सुपौल में RTI से जुड़ा मामला सामने आया है। RTI कार्यकर्ता निकेश कुमार झा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि बिहार राज्य सूचना आयोग ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना के DSP वासुदेव राय पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। वासुदेव राय सुपौल सदर के तत्
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RTI एक्ट की धारा 20(1) के तहत लगा जुर्माना
निकेश झा के अनुसार, राज्य सूचना आयुक्त प्रकाश कुमार की अदालत में 24 जुलाई को मामले की अंतिम सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद आयोग ने RTI एक्ट 2005 की धारा 20(1) के तहत 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
साथ ही धारा 20(2) के तहत वासुदेव राय के खिलाफ अनुशासनिक और विभागीय कार्रवाई की सिफारिश बिहार के DGP से की गई है।

RTI कार्यकर्ता निकेश कुमार झा ।
गलत सूचना देने और गुमराह करने का आरोप
RTI कार्यकर्ता का आरोप है कि उनके द्वारा मांगी गई सूचना के मामले में तत्कालीन सर्किल इंस्पेक्टर वासुदेव राय ने जानबूझकर गलत जानकारी दी। निकेश का यह भी आरोप है कि उन्हें गुमराह करने की कोशिश की गई और मामले की सुनवाई के दौरान आयोग के समक्ष अधूरी पंजी पेश की गई।
सुनवाई के दौरान धमकाने का भी आरोप
निकेश झा ने आरोप लगाया कि सुनवाई के दौरान वासुदेव राय और वर्तमान सर्किल इंस्पेक्टर संजय कुमार यादव ने उन्हें धमकाने की कोशिश की। मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सूचना आयुक्त ने बिहार के पुलिस महानिदेशक को अपीलार्थी की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
जुर्माने की वसूली को अधिकारियों को भेजी सूचना
आयोग ने जुर्माने की राशि की वसूली के लिए DG निगरानी, बिहार के DGP, कोषागार पदाधिकारी, सिंचाई भवन पटना और महालेखाकार पटना को भी सूचना भेजी है।
2021 में मांगी थी चार बिंदुओं पर सूचना
निकेश के मुताबिक, सुरक्षा से जुड़े एक मामले में आयोग के निर्देश पर तत्कालीन SP सुपौल ने सर्किल इंस्पेक्टर को कार्रवाई का निर्देश दिया था। इसी मामले को लेकर उन्होंने 17 दिसंबर 2021 को लोक सूचना पदाधिकारी सह अंचल निरीक्षक से चार बिंदुओं पर सूचना मांगी थी।
उन्होंने SP सुपौल के ज्ञापन संख्या 36/लोक सूचना, दिनांक 19 जून 2021 से जारी पत्र के अंचल पुलिस निरीक्षक कार्यालय में प्राप्त होने की तिथि, संबंधित सनहा में प्रविष्टि और उसके आधार पर की गई कार्रवाई सहित अन्य जानकारी मांगी थी।
सूचना में गड़बड़ी के बाद आयोग में पहुंचा मामला
RTI कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि मांगी गई सूचना में कथित गड़बड़ी के बाद उन्होंने बिहार राज्य सूचना आयोग में परिवाद दायर किया। मामले की सुनवाई के बाद आयोग ने 25 हजार रुपये के जुर्माने के साथ विभागीय और अनुशासनिक कार्रवाई की सिफारिश की है।