July 31, 2026

Rohit Yadav Biography In Hindi : कौन हैं रोहित यादव? पिता के बनाए बांस के भाले से शुरू किया सफर, अब CWG 2026 में भारत की सबसे बड़ी गोल्ड मेडल उम्मीद, जानिए उभरते जैवलिन स्टार की पूरी जीवनी | Rohit Yadav Biography In Hindi : Rohit Yadav Biography In Hindi Indian javelin thrower Athlete jaunpur uttarp

Rohit Yadav Biography In Hindi : कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की सबसे बड़ी स्वर्ण पदक उम्मीदों में जैवलिन थ्रोअर रोहित यादव का नाम भी शुमार है। यूपी के जौनपुर के इस लाल से देशवासी मेडल की आस लगाए बैठे हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में उनका फाइनल तक पहुंचना न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है।

रोहित यादव का शुरुआती जीवन

जैवलिन थ्रोअर रोहित यादव का जन्म 6 जून 2001 को उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के डाभिया गांव में हुआ था। उनका परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर था। उनके पिता एक साधारण किसान थे और पूरा परिवार मिट्टी से बनी एक कच्ची झोपड़ीनुमा घर में रहता था। रोहित यादव के पिता का नाम सभाजीत यादव है, जो पहले एक धावक और डेकाथलॉन प्लेयर रह चुके हैं। हालांकि, आर्थिक तंगी के कारण वह खेल में आगे नहीं बढ़ पाए लेकिन वह अपने बच्चों को देश के लिए खेलते देखना चाहते थे।

रोहित यादव कुल तीन भाई हैं। दिलचस्प बात यह है कि रोहित के दोनों भाई भी भाला फेंक के ही एथलीट हैं। रोहित के बड़े भाई राहुल यादव ने राष्ट्रीय खेल संस्थान (NIS) से प्रशिक्षण लिया है और वे गांव के दूसरे बच्चों को भी इस खेल की ट्रेनिंग देते हैं। वहीं, रोहन यादव तीनों भाइयों में सबसे छोटे हैं। वह भी एक बेहतरीन खिलाड़ी बन चुके हैं और दुबई में आयोजित एशियाई U-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत के लिए रजत पदक जीते थे।

कैसे हुई भाला फेंक के सफर की शुरुआत

दरअसल, रोहित के पिता ने अपने तीनों बेटों को बचपन से ही खेल की तरफ मोड़ा। रोहित ने अपने पिता की देखरेख में ही दौड़ना और फिटनेस पर काम करना शुरू कर दिया। इस सफर की नींव रोहित के पिता सभाजीत यादव ने रखी थी। पिता ने ठान लिया था कि वह अपने बेटों को देश का नाम रोशन करने वाले एथलीट बनाएंगे लिहाजा बेटों को सुबह 4 बजे उठाकर रनिंग कराने के साथ-साथ एक्सरसाइज कराते थे।

रोहित यादव जब करीब 11-12 साल के हुए तो उनके पिता ने उन्हें भाला फेंक की तरफ मोड़ा लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह थी कि खेल में इस्तेमाल होने वाला भाला काफी महंगा आता था, जो गरीब किसान परिवार के बस में नहीं था लेकिन रोहित के पिता ने हार नहीं मानी और पास के जंगल से जंगली बांस काटकर लाए। उन्होंने बांस को सुखाया और उसे छीलकर सीधा किया। आगे के हिस्से को नुकीला बनाया और पीछे पकड़ने के लिए रस्सी की ग्रिप बनाई।

दो साल तक खेतों में किया कठिन अभ्यास

बड़ी बात ये है कि रोहित यादव और उनके भाइयों ने स्टेडियम या सिंथेटिक ट्रैक पर नहीं बल्कि गांव के कच्चे खेतों और पगडंडियों पर अभ्यास शुरू किया। रोहित ने लगातार दो सालों तक भारी और असंतुलित बांस के भालों को फेंककर अपनी तकनीक सुधारी। इस देसी और भारी भाले को फेंकने से उनके कंधों और बाजुओं की ताकत सामान्य से कई गुना ज्यादा मजबूत हो गई।

रोहित की जिंदगी में आया सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट

साल 2014 में रोहित के जीवन में सबसे बड़ा मोड़ आया, जब वह मात्र 13-14 वर्ष के थे। उनके पिता ने उन्हें एक जिला स्तरीय खेल प्रतियोगिता में हिस्सा दिलाया, जहां रोहित यादव ने जिंदगी में पहली बार उस प्रतियोगिता के मैदान पर स्टील का असली मैटेलिक भाला हाथ में पकड़ा लेकिन जो लड़का दो साल से भारी और टेढ़े-मेढ़े बांस के डंडों से प्रैक्टिस कर रहा था, उसके लिए वह असली हवादार भाला बेहद हल्का और सटीक साबित हुआ। रोहित ने पहली ही बार में 49 मीटर दूर भाला फेंककर सबको चौंका दिया और गोल्ड मेडल जीत लिया।

उधार के पैसों से प्रोफेशनल सफर की शुरुआत

गोल्ड जीतने के बाद उनकी फैमिली को ये अहसास हो गया कि रोहित में असाधारण प्रतिभा है। इसके बाद पिता ने रिश्तेदारों से पैसे उधार लेकर और कर्ज लेकर रोहित के लिए पहला प्रोफेशनल भाला खरीदा और उन्हें आगे की ट्रेनिंग के लिए बाहर भेजा। इसके बाद रोहित का सेलेक्शन स्पोर्ट्स हॉस्टल लखनऊ के लिए हुआ। यहां उन्हें पहली बार एथलेटिक्स प्रशिक्षकों से प्रोफेशनल कोचिंग मिली। उन्होंने भाला पकड़ने की ग्रिप, दौड़ने की गति और बायोमैकेनिक्स पर काम किया।

रोहित यादव का संक्षिप्त परिचय

नाम : रोहित यादव

जन्म : 6 जून 2001

जन्मस्थान : डाभिया गांव, जौनपुर, उत्तर प्रदेश

उम्र : 25 वर्ष (2026)

पेशा : भारतीय जैवलिन थ्रो एथलीट

स्पर्धा : पुरुष जैवलिन थ्रो

पिता : सभाजीत यादव

भाई : राहुल यादव, रोहन यादव

प्रमुख उपलब्धि : 87.05 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो, नेशनल इंटर-स्टेट चैंपियनशिप 2026 में स्वर्ण पदक और कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के फाइनल में जगह।

अन्य उपलब्धियां : विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2022 के फाइनलिस्ट, कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में छठा स्थान, U-16 राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी, वर्ल्ड स्कूल गेम्स में स्वर्ण पदक, एशियाई खेल 2026 के लिए क्वालिफाई।

पहचान : बांस के भाले से अभ्यास शुरू करने वाले जौनपुर के किसान परिवार के बेटे, जिन्होंने आर्थिक तंगी और गंभीर चोट से उबरकर भारत के शीर्ष जैवलिन थ्रोअर और कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक के प्रबल दावेदार के रूप में पहचान बनाई।

जूनियर स्तर पर मचाया धमाल

साल 2016 में राष्ट्रीय युवा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रोहित यादव ने 72.11 मीटर का थ्रो फेंककर U-16 आयु वर्ग में नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बना दिया। इस रिकॉर्ड के बाद एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की नजरें इस युवा खिलाड़ी पर टिक गईं।

अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी छाए रोहित यादव

साल 2017 में रोहित का चयन तुर्की में आयोजित 'वर्ल्ड स्कूल गेम्स' के लिए हुआ, जहां अपने पहले ही बड़े अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट में उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर यह साबित कर दिया कि वे लंबी रेस के घोड़े हैं। जूनियर स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें पटियाला के राष्ट्रीय खेल संस्थान (NIS) में सीनियर भारतीय कैंप में शामिल किया गया, जहां उन्हें नीरज चोपड़ा के साथ ट्रेनिंग करने का मौका मिला। इस दौरान रोहित ने सीनियर राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार 80 मीटर से अधिक की दूरी नापनी शुरू कर दी, जो किसी भी वर्ल्ड क्लास जेवलिन थ्रोअर की पहचान होती है।

साल 2022 रहा कमाल का साल

साल 2022 रोहित यादव के लिए कमाल का रहा। रोहित यादव ने इतिहास रचते हुए इस प्रतियोगिता के फाइनल में प्रवेश किया। वह फाइनल में 78.72 मीटर के साथ 10वें स्थान पर रहे। यह पहला मौका था, जब भारत के दो खिलाड़ी नीरज चोपड़ा और रोहित यादव एक साथ विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में खेल रहे थे।

इसके बाद बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में उन्होंने 82.22 मीटर का बेहतरीन थ्रो फेंककर छठा स्थान हासिल किया। इसी साल उन्होंने 82.54 मीटर का थ्रो कर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया।

चोटिल, पेरिस ओलंपिक सहित कई टूर्नामेंट्स से बाहर

साल 2023 में जब रोहित यादव अपने करियर के चरम पर थे, तभी उन्हें कोहनी के लिगामेंट में गंभीर चोट लग गई। उन्हें सर्जरी करानी पड़ी, जिसके कारण वे 2024 के पेरिस ओलंपिक सहित कई बड़े आयोजनों से बाहर हो गए। इस कठिन समय में 'इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स' (IIS) ने उनकी रिकवरी में मदद की।

साल 2026 में की जबरदस्त वापसी

रिकवरी के बाद रोहित यादव ने जबरदस्त वापसी की और जून 2026 में भुवनेश्वर में आयोजित नेशनल इंटर-स्टेट चैंपियनशिप में 87.05 मीटर का अविश्वसनीय थ्रो फेंककर गोल्ड मेडल जीत लिया। इसके साथ ही वह नीरज चोपड़ा और किशोर जेना के बाद 87 मीटर का आंकड़ा पार करने वाले तीसरे भारतीय थ्रोअर बन गए। इस धमाकेदार प्रदर्शन की बदौलत उन्होंने आगामी 2026 एशियाई खेलों (नागोया, जापान) के लिए सीधे क्वालीफाई कर लिया है और वर्तमान में ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों के फाइनल स्पर्धा में अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।

रोहित यादव का निजी जीवन

रोहित यादव वर्तमान में अविवाहित हैं और उनका पूरा फोकस सिर्फ खेल पर है। रोहित अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने पिता सभाजीत यादव और अपनी मां को देते हैं। वह अक्सर कहते हैं कि उनके माता-पिता ने उनके लिए भूखे पेट रहकर भी पैसे जुटाए हैं। रोहित अपने दोनों भाइयों के बेहद करीब हैं।

रोहित को जब भी ट्रेनिंग से फुर्सत मिलती है और वे जौनपुर स्थित अपने गांव डाभिया जाते हैं तो उन्हें अपने खेतों में समय गुजारना काफी पसंद है। खेल और ट्रेनिंग के सिलसिले में वे साल का ज्यादातर वक्त कर्नाटक के विजयनगर स्थित स्पोर्ट्स एकेडमी या पटियाला के नेशनल कैंप में बिताते हैं।