September 15, 2026

Santan Saptami 2026: इस बार कब है संतान सप्तमी, 16 या 17 सितंबर, क्या है व्रत की सही डेट, देखें पूजा विधि

Santan Saptami 2026 Date: संतान की लंबी उम्र के लिए ​किया जाने वाला संतान सप्तमी व्र​त इस बार कब मनाया जाएगा। अगर आपके मन में भी ये सवाल है तो चलिए जानते हैं ज्योतिषाचार्य पंडित रामगोविंद शास्त्री से कि 16 या 17 सितंबर (September Vrat) कब मनाई जाएगी संतान सप्तमी (Santan Saptami kab hai) । 

16 या 17 कब है संतान सप्तमी

हिन्दू पंचांग के अनुसार इस बार सप्तमी तिथि 17 सितंबर को सुबह सूर्योदय () के बाद आएगी। चूंकि ये पूजन मध्यान व्यापनी होता है ऐसे में ये व्रत 17 सितंबर को मनाया बताया जा रहा है। 

17 सितंबर को इतने बजे से लगेगी सप्तमी ​तिथि 

ज्योतिषाचार्य पंडित रामागोविंद शास्त्री के अनुसार इस बार सप्तमी तिथि 17 सितंबर को सुबह 10:18 मिनट से शुरू होगी। जो इस दिन पूरे दिन पूरी रात रहेगी। चंूकि ये व्रत दोपहर बाद करने का विधान है ऐसे में इस साल संतान सप्तमी का व्रत 17 सितंबर गुरुवार को ही किया जाएगा। 

संतान सप्तमी की पूजन सामग्री (Santan Saptami puja samgri)

शिव जी (Lord Shiv) की परिवार प्रतिमा अवश्य होना चाहिए। इसके अलावा लकड़ी की चौकी, कलश, अक्षत, रोली, मौली, केले का पत्ता, श्वेत वस्त्र, फल, फूल ,आम का पल्लव, भोग लगाने के लिए सात-सात पूआ या मीठी पूड़ी, कपूर, लौंग, सुपारी, सुहाग का सामान, चांदी का कड़ा या रेशम का धागा आवश्यक रूप से इसमें शामिल होना चाहिए।

ये रही पूजन विधि ( Santan Saptami puja vidhi)

ब्रहृम मुहूर्त में उठकर स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें। इसके बाद शिव जी (Lord Shiv) व विष्णु जी (Lord Vishnu) की पूजा करें। तत्पश्चात संतान सप्तमी व्रत तथा पूजन का संकल्प लें। निराहार रहते हुए शुद्धता से पूजन का सामान तैयार करें। इस पूजन में गुड़ से बने सात पुआ, खीर। फिर गंगाजल से छिड़ककर पूजन स्थल को शुद्ध करें। इसके बाद लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं। जिस पर शिव परिवार की प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें।

इसके सामने कलश की स्थापना करें। कलश में जल, सुपारी, अक्षत,1 रुपए का सिक्का, डालकर उस पर आम का पल्लव लगाएं। जिसके ऊपर एक प्लेट में चावल रखकर एकदीपक उसके ऊपर जला दें। फिर भगवान को चढ़ाने वाले आटे और गुड़ के 7-7 पुए जिसे महाप्रसाद कहते हैं, इन्हें केले के पत्ते में बांधकर वहां पर रख दें।

इसके बाद फल-फूल, धूप दीप से विधिवत पूजन करते हुए पूजा की शुरूआत करें। यदि चांदी (Silver Bangle) की नया कड़ा बनवाया है तो ठीक है, यदि पुराना उपयोग कर रहे हैं तो पहले चांदी के कड़े को शिव परिवार के सामने रखकर दूध व जल से शुद्ध करके टीका लगाकर भगवान का आशीर्वाद ले लें। इसके बाद चांदी के कड़े को अपने दाहिने हाथ में पहने। इसके बाद संतान सप्तमी व्रत कथा सुने।

दोपहर 12:00 बजे के बाद करें पूजा

पूजन के साथ व्रत कथा सुनने के बाद पूजा के लिए बनाए गए सात-सात पुओं को भगवान (Lord)  को चढ़ाएं। उसमें से सात पूयें ब्राह्मण (Gud ke Puye) को दें। इसके बाद 7 पूयें स्वयं प्रसाद के रूप में ग्रहण करें। इस भोग के साथ ही अपना व्रत तोड़ें।

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