September 8, 2026

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे का मामला, सभी प्राइवेट हॉस्टल-PG सेफ्टी ऑडिट की मांग - Haribhoomi

Satya Niketan PG Incident: सुप्रीम कोर्ट पहुंचा सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे का मामला, सभी प्राइवेट हॉस्टल-PG सेफ्टी ऑडिट की मांग

Satya Niketan PG Incident: दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी बिल्डिंग गिरने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है, इस दौरान मामले को लेकर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की गई है। इस रिपोर्ट के तहत सभी प्राइवेट हॉस्टल-PG सेफ्टी ऑडिट की मांग उठाई है।

Satya Niketan PG Incident

दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी बिल्डिंग गिरने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

  • Published: 08 Sep 2026, 04:19 PM IST
  • Last Updated: 08 Sep 2026, 04:23 PM IST

Satya Niketan PG Incident: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पीजी बिल्डिंग गिरने का मामला स्टेटस रिपोर्ट के साथ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस मामले को लेकर एमिकस क्यूरी अजीत सिन्हा ने कोर्ट में एक रिपोर्ट दाखिल कर दिल्ली के सभी PG और निजी हॉस्टलों की जांच कराने की मांग उठाई है।

उन्होंने कहा है कि इस इलाके में बार-बार हादसे होना गंभीर चिंता का विषय है, इसके साथ ही दिल्ली हाई कोर्ट ने भी इस हादसे को लेकर MCD और दिल्ली यूनिवर्सिटी को कड़ी फटकार लगाई है।

पूरा मामला दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास स्थित सत्य निकेतन इलाके से जुड़ा है, जहां रविवार को 5 मंजिला एक पीजी बिल्डिंग गिर गई थी। इस हादसे में 7 स्टूडेंट्स की मौत हो गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एमिकस क्यूरी अजीत सिन्हा को नियुक्त किया था, जिन्होंने अब अपनी स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर दी है।

स्टेटस रिपोर्ट में क्या मांग की गई ?

रिपोर्ट में सबसे अहम सिफारिश यह है कि दिल्ली के सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के आसपास बने पीजी, निजी हॉस्टल और स्टूडेंट्स के रहने की जगहों का पूरा सुरक्षा ऑडिट कराया जाए। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सत्य निकेतन इलाके में ऐसी घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं, जैसे अप्रैल 2022 में भी एक इमारत गिरी थी।बार-बार होने वाले इन हादसों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यहां नियमों को सही तरीके से लागू क्यों नहीं किया जा रहा।

प्रस्तावित जांच में बिल्डिंग का प्लान, निर्माण की गुणवत्ता, बेसमेंट का इस्तेमाल कैसे हो रहा है, ढांचा कितना मजबूत है, आग से बचाव के इंतजाम और आपातकालीन स्थिति में निकलने के रास्ते जैसी चीजों की बारीकी से जांच होगी। इस बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने भी इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है।

चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने 7 लोगों की मौत पर भी दुख जताया है, वहीं MCD तथा DU को भी कड़ी फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने  केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, पुलिस और MCD से 10 दिन के भीतर जवाब मांगा है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 25 सितंबर 2026 को होगी।