August 5, 2026

RBI का बड़ा फैसला: रेपो रेट 5.25% पर बरकरार; वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया - Haribhoomi

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने FY27 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 6.7% कर दिया है।

RBI MPC policy rates unchanged 5.25 percent

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है।

  • Published: 05 Aug 2026, 10:58 AM IST
  • Last Updated: 05 Aug 2026, 10:58 AM IST

RBI Repo rate unchanged: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने बुधवार को पश्चिम एशिया (West Asia) के नए संकट और बढ़ती महंगाई के दबाव के बीच बड़ा फैसला लिया है। आरबीआई ने बेंचमार्क ब्याज दरों में कोई फेरबदल न करते हुए रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर पूरी तरह स्थिर रखा है।

इसके साथ ही, केंद्रीय बैंक ने अपने नीतिगत रुख (Policy Stance) को 'न्यूट्रल' ही बनाए रखा है। एमपीसी के इस फैसले के बाद अन्य प्रमुख दरों में भी कोई बदलाव नहीं हुआ है:

  • स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट: 5 प्रतिशत पर कायम
  • मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट: 5.50 प्रतिशत पर स्थिर
  • बैंक रेट: 5.50 प्रतिशत पर स्थिर

FY27 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ा
अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर राहत भरी खबर देते हुए आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 (FY27) के लिए देश की जीडीपी ग्रोथ के अनुमान में 10 बेसिस पॉइंट (आधार अंक) की बढ़ोतरी की है। अब इसे बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया गया है।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने उम्मीद जताई है कि देश में मजबूत घरेलू मांग (Domestic Demand) से ग्रोथ को लगातार सपोर्ट मिलता रहेगा। गवर्नर मल्होत्रा के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत घरेलू मांग, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज सेक्टर में लगातार हो रहे विस्तार और शानदार निर्यात (Exports) का मजबूत सहारा मिल रहा है।

महंगाई और कोर इन्फ्लेशन पर गवर्नर का बयान
महंगाई के मुद्दों पर बात करते हुए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि कीमती धातुओं को छोड़कर कोर इन्फ्लेशन (मूल मुद्रास्फीति) पिछले कुछ समय से सामान्य (Benign) बनी हुई है और वित्त वर्ष के अंत तक इसके मुख्य महंगाई के अनुरूप आ जाने की उम्मीद है।

उन्होंने बताया कि हालांकि हेडलाइन इन्फ्लेशन (मुख्य महंगाई) में बढ़ोतरी होने का अनुमान है, लेकिन इस बढ़त की मुख्य वजह खाद्य पदार्थों और ईंधन (Food and Fuel) से जुड़े सप्लाई-साइड के दबाव हैं। पहली तिमाही (Q1) में वास्तविक महंगाई (Realised Inflation) अनुमानों से थोड़ी कम रही, जो लागत के दबावों के सीमित पास-थ्रू को दर्शाती है।

महंगाई का आगे का अनुमान और वैश्विक चुनौतियां
आरबीआई गवर्नर ने साफ किया कि हालिया समय में महंगाई में जो तेजी आई है, उसकी मुख्य वजह भोजन और ईंधन ही रहे हैं। अब तक व्यापक स्तर पर कीमतों के दबाव (Broader Price Pressures) के ज्यादा सबूत नहीं मिले हैं।

निकट भविष्य में हेडलाइन इन्फ्लेशन के और बढ़ने की आशंका है और इसके वित्त वर्ष 2027 की तीसरी तिमाही (Q3) में अपने चरम (Peak) पर पहुंचने की उम्मीद है। इसके बाद इसमें नरमी आने की संभावना है। कीमती धातुओं को अलग कर दिया जाए, तो अंतर्निहित महंगाई (Underlying Inflation) अभी भी नियंत्रण में है और पहले के अनुमानों के बिल्कुल अनुरूप है।

इसके साथ ही, गवर्नर मल्होत्रा ने वैश्विक अनिश्चितताओं का जिक्र करते हुए कहा, "साउथ की ग्लोबल ट्रेड पॉलिसी को लेकर अनिश्चितताओं के कारण आगे का आउटपुट थोड़ा धुंधला (Hazy) बना हुआ है। किसी भी तरह की नीतिगत कार्रवाई करने से पहले महंगाई, उसके रास्ते और उसकी संरचना को लेकर अधिक स्पष्टता सामने आने की जरूरत है।"