उत्तर प्रदेश के संभल जिले में प्रशासन ने सरकारी जमीनों को अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए बड़ी कार्रवाई की है। चंदौसी तहसील के जनटा और नरौली गांव में राजस्व रिकॉर्ड में तालाब, झील और पौधारोपण के नाम दर्ज करीब 137 बीघा जमीन पर बने अवैध कब्जे को बुलडोजर चलाकर हटा दिया गया।
जिला प्रशासन को शिकायत मिली थी कि राजस्व रिकॉर्ड में तालाब, झील और वृक्षारोपण दर्ज भूमि पर कुछ लोगों ने अवैध रूप से फसल उगाकर कब्जा कर रखा है।
- Published: 09 Aug 2026, 10:29 AM IST
- Last Updated: 09 Aug 2026, 10:30 AM IST
उत्तर प्रदेश के संभल जिले में सरकारी संपत्तियों और प्राकृतिक जल निकायों की जमीन पर अवैध कब्जे के खिलाफ स्थानीय प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। चंदौसी तहसील के बनियाठेर क्षेत्र अंतर्गत आने वाले जनटा और नरौली गांवों में लंबे समय से सरकारी जमीन पर किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए बड़ा अभियान चलाया गया।
जिला प्रशासन को शिकायत मिली थी कि राजस्व रिकॉर्ड में तालाब, झील और वृक्षारोपण दर्ज भूमि पर कुछ लोगों ने अवैध रूप से फसल उगाकर कब्जा कर रखा है। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल के निर्देश पर राजस्व टीम ने मौके पर जाकर जांच की, जिसमें 137 बीघा जमीन पर अवैध कब्जे की पुष्टि हुई।
समय सीमा समाप्त होने के बाद प्रशासन ने संभाला मोर्चा, JCB से हटाई गई फसलप्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, अवैध कब्जाधारकों को जमीन खाली करने और अतिक्रमण हटाने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था। निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बाद भी जब अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो उपजिलाधिकारी आशुतोष तिवारी के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची।
इस कार्रवाई के दौरान तहसीलदार, नायब तहसीलदार और राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। टीम ने मौके पर जेसीबी चलवाकर बोई गई फसलों को पूरी तरह नष्ट कर दिया और जमीन को पूरी तरह कब्जामुक्त कराया।
कुल 9 गाटों में दर्ज है 137 बीघा जमीन, भविष्य में भी जारी रहेगी कार्रवाई
एसडीएम आशुतोष तिवारी ने पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि जनटा और नरौली गांव में कुल नौ गाटों की लगभग 137 बीघा जमीन सरकारी दस्तावेजों में वृक्षारोपण, झील और तालाब के नाम पर पंजीकृत है। इस जमीन के एक बड़े हिस्से में फसल उगाकर खेती की जा रही थी, जबकि कुछ भाग खाली पड़ा था। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी जमीनों, तालाबों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े भूखंडों पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और संभल जिले में अतिक्रमण विरोधी यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
सरकारी जल निकायों और पर्यावरण संरक्षण पर प्रशासन का ध्यान
संभल जिले में जल निकायों तथा पौधरोपण की जमीनों पर से अवैध कब्जे हटाना पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भू-माफियाओं और स्थानीय अतिक्रमणकारियों द्वारा प्राकृतिक जल स्रोतों पर कब्जा किए जाने से जल स्तर और स्थानीय पारिस्थितिकी पर विपरीत असर पड़ रहा था। प्रशासन की इस बुलडोजर कार्रवाई से क्षेत्र के अन्य अवैध कब्जाधारकों में भी हड़कंप मच गया है।