी और कन्या पूजन की सही तारीख

Shardiya Navratri 2026: कब से शुरू हो रहे हैं शारदीय नवरात्र, नोट कर लें महाअष्टमी, महानवमी और कन्या पूजन की सही तारीख

सनातन धर्म में शारदीय नवरात्र (Shardiya Navratri 2026) का पर्व बेहद पवित्र, ऊर्जावान और उत्साह से भरा माना जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष शारदीय नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026 से होने जा रही है। इन नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है और व्रत रखे जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन दिनों जो भक्त सच्चे मन से मां अंबे की साधना करते हैं, उनके जीवन के सभी प्रकार के कष्ट, भय और संकट दूर होते हैं तथा माता रानी की कृपा से घर-परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और ऐश्वर्य का वास होता है।

महाअष्टमी और महानवमी का महत्व और सही तिथियां

शारदीय नवरात्र के दौरान अष्टमी और नवमी तिथि का विशेष और अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। इन दोनों ही तिथियों पर मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ-साथ कन्या पूजन (Kanya Pujan) करने का विधान है। ऐसा माना जाता है कि बिना कन्या पूजन के नवरात्र की पूजा और साधना का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। आइए जानते हैं कि इस साल महाअष्टमी और महानवमी की सही तिथियां और मुहूर्त क्या हैं:

  • महाअष्टमी 2026 तिथि और मुहूर्त: पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 18 अक्टूबर को सुबह 08 बजकर 27 मिनट पर होगी, जबकि इस तिथि का समापन 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर महाअष्टमी 19 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी।

  • महानवमी 2026 तिथि और मुहूर्त: आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के नियमानुसार महानवमी और कन्या पूजन 20 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा।

घर पर कन्या पूजन करने की सही और सरल विधि

माता रानी को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए कन्या पूजन के नियमों का पूरी श्रद्धा के साथ पालन करना चाहिए। कन्या पूजन की संपूर्ण विधि इस प्रकार है:

  • आदरपूर्वक आमंत्रण: कन्या पूजन के दिन कन्याओं को आदर और सम्मान के साथ अपने घर बुलाएं। घर के द्वार पर उनका स्वागत करें।

  • चरण धोना: कन्याओं के घर में प्रवेश करने पर उनके चरणों को जल से धोएं और साफ तौलिए से gently पोंछें।

  • आसन और तिलक: कन्याओं को उत्तर दिशा की ओर मुख करके एक स्वच्छ और पवित्र आसन पर आराम से बिठाएं। इसके बाद सभी कन्याओं को कुमकुम, रोली और अक्षत का तिलक लगाएं और उनके दाहिने हाथ में कलावा (रक्षा सूत्र) बांधें।

  • आरती और भोग: शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करके सभी कन्याओं की प्रेमपूर्वक आरती उतारें और उन पर पुष्प वर्षा करें। इसके बाद उन्हें मां को अर्पित किया गया सात्विक भोजन (पूरी, चना और हलवा) श्रद्धा के साथ परोसें।

  • आशीर्वाद और दक्षिणा: भोजन कराने के पश्चात सभी कन्याओं के चरण छूकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें और अपनी सामर्थ्य के अनुसार उन्हें उपहार या दक्षिणा (फलर, वस्त्र या पैसे) भेंट करें। अंत में पूजन के दौरान हुई किसी भी भूल-चूक के लिए माता रानी और कन्याओं से क्षमा प्रार्थना करें।