October 23, 2026

Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा पर क्यों रखी जाती है खुली चांदनी में खीर? कैसे करें मां लक्ष्मी की पूजा?

Time Published: Friday, October 23, 2026, 20:55 [IST]

Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा का त्योहार हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस दिन घरों में मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। साथ ही रात में चंद्रमा की पूजा करने और उसकी रोशनी में खीर रखने की परंपरा भी है। इस साल शरद पूर्णिमा का पर्व 25 अक्टूबर, रविवार को मनाया जाएगा। त्योहार को लेकर घरों में अभी से तैयारियां शुरू हो सकती हैं।

खासकर पूजा करने वाले लोगों के लिए यह जानना जरूरी है कि पूजा की थाली में कौन-कौन सी चीजें होनी चाहिए। कई बार जल्दबाजी में जरूरी सामान छूट जाता है और पूजा के समय परेशानी होती है। ऐसे में पहले से सामग्री जुटा लेना बेहतर रहता है। आइए जानते हैं शरद पूर्णिमा की पूरी पूजा सामग्री, पूजा करने का तरीका और इस दिन से जुड़ी खास मान्यताएं।

Sharad Purnima 2026

शरद पूर्णिमा का महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को शरद पूर्णिमा मनाई जाती है। इस साल यह पर्व 25 अक्टूबर 2026 को पड़ रहा है। धार्मिक मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से पूर्ण होता है। उसकी किरणों को अमृत के समान गुणकारी माना जाता है। इसी वजह से शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने की परंपरा है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा के साथ चंद्रदेव को जल अर्पित किया जाता है।

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शरद पूर्णिमा पूजा सामग्री लिस्ट

शरद पूर्णिमा की पूजा के लिए सभी जरूरी चीजें पहले से जुटा लें, ताकि पूजा के दौरान किसी सामान की कमी न हो।

  • भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर
  • चंद्रदेव को जल चढ़ाने के लिए पात्र
  • रोली, कुमकुम और अक्षत यानी साबुत चावल
  • ताजे फूल और फूलों की माला
  • धूप, दीपक, घी और रुई की बत्ती
  • मौसमी फल, मिठाई और बताशे
  • खीर बनाने के लिए दूध, चावल, चीनी और मेवे
  • गंगाजल और साफ पानी
  • पान, सुपारी और नारियल
  • पूजा की थाली और बैठने के लिए आसन
  • चांदी, पीतल या तांबे का कलश
  • पारिवारिक परंपरा के अनुसार तुलसी दल
  • दान के लिए अनाज, कपड़े या दक्षिणा

पूजा का सामान पहले से खरीदने पर आखिरी समय की भागदौड़ से बचा जा सकता है। त्योहार के दिन बाजार में भीड़ होने के कारण कुछ चीजें महंगी भी मिल सकती हैं।

शरद पूर्णिमा पर कैसे करें पूजा?

शरद पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। धार्मिक परंपरा के अनुसार, इस दिन सफेद कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। इसके बाद घर के पूजा स्थान की सफाई करें। मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। शाम के समय घी का दीपक जलाएं और फूल, अक्षत, रोली, फल तथा मिठाई अर्पित करें।

पूजा के दौरान भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का ध्यान करें। इसके बाद चंद्रमा निकलने पर चंद्रदेव को जल अर्पित करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।

मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए क्या करें?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं। नारद पुराण से जुड़ी मान्यताओं में भी इस रात मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व बताया जाता है। इस दिन कनकधारा स्तोत्र का पाठ करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा मां लक्ष्मी के मंत्र का जाप भी किया जा सकता है।

मंत्र: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः

मान्यता है कि इस मंत्र का 108 बार जाप करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और घर में धन-धान्य तथा सुख-समृद्धि बनी रहती है।

चांदनी में खीर रखने की परंपरा

शरद पूर्णिमा की सबसे खास परंपराओं में चंद्रमा की रोशनी में खीर रखना शामिल है। इसके लिए दूध, चावल, चीनी और मेवे से खीर तैयार की जाती है। कुछ लोग इसमें केसर भी मिलाते हैं। धार्मिक विश्वास के अनुसार, शरद पूर्णिमा की चांदनी में रखी खीर को प्रसाद के रूप में खाने से सुख-समृद्धि और अच्छी सेहत का आशीर्वाद मिलता है।

खीर को साफ बर्तन में रखकर महीन जाली या सुरक्षित ढक्कन से ढकें, ताकि उसमें धूल और कीड़े न गिरें। उसे अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार कुछ समय चांदनी में रखें और फिर मां लक्ष्मी को भोग लगाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।

शरद पूर्णिमा पर दान का महत्व

शरद पूर्णिमा पर पूजा-पाठ के साथ जरूरतमंद लोगों की मदद करना भी शुभ माना जाता है। इस दिन अपनी क्षमता के अनुसार अनाज, कपड़े, भोजन या दक्षिणा का दान किया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा से किया गया दान पुण्य देने वाला माना जाता है। कई परिवार इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा के बाद गरीबों को भोजन भी कराते हैं।

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