छत्तीसगढ़ कैबिनेट ने S-SNA मॉडल को मंजूरी दी। योजनाओं की राशि का केंद्रीकृत प्रबंधन होगा और जरूरत के समय सीधे हितग्राही-वेंडर को भुगतान किया जाएगा।
S-SNA मॉडल को CM विष्णु देव साय ने दी मंजूरी
- Published: 16 Sep 2026, 03:45 PM IST
- Last Updated: 16 Sep 2026, 03:45 PM IST
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य की योजनाओं में वित्तीय प्रबंधन को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य वित्तपोषित चिन्हित योजनाओं के लिए State Single Nodal Agency (S-SNA) मॉडल लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। नई व्यवस्था के जरिए सरकारी धन को जरूरत के अनुसार जारी करने और उसके इस्तेमाल की ऑनलाइन निगरानी पर जोर दिया जाएगा।
कई बैंक खातों की जगह होगा केंद्रीकृत Mother Account
S-SNA व्यवस्था में किसी योजना की पूरी राशि अलग-अलग क्रियान्वयन एजेंसियों के बैंक खातों में पहले से जमा रखने की व्यवस्था को बदला जाएगा। इसके स्थान पर प्रत्येक चिन्हित योजना के लिए एक S-SNA Mother Account बनाया जाएगा। योजना के तहत राशि तभी आगे जारी की जाएगी, जब वास्तविक भुगतान की जरूरत होगी। भुगतान के समय रकम सीधे संबंधित हितग्राही या वेंडर के बैंक खाते में पहुंचाई जाएगी। इससे सरकारी धन के अनावश्यक रूप से विभिन्न खातों में पड़े रहने की स्थिति को कम करने का प्रयास होगा।
Just-in-Time Fund Release पर रहेगा फोकस
नई व्यवस्था की प्रमुख विशेषता Just-in-Time Fund Release होगी। यानी विभागों या एजेंसियों को जरूरत से काफी पहले पैसा उपलब्ध कराने के बजाय वास्तविक आवश्यकता के समय ही फंड जारी किया जाएगा। सरकार के अनुसार इससे बैंक खातों में पड़ी अप्रयुक्त सरकारी राशि कम होगी और योजनाओं में उपलब्ध निधि का फ्लोट लगभग शून्य रखने का प्रयास किया जाएगा।
रियल-टाइम में दिखेगा कितना पैसा आया और कितना खर्च हुआ
S-SNA मॉडल के तहत किसी योजना में उपलब्ध राशि, जारी व्यय सीमा, वास्तविक खर्च और बची हुई रकम की निगरानी डिजिटल माध्यम से की जा सकेगी। व्यवस्था में Maker-Checker आधारित ऑडिट ट्रेल भी होगा, जिससे प्रत्येक वित्तीय लेन-देन का रिकॉर्ड और उसकी निगरानी मजबूत होगी। सरकार का कहना है कि इससे अनधिकृत भुगतान, वित्तीय गड़बड़ी और बैंकिंग धोखाधड़ी की संभावनाओं को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। जिला, ब्लॉक, पंचायत और ग्राम स्तर की चिन्हित क्रियान्वयन एजेंसियों को भी इस व्यवस्था से जोड़ा जा सकेगा।
DBT और Non-DBT दोनों भुगतान होंगे शामिल
S-SNA मॉडल में Mother-Child Account व्यवस्था के साथ प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) और Non-DBT दोनों तरह के भुगतान किए जा सकेंगे। योजना के अनुसार राशि के प्रवाह से लेकर अंतिम भुगतान तक की प्रक्रिया को डिजिटल सिस्टम के जरिए ट्रैक किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार का उद्देश्य योजनाओं के लिए उपलब्ध प्रत्येक रुपये का अधिकतम और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है। उनके मुताबिक नई व्यवस्था से पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने के साथ योजनाओं के क्रियान्वयन की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी।
वित्त मंत्री बोले- बेहतर होगा कैश मैनेजमेंट
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि S-SNA मॉडल राज्य के वित्तीय प्रबंधन को आधुनिक और तकनीक-सक्षम बनाने में मदद करेगा। उनके अनुसार जिस राशि की तत्काल आवश्यकता नहीं है, उसे पहले से बैंक खातों में रखने के बजाय जरूरत पड़ने पर उपयोग किया जाएगा। इससे नकदी प्रबंधन बेहतर होगा और सरकारी धन के निष्क्रिय पड़े रहने की स्थिति कम होगी।
530 करोड़ की निष्क्रिय राशि का भी मुद्दा
सरकार के अनुसार मौजूदा व्यवस्था में कई बार जरूरत से पहले राशि जारी होने के कारण विभागीय बैंक खातों में बड़ी रकम लंबे समय तक उपयोग में नहीं आ पाती। राज्य सरकार ने बताया कि विभागीय निष्क्रिय खातों में करीब 530 करोड़ रुपये और RBI के DEAF खातों में करीब 100 करोड़ रुपये की निष्क्रिय राशि जैसी स्थितियां सामने आती हैं।
S-SNA मॉडल के जरिए निष्क्रिय राशि को किया जाएगा प्रयास
S-SNA मॉडल के जरिए उपलब्ध धन का बेहतर प्रबंधन कर ऐसी निष्क्रिय राशि को कम करने का प्रयास किया जाएगा। सरकार के मुताबिक इससे अनावश्यक ऋण की जरूरत और उस पर लगने वाले ब्याज भार को कम करने में भी सहायता मिल सकती है। योजना की राशि से अर्जित ब्याज को राज्य की संचित निधि में जमा किया जाएगा।
चरणबद्ध तरीके से लागू होगी व्यवस्था
S-SNA मॉडल को एक साथ लागू करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इसके लिए पहले योजना की पहचान होगी, फिर वित्त विभाग से अनुमोदन, Scheme Code आवंटन और e-Kosh Mapping की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद S-SNA और ZBSA खाते खोले जाएंगे और Treasury के माध्यम से S-SNA व्यवस्था से हितग्राही या वेंडर को भुगतान किया जाएगा।
चिन्हित योजनाओं पर किया जाएगा लागू
यह मॉडल राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित चिन्हित योजनाओं और विभागों की अन्य चिन्हित योजनाओं पर लागू किया जाएगा। हालांकि PFMS-SNA/SPARSH के अंतर्गत आने वाली केंद्र प्रायोजित योजनाएं, Central Sector योजनाएं और ऐसी योजनाएं जिनमें DDO सीधे e-Kosh के जरिए भुगतान करते हैं, इस व्यवस्था के दायरे से बाहर रहेंगी।
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