SDGs: 2030 की समयसीमा नज़दीक, लेकिन प्रगति की सम्भावना बरक़रार
पश्चिम अफ़्रीकी देश बेनिन ने संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) पर प्रगति के लिए विकास वित्त जुटाने के नए रास्ते अपनाए हैं.
पिछले एक दशक में देश ने हर वर्ष घरेलू राजस्व को GDP के 0.5 प्रतिशत के बराबर बढ़ाया. 2021 में बेनिन ने अफ़्रीका का पहला SDG बॉन्ड जारी किया और उससे जुटी धनराशि शिक्षा व पेयजल पर ख़र्च की.
बेनिन के आर्थिक सहयोग मंत्री अरिस्तीद मेदेनू ने बताया कि पाँच वर्षों में पेयजल तक पहुँच 40 से बढ़कर 80 प्रतिशत हो गई, जबकि 2021 में शुरू हुए नए औद्योगिक क्षेत्र ने 25 हज़ार रोज़गार पैदा किए.
महासभा के उच्चस्तरीय सप्ताह से पहले आयोजित संयुक्त राष्ट्र के SDG Moment कार्यक्रम में उन्होंने कहा, “घरेलू राजस्व बढ़ाए बिना कोई देश SDGs पर आगे नहीं बढ़ सकता.”
उन्होंने कहा कि बेनिन इस बात की मिसाल है कि सरकारें अपने वादों को ठोस और लोगों के लिए फ़ायदेमन्द नीतियों में किस तरह बदल सकती हैं.
कई लक्ष्य अब भी पीछे
2015 में संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों ने सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा अपनाया था, जिसके तहत ग़रीबी का अन्त, पृथ्वी की रक्षा और स्थाई शान्ति सहित 17 सतत विकास लक्ष्य (SDGs) तय किए गए.
लेकिन 2030 की समयसीमा नज़दीक आने के बावजूद प्रगति धीमी और असमान है. संयुक्त राष्ट्र की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, आँकड़े उपलब्ध 139 लक्ष्यों में केवल 36 प्रतिशत सही दिशा में हैं या मध्यम प्रगति दिखा रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा, “प्रगति कभी अपने आप नहीं हुई. यह लोगों, समुदायों और देशों के दृढ़ संकल्प से हासिल हुई है.”
SDGs से ठोस प्रगति
न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में यूएन अधिकारियों और विश्व नेताओं ने पिछले दशक की उपलब्धियों के साथ आगे की चुनौतियों को भी रेखांकित किया.
SDGs अपनाए जाने के बाद से लगभग एक अरब लोगों को सुरक्षित पेयजल और 1.2 अरब लोगों को सुरक्षित स्वच्छता सेवाओं तक पहुँच मिली है. बिजली की पहुँच 87 से बढ़कर 92 प्रतिशत और इंटरनेट पहुँच 40 से बढ़कर 74 प्रतिशत हो गई है.
फिर भी, 49 प्रतिशत SDG लक्ष्य बहुत धीमी गति से आगे बढ़ रहे हैं और 15 प्रतिशत 2015 के स्तर से भी नीचे हैं.
महासभा अध्यक्ष ख़लीलुर रहमान ने कहा कि 2025 में 2.1 अरब लोग खाद्य असुरक्षा से प्रभावित थे और हर 10 में से एक व्यक्ति अब भी अत्यधिक ग़रीबी में जी रहा है.
SDGs के वित्तपोषण में हर वर्ष 4 ट्रिलियन डॉलर की कमी है. वहीं, 2025 में आधिकारिक विकास सहायता रिकॉर्ड 23 प्रतिशत घटी और कई देशों में क़र्ज़ चुकाने का ख़र्च सामाजिक सेवाओं से अधिक है.
मौजूदा रुझानों के अनुसार, इस सदी में वैश्विक तापमान लगभग 2.8 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है, जो पेरिस समझौते के 1.5 डिग्री लक्ष्य से काफ़ी अधिक है.
ख़लीलुर रहमान ने कहा, “ये ऐसे नुक़सान हैं जिन्हें बहुत से लोग झेल नहीं सकते. हममें से कई लोगों के लिए टिकाऊ विकास जीवन और मृत्यु का सवाल है.”
युवा नेताओं की अपील
SDGs के लिए संयुक्त राष्ट्र के युवा नेताओं जापान की सुज़ुका नाकामुरा और हेती के एडेलिन पियरे ने सरकारों से उसी तत्परता से कार्रवाई करने की अपील की, जिस तरह 11 वर्ष पहले इन लक्ष्यों पर सहमति बनी थी.
सुज़ुका नाकामुरा ने कहा, “यहाँ मौजूद और दुनिया भर के नेताओं से मेरा कहना है - यह वादा आपने किया था. अब उसे निभाइए.”
अरिस्तीद मेदेनू ने निजी क्षेत्र की भागेदारी पर ज़ोर देते हुए कहा कि सरकारें “अकेले यह काम नहीं कर सकतीं.”
SDG प्रगति में बड़ी बाधाएँ
महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि SDGs ने लोगों की ज़िन्दगी में ठोस बदलाव लाए हैं और दिखाया है कि सरकारें साथ मिलकर कार्रवाई करें, तो बहुपक्षीय सहयोग ठोस नतीजे दे सकता है.
इन प्रयासों से बाल और मातृ मृत्यु दर घटाने, HIV संक्रमण के लाखों नए मामलों को रोकने और शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा व नवीकरणीय ऊर्जा तक पहुँच बढ़ाने में मदद मिली है.
लेकिन महासचिव ने आगाह किया कि हिंसक टकराव, कमज़ोर होता अन्तरराष्ट्रीय सहयोग, जलवायु संकट, महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों पर हमले तथा क़र्ज़ व निवेश की चुनौतियाँ, SDG प्रगति की राह में बड़ी बाधाएँ बन रही हैं.
उन्होंने कहा, “इन लक्ष्यों को अपनाते समय सरकारों ने जो वादे किए थे, वे पूरे नहीं हो रहे हैं. अब उन्हें निभाने का समय है.”
शान्ति पहली शर्त
महासचिव ने असमानता से निपटने, पृथ्वी की रक्षा, टिकाऊ विकास के लिए वित्तीय सहायता जुटाने और उपलब्ध तकनीकों के बेहतर इस्तेमाल पर ज़ोर दिया.
उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य में अधिक निवेश, नवीकरणीय ऊर्जा की ओर न्यायसंगत बदलाव, विकासशील देशों के लिए अधिक वित्तीय व क़र्ज़ सहायता और “ज़िम्मेदार” कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल की अपील की.
महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि शान्ति, सतत विकास की बुनियाद भी है और उसकी प्रगति के लिए ज़रूरी शर्त भी. उन्होंने दुनिया भर में शान्ति स्थापित करने के प्रयास तेज़ करने पर ज़ोर दिया.
अभी भी समय है
2030 की समयसीमा में अब चार वर्ष शेष हैं. वक्ताओं ने प्रतिबद्धताओं को ठोस नतीजों में बदलने और सबसे पीछे छूटे लोगों तक पहुँचने पर ज़ोर दिया.
संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (ECOSOC) के अध्यक्ष अमर बेंडजामा ने कहा कि महत्वाकाँक्षा के साथ ठोस अमल हो, तो प्रगति सम्भव है.
युवा नेताओं ने कहा कि नज़दीक आती समयसीमा, लक्ष्यों से पीछे हटने नहीं बल्कि कार्रवाई तेज़ करने की वजह है.
सुज़ुका नाकामुरा ने कहा, “कार्रवाई के लिए अभी भी समय है, लेकिन हमें साथ मिलकर आगे बढ़ना होगा. हमने SDGs को लेकर उम्मीद नहीं छोड़ी है, और आपको भी नहीं छोड़नी चाहिए.”