September 13, 2026

SBI का दावा- लोन और EMI फिर महंगे होंगे: RBI रेपो रेट 0.50% तक बढ़ा सकता है, क्रूड ऑयल 100 डॉलर पार होने से महंगाई बढ़ेगी

नई दिल्ली3 घंटे पहले

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आने वाले दिनों में होम लोन और कार लोन महंगा हो सकता है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी रिसर्च में दावा किया है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया रेपो रेट बढ़ा सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, RBI अक्टूबर की क्रेडिट पॉलिसी में रेपो रेट 0.25% बढ़ा सकता है, इसके बाद दिसंबर में भी इतनी ही बढ़ोतरी कर सकता है। यानी 0.50% तक रेपो रेट बढ़ सकते हैं।

आम आदमी की जेब पर क्या असर पड़ेगा?

RBI के रेपो रेट में किसी भी बदलाव का सीधा असर कर्जदारों और बैंक में FD कराने वालों पर पड़ता है:

  • फ्लोटिंग रेट पर लोन वालों पर असर: रेपो रेट बढ़ने से कर्ज की किस्त बढ़ जाती है।
  • नया लोन ज्यादा ब्याज पर मिलेगा: नए ग्राहकों के लिए होम लोन, ऑटो लोन या पर्सनल लोन बढ़ी हुई ब्याज दरों पर मिलेगा।फिक्स्ड-रेट लोन लेने वालों पर इसका असर नहीं पड़ेगा।
  • FD कराने वालों को फायदा: रेपो रेट बढ़ने का फायदा सेविंग करने वालों को मिलता है। बैंक में FD कराने वालों को भी ज्यादा ब्याज मिलता है।

SBI का दावा: महंगाई के कारण रेपो रेट बढ़ाना जरूरी

  1. कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं: मिडिल ईस्ट में चल रही जंग के कारण 15 दिन में इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल 100 डॉलर प्रति बैरल पार कर चुका है और इसके $105-$123 तक पहुंचने की आशंका है।
  2. महंगाई का दायरा बढ़ा: देश में महंगाई का दायरा लगातार बढ़ रहा है। CPI यानी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स में 90% हिस्सेदारी रखने वाली जरूरी सामानों की संख्या जनवरी 2026 में 22 थी, जो जुलाई तक बढ़कर 53 हो गई है। पेट्रोल-डीजल, गैस, दवाइयां और इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने की लागत बढ़ी है, जिसका सीधा असर जनता की जेब पर पड़ रहा है।
  3. RBI को सलाह: रिपोर्ट में महंगाई पर लगाम लगाने के लिए RBI को रेपो रेट बढ़ाने की सलाह दी गई है। यह फैसला अमेरिकी नीतियों से नहीं, बल्कि देश के अंदरूनी आर्थिक हालात को देखकर लिया जाएगा।

2026 में रेपो रेट 5.25% पर स्थिर

अगस्त में हुई मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक में RBI ने रेपो रेट को लगातार चौथी बार 5.25% पर स्थिर रखा था। हालांकि, अब अक्टूबर 5 से 7 के बीच होने वाली अगली MPC बैठक में दरें बढ़ाना लगभग तय माना जा रहा है।

रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ाता और घटाता क्यों है?

रेपो रेट महंगाई से लड़ने का टूल है। जब महंगाई ज्यादा होती है, तो सेंट्रल बैंक इसे बढ़ाकर इकोनॉमी में मनी फ्लो कम करने की कोशिश करता है। पॉलिसी रेट ज्यादा होगी तो बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा होगा।

बदले में बैंक ग्राहकों के लिए लोन महंगा कर देते हैं। इससे इकोनॉमी में मनी फ्लो कम होता है। मनी फ्लो कम होने पर डिमांड घटती है और महंगाई कम हो जाती है।

जब इकोनॉमी बुरे दौर से गुजरती है, तो रिकवरी के लिए मनी फ्लो बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट कम कर देता है। इससे बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज सस्ता हो जाता है और ग्राहकों को भी सस्ती दर पर लोन मिलता है।

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