October 22, 2026

'मुस्लिम हूं लेकिन नमाज नहीं पढ़ती', धर्म पर ये क्या बोल गईं Shabana Azmi? कहा- पति जावेद अख्तर नास्तिक हैं

Time Updated: Thursday, October 22, 2026, 11:34 [IST]

Shabana Azmi on Religion: बॉलीवुड की दिग्गज एक्ट्रेस शबाना आजमी अपनी बेबाक राय और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर बोलने के लिए जानी जाती हैं। उनकी निजी जिंदगी से लेकर विचारों तक, फैंस हमेशा उनके बारे में जानने के लिए उत्सुक रहते हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू में शबाना आजमी ने धर्म को लेकर अपने विचार शेयर किए। उन्होंने बताया कि बचपन में उनके घर का माहौल कैसा था, धर्म से उनका कितना जुड़ाव रहा और उनके पति व मशहूर गीतकार जावेद अख्तर इस मामले में उनसे किस तरह अलग सोच रखते हैं।

धर्म को लेकर क्या बोलीं शबाना आजामी?
शबाना आजमी ने साफ किया कि वह मुस्लिम हैं लेकिन नियमित रूप से नमाज नहीं पढ़तीं और धर्म उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि किसी व्यक्ति का धर्म और उसकी आस्था पूरी तरह निजी मामला होना चाहिए। सरकार को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

Shabana Azmi

नास्तिक पिता और कम धार्मिक मां के घर में बीता बचपन

-IIMUN के यूट्यूब चैनल पर शेयर की गई बातचीत में शबाना आजमी ने अपने बचपन और धार्मिक माहौल के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि उनके पिता और मशहूर शायर कैफी आजमी नास्तिक थे जबकि उनकी मां शौकत आजमी इस्लाम का पालन करती थीं लेकिन धर्म को लेकर बहुत सख्त नहीं थीं।

-ऐसे माहौल में पली-बढ़ीं शबाना आजमी के जीवन में धर्म कभी विशेष जिज्ञासा का विषय नहीं रहा। हालांकि उनकी बातचीत में आज भी उर्दू और इस्लामी संस्कृति से जुड़े कुछ शब्द सहज रूप से आ जाते हैं। उन्होंने बताया कि वह कभी-कभी 'माशाअल्लाह' और 'इंशाअल्लाह' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करती हैं, जिस पर उनके पति जावेद अख्तर सवाल उठाते हैं।

'माशाअल्लाह' और 'इंशाअल्लाह' कहने पर सवाल करते हैं जावेद अख्तर

-शबाना आजमी ने बताया कि जावेद को उनका बातचीत में इन शब्दों का इस्तेमाल करना पसंद नहीं आता। वह उनसे पूछते हैं कि जब वह ईश्वर में विश्वास नहीं करतीं तो इस तरह के धार्मिक शब्द क्यों बोलती हैं। एक्ट्रेस के मुताबिक जावेद अख्तर उनसे कहते हैं कि अगर कोई व्यक्ति हर बात पर 'प्रभु जी की मर्जी' कहता रहे, तो उन्हें कैसा लगेगा।

-हालांकि शबाना आजमी का मानना है कि ये शब्द अब उनकी भाषा का स्वाभाविक हिस्सा बन चुके हैं और वह इन्हें किसी खास धार्मिक भावना के तहत नहीं बोलतीं। इस बातचीत से ये भी सामने आया है कि धर्म को लेकर दोनों की सोच अलग होने के बावजूद वे एक-दूसरे के विचारों पर खुलकर चर्चा करते हैं।

'जावेद अख्तर कट्टर नास्तिक हैं'

-शबाना आजमी ने अपने पति जावेद अख्तर को बेहद कट्टर नास्तिक बताते हुए कहा कि वह उनसे कई बार इस मुद्दे पर बात करती हैं। एक्ट्रेस का मानना है कि अगर किसी व्यक्ति को धर्म का पालन करने या प्रार्थना करने से सुकून मिलता है तो उसे ऐसा करने की पूरी आजादी होनी चाहिए।

-शबाना आजमी ने कहा कि वह जावेद अख्तर से पूछती हैं कि अपनी नास्तिकता को इतना जाहिर करने की जरूरत क्या है कि किसी धार्मिक व्यक्ति को बुरा महसूस होने लगे। इस पर जावेद अख्तर का तर्क होता है कि अगर धार्मिक लोगों को अपनी आस्था जाहिर करने का अधिकार है तो एक नास्तिक को भी अपनी बात रखने का अधिकार होना चाहिए।

-इस तरह दोनों के बीच धर्म और आस्था को लेकर अलग-अलग नजरिए देखने को मिलते हैं। शबाना आजमी के अनुसार किसी व्यक्ति की मान्यताओं से असहमत होना अलग बात है लेकिन उसके विश्वास या अविश्वास के कारण उसे गलत महसूस कराना उचित नहीं है।

'मुस्लिम हूं लेकिन नमाज नहीं पढ़ती'

-अपने धार्मिक विश्वासों के बारे में बात करते हुए शबाना आजामी ने कहा कि वह मुस्लिम हैं और उन्हें ईद, उर्दू भाषा और भारतीय उपमहाद्वीप के खानपान और संस्कृति से खास लगाव है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वह नमाज नहीं पढ़तीं और धर्म का नियमित रूप से पालन नहीं करतीं। एक्ट्रेस के लिए धार्मिक पहचान और व्यक्तिगत आस्था दो अलग-अलग बातें हैं। वह अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव महसूस करती हैं लेकिन धर्म को अपने जीवन का केंद्रीय हिस्सा नहीं मानतीं।

-शबाना ने यह भी कहा कि ईश्वर की अवधारणा से उनका कोई विशेष जुड़ाव नहीं रहा है। उनके मुताबिक, धर्म पूरी तरह व्यक्तिगत विषय है। अगर किसी को प्रार्थना करने से शांति मिलती है तो इसमें उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। साथ ही उनका मानना है कि सरकार को लोगों के निजी धार्मिक मामलों से दूर रहना चाहिए।

धार्मिक कट्टरता पर भी खुलकर बोल चुकी हैं शबाना आजमी

-शबाना आजमी इससे पहले भी देश में धार्मिक ध्रुवीकरण और असहिष्णुता को लेकर अपनी राय जाहिर कर चुकी हैं। 'जूम' के साथ एक बातचीत में उन्होंने कहा था कि धार्मिक कट्टरपंथी न तो उन्हें पसंद करते हैं और न ही जावेद अख्तर को। उनके मुताबिक दोनों ही समुदायों के कट्टरपंथियों को उनके विचार असहज कर सकते हैं।

-एक्ट्रेस ने बताया था कि कभी किसी मौलवी की ओर से फतवा जारी कर दिया जाता है तो कभी उन पर आतंकवादी होने जैसे आरोप लगाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रतिक्रियाएं उनके और जावेद के धर्मनिरपेक्ष नजरिए को लेकर होने वाले विरोध को दर्शाती हैं।

'लड़ाई हिंदू-मुस्लिम की नहीं, उदारवादी और असहिष्णु सोच की है'

-शबाना आजमी ने धार्मिक बंटवारे पर अपनी बात रखते हुए कहा कि समाज में होने वाले टकराव को केवल हिंदू और मुस्लिम के बीच की लड़ाई के तौर पर नहीं देखना चाहिए। उनके अनुसार असल संघर्ष उदारवादी सोच रखने वाले लोगों और असहिष्णु विचारधारा के बीच है।

-शबाना आजामी ने कहा कि उदारवादी हिंदू और मुस्लिम एक तरफ खड़े हैं जबकि दोनों समुदायों के कट्टरपंथी दूसरी तरफ हैं। शबाना आजमी का मानना है कि धर्म का इस्तेमाल लोगों को बांटने और उनके बीच नफरत पैदा करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उनकी इस बात का मैसेज साफ है कि किसी व्यक्ति की पहचान केवल उसके धर्म से तय नहीं होनी चाहिए। आपसी सम्मान, सहिष्णुता और विचारों की स्वतंत्रता को महत्व देना जरूरी है।

धर्म पर शबाना आजमी की राय क्यों है खास?

-शबाना आजमी और जावेद अख्तर लंबे समय से अपने बेबाक विचारों के लिए चर्चा में रहे हैं। धर्म को लेकर दोनों की अलग-अलग मान्यताएं यह दिखाती हैं कि किसी रिश्ते में विचारों की समानता से ज्यादा एक-दूसरे की स्वतंत्रता का सम्मान भी मायने रखता है।

-शबाना आजामी की बातों में एक ओर अपनी सांस्कृतिक पहचान के प्रति लगाव नजर आता है तो दूसरी ओर धर्म को निजी चुनाव मानने की सोच भी। उनका मानना है कि किसी को आस्था रखने या न रखने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। यही वजह है कि धर्म, नास्तिकता और धर्मनिरपेक्षता पर उनकी राय एक बार फिर चर्चा में है।