राजस्थान में तीन नगर निगम उदयपुर, अजमेर और अलवर में भाजपा-कांग्रेस ने प्रत्याशी मैदान में उतार दिए हैं। उदयपुर में भाजपा को बहुमत मिला था और अलवर में सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। वहीं कांग्रेस अजमेर में सबसे बड़ी पार्टी थी। ऐसे में दोनों ही पार्टियों में प
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भाजपा-कांग्रेस की ओर से मेयर के लिए मैदान में उतारे गए प्रत्याशियों का राजनीतिक बैक ग्राउंड, किस नेता के करीबी है, कैसे उनके नाम पर मुहर लगी। पढ़ें पूरी रिपोर्ट…
उदयपुर: संघ की पसंद, पार्षदों से वन-टू-वन का सिंघवी को मिला लाभ
उदयपुर में मेयर पद के लिए दिनेश भट्ट और प्रमोद सामर का नाम चल रहा था। वहीं पारस सिंघवी तीसरे नंबर पर थे, लेकिन सामर और भट्ट के नाम पर पार्षदों की सहमति नहीं मिलने से पार्टी ने ऐनवक्त पर सिंघवी को चुना। वहीं RSS की पहली पसंद, निगम में पिछली बार डिप्टी मेयर का उनका अनुभव, बाड़ाबंदी में 50 पार्षदों से वन-टू-वन का सिंघवी को लाभ मिला। सिंघवी ने 52 पार्षदों में से सिर्फ प्रमोद सामर और दिनेश भट्ट से समर्थन नहीं मांगा था।
वहीं कांग्रेस से पूनम कुंवर ने मेयर पद के लिए नामांकन किया। पूनम उदयपुर में शहर जिलाध्यक्ष फतेहसिंह राठौड़ की पत्नी हैं। हालांकि कांग्रेस के पास उदयपुर में मेयर पद के लिए पर्याप्त संख्याबल नहीं है। पूरी खबर पढ़ें

अलवर: भाजपा में तीन दावेदार.. भूपेंद्र यादव से सुमनलता पर सहमति, कांग्रेस में जूली की पसंद
अलवर में बीजेपी प्रत्याशी सुमनलता अग्रवाल के नाम पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के कारण आखिरी समय में मुहर लगने की चर्चा है। मेयर पद के तीन दावेदार नेहा मनचंदा, अपूर्वा शर्मा और सुमनलता अग्रवाल को दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर पर बुधवार सुबह 6 बजे ले जाया गया।
संगठन के नेताओं के साथ चर्चा के बाद यहां प्रत्याशी का नाम तय हुआ। इसके बाद पार्षद नेहा मनचंदा और अपूर्वा शर्मा को उत्तराकाशी में वापस बाड़ेबंदी में भेज दिया गया। वहीं अलवर में केवल सुमनलता अग्रवाल को लेकर आया गया। केंद्रीय मंत्री के घर पर दोपहर बाद सुमन के पति अजय अग्रवाल के परिवार के साथ वन राज्य मंत्री संजय शर्मा पहुंचे। अजय अग्रवाल बीजेपी से नगर परिषद के चेयरमैन रह चुके हैं।
कांग्रेस की मेयर प्रत्याशी कमलेश शर्मा के चयन के पीछे नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का गणित माना जा रहा है। जूली जीतने वाले पार्षदों को अपने पक्ष में लाने के लिए रात-रातभर घूमे। पूरी खबर पढ़ें

अजमेर: कांग्रेस में दो पर सहमति नहीं हुई तो किरण गढ़वाल का नाम फाइनल
अजमेर नगर निगम में भाजपा ने बुधवार सुबह 6 बजे अनामिका शर्मा को प्रत्याशी बनाने का निर्णय ले लिया था। भाजपा प्रत्याशी अनामिका शर्मा पहली बार पार्षद बनी हैं। परिवार में आज तक किसी ने चुनाव नहीं लड़ा। राजनीति में नया चेहरा है। हालांकि ससुर सीताराम शर्मा विधानसभा स्पीकर वासुदेव देवनानी के करीबी हैं। भाजपा ने मंगलवार रात को जीते हुए 32 पार्षदों से रायशुमारी की थी और तीन-तीन नाम मांगे थे। इसमें नलिनी शर्मा, मोनिका जैन सहित अन्य के नाम थे। बाद में प्रदेश स्तर से अनामिका शर्मा के नाम पर मुहर लगी।
कांग्रेस ने भी जीते हुए सभी 37 पार्षदों से रायशुमारी की। हालांकि किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन पाई। रश्मि हिंगोरानी और रश्मि शर्मा के नाम पर भी एक मत नहीं हुए। इसके बाद कांग्रेस ने सभी नाम प्रदेश स्तर पर भेजे और आखिरकार किरण गढ़वाल के नाम पर मुहर लगी। किरण गढ़वाल भी राजनीति में नई है। किरण के पति दिलीप गढ़वाल ब्लॉक उपाध्यक्ष हैं। पूरी खबर पढ़ें



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