डर का नया दौर और रोमांच का सबसे बड़ा अखाड़ा! 'खतरों के खिलाड़ी' का यह सीजन टीवी स्क्रीन पर सिर्फ स्टंट्स नहीं, बल्कि खौफ का ऐसा सैलाब लेकर आया है, जिसे देखते समय कलेजा मुंह को आ जाता है. शो में हर पल सांसें अटकना तो तय है. मेकर्स ने इस बार टॉर्चर की सारी हदें तोड़कर डर का लेवल सुपर हाई कर दिया है.
चाहे हाथों पर गिरती खौलती हुई मोम की बेदर्द तपन हो, जमते पानी की गहराई में जिंदगी की जंग हो या फिर आसमान को चूमती इमारतों की नुकीली ऊचाइयों पर लटकता खौफ हो... इसी बेखौफ जुनून, बेदर्दी और अनफिल्टर्ड ड्रामे के कॉम्बिनेशन ने 'खतरों के खिलाड़ी' के इस सीजन को आज सबसे धमाकेदार और थ्रिलिंग शो बना दिया है.
खतरों की क्वीन बनीं फरहाना भट्ट
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इस खौफनाक सफर में कश्मीर की फरहाना भट्ट 'खतरों की असली शेरनी' बनकर उभरी हैं. आग का तांडव हो, ठंडे पानी का टॉर्चर या फिर चेहरे पर रेंगते कीड़े-मकोड़े...सामने चाहे खौफनाक टास्क ही क्यों न हो, फरहाना का फियरलेस और 'फायर' गेमप्ले देखकर हर कोई दंग रह जाता है. स्टंट शुरू होते ही उनके चेहरे पर न कोई झिझक दिखती है और न ही डर की एक शिकन, उनका फोकस सिर्फ अपने टारगेट पर होता है. अपनी बेजोड़ मेंटल स्ट्रेंथ, बिजली जैसी फुर्ती और कभी हार न मानने वाले जिद्दी एटीट्यूड के दम पर फरहाना हर टास्क को किसी मास्टरक्लास की तरह खत्म करती हैं. खौफ के इस अखाड़े में उनका यही निडर अवतार और चट्टान जैसा हौसला उन्हें इस सीजन की सबसे तगड़ी और दमदार खिलाड़ी बनाता है.
वहीं, अविनाश शो के सबसे स्ट्रॉन्ग मेल कंटेस्टेंट बनकर उभरे हैं. हर टास्क में उनका जुनून और जीत का जज्बा साफ झलकता है. गेम प्ले में अविनाश और फरहाना के बीच बिल्कुल कांटे और बराबरी की टक्कर देखने को मिल रही है. अगर फरहाना खतरों की शेरनी हैं तो अविनाश शेर हैं.
लेकिन सिर्फ स्टंट्स ही नहीं, शो में रोमांस का तड़का भी जबरदस्त लग रहा है. फरहाना और करण वाही की केमिस्ट्री इंटरनेट पर छाई हुई है. तीखी नोक-झोंक और लड़ाई से शुरू हुआ इनका रिश्ता अब 'बेस्ट फ्रेंड्स' तक पहुंच चुका है. दोनों का यह बॉन्ड फैंस को खूब पसंद आ रहा है.
करण वाही जहां अपने कूल एटीट्यूड और स्मार्ट स्ट्रेटेजी से टास्क में पकड़ बनाए हुए हैं, वहीं ऋत्विक धनजानीअपनी हाजिरजवाबी, चार्म और एनर्जेटिक प्रेजेंस से पूरे माहौल को बांधे रखते हैं.
ओरी ने किया सरप्राइज
शो के सबसे बड़े सरप्राइज पैकेज साबित हुए हैं ओरी. शुरुआत में जिन्हें हर किसी ने सिर्फ शो का 'एंटरटेनमेंट एलिमेंट' और ग्लैमरस चेहरा समझा था, उन्होंने अपनी जाबांजी और बेखौफ अंदाज से हर हेटर का मुंह बंद कर दिया है. हर टास्क में अपने करेज की नई मिसाल कायम करते हुए ओरी ने खुद को एक बेहद मजबूत और दमदार खिलाड़ी साबित किया है. सबसे खास बात यह है कि स्टंट कितना भी खौफनाक क्यों न हो, ओरी उसमें भी अपना सिग्नेचर स्वैग और फन फैक्टर जोड़कर उसे फुल एंटरटेनिंग बना देते हैं. यानी खौफ के बीच भी हंसी का तड़का लगाना कोई उनसे सीखे.
कमाल की है रुबीना की सहनशक्ति
पुराने बैच से रुबीना दिलैक अपनी कमाल की सहनशक्ति और 'नेवर गिव अप' एटीट्यूड से सभी को हैरान कर रही हैं. दो बच्चों की मां रुबीना की यह जाबांजी ही उन्हें हर स्टंट जिताने में मदद करती है.
दूसरी तरफ, रुहानिका भी अपने जज्बे से तगड़ी फाइट दे रही हैं. रुहानिका का फोकस और शांत दिमाग उन्हें हर मुश्किल टास्क से निकालने में मदद करता है. एंटरटेनमेंट के मोर्चे पर हर्ष गुजराल की कॉमिक टाइमिंग और तीखे पंचेस शो में जान फूंकने का काम कर रहे हैं. भले ही वो स्टंट्स में पिछड़ जाएं, लेकिन उनके जोक्स हर खौफनाक माहौल को हल्का कर देते हैं.
शगुन शर्मा ने किया निराश
लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू भी होता है...शगुन शर्मा शो की 'अबॉर्ट क्वीन' और सबसे इरिटेटिंग कंटेस्टेंट साबित हुई हैं. जितने टास्क उन्होंने परफॉर्म नहीं किए, उससे ज्यादा अबॉर्ट कर दिए. उनका यह ढीला रवैया देखकर रोहित शेट्टी का कई बार उन पर भड़कना बिल्कुल जायज लगा. सवाल यह उठना तय है कि अगर स्टंट करने में इतना डर लगता है, तो इस शो में आईं ही क्यों? हालांकि, अब वो बाहर हो चुकी हैं.
रोहित शेट्टी ने जीता दिल
इन सबके बीच, शो के असली 'कैप्टन ऑफ द शिप' रोहित शेट्टी हमेशा की तरह फैंस का दिल जीत रहे हैं. कंटेस्टेंट्स के डर को समझना, उन्हें परिवार की तरह सपोर्ट और गाइड करना, और मौका मिलते ही उनके साथ मस्ती-मजाक करना...रोहित शेट्टी का यही अंदाज 'खतरों के खिलाड़ी' को एक परफेक्ट और पैसा-वसूल एंटरटेनर बनाता है.
खौफ, कॉमेडी, रोमांस और अनफिल्टर्ड ड्रामे का यह परफेक्ट बैलेंस ही इस सीजन को टीआरपी की दौड़ में सबसे आगे खड़ा करता है. जहां एक तरफ फरहाना और अविनाश जैसे जाबांजों की टक्कर देखने को मिल रही है, वहीं दूसरी तरफ रोहित शेट्टी की गाइडेंस और ओरी-हर्ष का एंटरटेनमेंट दर्शकों के हर वीकेंड को खास बना रहा है.
हालांकि, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि इस बार मेकर्स ने टॉर्चर का मीटर कुछ ज्यादा ही बढ़ा दिया है. एक सीमा के बाद गरम मोम और खौफनाक स्टंट्स का यह अनह्यूमन लेवल कभी-कभी देखने वालों के रोंगटे खड़े कर देता है. टॉर्चर की भी एक हद होती है और मेकर्स को खतरे के इस स्केल को थोड़ा बैलेंस करने की जरूरत है. इसके बावजूद जबरदस्त ड्रामे का यह ओवरडोज दर्शकों को बांधे रखने में पूरी तरह कामयाब हो रहा है.
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