August 2, 2026

पोकरण में वायुसेना का ROTOR CLAP III अभ्यास पूरा, ड्रोन रोधी क्षमता का हुआ परीक्षण

देश

  • Edited by: अमित कुमार मंडल
  • Updated Aug 2, 2026, 02:44 PM IST

राजस्थान में रक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, यह अभ्यास मानवरहित हवाई प्रणालियों के प्रतिरोध विषय पर केंद्रित था, जिसमें भारतीय वायुसेना की कई हेलीकॉप्टर इकाइयों ने हिस्सा लिया।

Image

पोकरण में सेनाभ्यास (File photo)

Photo :

PTI

ROTOR CLAP III: भारतीय वायुसेना ने राजस्थान के पोकरण 'फील्ड फायरिंग रेंज' में एक सप्ताह तक चले सैन्य अभ्यास 'रोटर क्लैप-III' का सफलतापूर्वक समापन किया और इस दौरान वायुसेना की अभियानगत तैयारियों और ड्रोन रोधी क्षमताओं का व्यापक परीक्षण और प्रदर्शन किया गया। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। राजस्थान में रक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, यह अभ्यास मानवरहित हवाई प्रणालियों के प्रतिरोध विषय पर केंद्रित था, जिसमें भारतीय वायुसेना की कई हेलीकॉप्टर इकाइयों ने हिस्सा लिया। सूत्रों ने बताया कि अभ्यास का मुख्य उद्देश्य उभरते हवाई खतरों के विरुद्ध अभियानगत तैयारियों का परीक्षण करना तथा बदलते युद्धक्षेत्र की चुनौतियों के अनुरूप वायुसेना की युद्धक तैयारियों को और सुदृढ़ बनाना था।

क्या है सेनाभ्यास का उद्देश्य ?

उन्होंने कहा कि अभ्यास का प्रमुख केंद्र मानवरहित हवाई प्रणालियों (USS) से बढ़ते खतरे का प्रभावी मुकाबला करने के लिए वायुसेना के हेलीकॉप्टर बेड़े की अभियानगत क्षमता को सशक्त बनाना था। इसके साथ ही वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में एकीकृत हेलीकॉप्टर अभियानों के लिए रणनीतियों, कार्यप्रणालियों और मानक प्रक्रियाओं का भी परीक्षण किया गया।

अभ्यास में वायुसेना के लगभग सभी प्रमुख हेलीकॉप्टर मंचों (प्लेटफॉर्म) ने भाग लिया और विभिन्न सामरिक अभियानों के माध्यम से अपनी युद्धक क्षमता का प्रदर्शन किया। सूत्रों के अनुसार इनमें सटीक लक्ष्यभेदन, युद्धक्षेत्र सहायता, सैनिकों की तैनाती, घायलों की सुरक्षित निकासी तथा हवाई और जमीनी दोनों प्रकार के खतरों से निपटने के लिए समन्वित अभियान शामिल थे।

एक सप्ताह तक चले इस अभ्यास ने वायुसेना के चालक दल और परिचालन इकाइयों को युद्ध जैसी परिस्थितियों में मिशन की योजना, विभिन्न इकाइयों के बीच समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया और संयुक्त अभियान संचालन की क्षमता का परीक्षण एवं सत्यापन करने का अवसर प्रदान किया। रक्षा सूत्रों ने बताया कि चुनौतीपूर्ण रेगिस्तानी भूभाग में विभिन्न हेलीकॉप्टर मंचों के बीच निर्बाध समन्वय सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।

उन्होंने कहा कि देश के प्रमुख सैन्य प्रशिक्षण क्षेत्रों में शामिल पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज ने आधुनिक युद्धक्षेत्र की चुनौतियों, विशेषकर ड्रोन और अन्य मानवरहित प्रणालियों से उत्पन्न खतरों के बीच हेलीकॉप्टर अभियानों की प्रभावशीलता का आकलन करने तथा वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित परिचालन अभ्यास संचालित करने के लिए उपयुक्त वातावरण उपलब्ध कराया।

Amit Mandal

अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

और पढ़ें

  • Hindi News
  • India

End of Article