Published: Wednesday, August 5, 2026, 15:52 [IST]
RBI Policy: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 5 अगस्त 2026 को अपनी मौद्रिक नीति (Monetary Policy) का ऐलान करते हुए रेपो रेट को लगातार चौथी बार 5.25% पर स्थिर रखने का फैसला किया। इस फैसले के साथ RBI ने अपना 'Neutral Stance' भी बरकरार रखा, जिसका मतलब है कि भविष्य में परिस्थितियों के अनुसार ब्याज दरों में बढ़ोतरी या कटौती-दोनों विकल्प खुले हैं। हालांकि इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया, लेकिन RBI ने महंगाई, वैश्विक अनिश्चितताओं और आर्थिक विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं।

RBI के इस फैसले का सबसे बड़ा असर आम लोगों पर पड़ा है। रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने से होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन और एजुकेशन लोन की EMI में फिलहाल कोई परिवर्तन नहीं होगा। यानी जिन लोगों के लोन फ्लोटिंग रेट पर हैं, उन्हें फिलहाल राहत मिली है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में RBI ने संतुलित रुख अपनाया है ताकि महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बना रहे।
RBI ने गिनाईं तीन बड़ी चिंताएं
मौद्रिक नीति के दौरान RBI गवर्नर ने तीन प्रमुख जोखिमों की ओर इशारा किया:
- पहला, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, जिसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है।
- दूसरा, एल-नीनो और मानसून को लेकर बनी अनिश्चितता। जुलाई में स्थिति सामान्य रही, लेकिन अगस्त और सितंबर का मौसम कृषि उत्पादन और खाद्य महंगाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
- तीसरा, अमेरिका की व्यापार और टैरिफ नीतियों से जुड़ी वैश्विक अनिश्चितता, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश प्रवाह को प्रभावित कर सकती है।
महंगाई और GDP को लेकर क्या कहा RBI ने?
RBI ने वित्त वर्ष के लिए महंगाई का अनुमान 5% रखा है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि फिलहाल खाद्य और ईंधन की कीमतें महंगाई की सबसे बड़ी वजह बनी हुई हैं, जबकि कोर इंफ्लेशन अपेक्षाकृत नियंत्रित है। साथ ही GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 6.7% कर दिया गया है। RBI का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां सामान्य रहती हैं तो वित्त वर्ष की चौथी तिमाही तक महंगाई में राहत देखने को मिल सकती है।
विदेशी मुद्रा भंडार और व्यापार पर नजर
नीति समीक्षा के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) को लेकर भी सकारात्मक संकेत दिए गए। भारत के पास लगभग 680 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है, जो लगभग 11 महीने के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। हालांकि व्यापार घाटा (Trade Deficit) और शुद्ध विदेशी निवेश (Net FDI) को लेकर चिंता बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सोने का भारी आयात भारत के आयात बिल पर लगातार दबाव बना रहा है।
Share Market और Rupee पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में शेयर बाजार पूरी तरह रिजल्ट आधारित (Result Driven) बना हुआ है। कंपनियों के तिमाही नतीजे आने तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। रुपये की बात करें तो डॉलर के मुकाबले 95 के आसपास का स्तर फिलहाल नया सामान्य माना जा रहा है। RBI के हस्तक्षेप, FCNR जमा और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से रुपये को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन इसमें बड़ी मजबूती की उम्मीद फिलहाल कम दिखाई दे रही है।
Gold, FII और आगे का रास्ता
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि में सोने की कीमतों में तेजी की संभावना बनी हुई है। डॉलर इंडेक्स, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें आने वाले समय में सोने की दिशा तय करेंगी। वहीं विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की वापसी भी धीरे-धीरे शुरू होती दिखाई दे रही है। हालांकि फिलहाल उनकी खरीदारी चुनिंदा बड़े शेयरों तक सीमित है।
RBI की अगस्त 2026 मौद्रिक नीति भले ही ब्याज दरों में कोई बदलाव लेकर नहीं आई, लेकिन इसने आने वाले महीनों के लिए स्पष्ट संकेत जरूर दिए हैं। महंगाई, मानसून, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक घटनाक्रम अगले कुछ महीनों में भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार की दिशा तय करेंगे। ऐसे में निवेशकों और आम लोगों दोनों के लिए आने वाला समय 'वेट एंड वॉच' का रहने वाला है।
Story first published: Wednesday, August 5, 2026, 15:52 [IST]
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