September 23, 2026

बैंकिंग सिस्टम में जरूरत से ज्यादा पैसा, RBI ने अपनाया ये तरीका, जानिए आम लोगों पर क्या असर होगा

RBI Liquidity Management: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक दिन के VRRR से ₹71,971 करोड़ अवशोषित किए; नीलामी ₹75,000 करोड़ की थी। 21 सितंबर तक बैंकिंग सिस्टम में 4.92 लाख करोड़ का सरप्लस कैश था। जानें, तरलता प्रबंधन का मकसद और होम-कार लोन की ब्याज दरों पर इसका संभावित असर।

RBI Absorbs Liquidity: देश के बैंकिंग सिस्टम में इस समय जरूरत से ज्यादा नकदी मौजूद है। 21 सितंबर तक बैंकों के पास करीब 4.92 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त कैश था। इसी अतिरिक्त तरलता को नियंत्रित करने और अल्पकालिक ब्याज दरों को संतुलित रखने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक दिन के लिए बैंकों से ₹71,971 करोड़ अपने पास ले लिए।

RBI ने यह कदम Variable Rate Reverse Repo (VRRR) के जरिए उठाया। इसका मकसद बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त पैसे को अस्थायी रूप से सोखना है, ताकि बाजार में नकदी की उपलब्धता जरूरत से ज्यादा न बढ़े।

RBI ने बैंकों से कैसे सोखा पैसा?

RBI ने अतिरिक्त नकदी को सोखने के लिए ₹75,000 करोड़ की VRRR नीलामी आयोजित की थी। हालांकि, बैंकों ने इसमें कुल ₹71,971 करोड़ ही पार्क किए। इस प्रक्रिया में बैंक अपनी अतिरिक्त रकम कुछ समय के लिए RBI के पास रखते हैं और इसके बदले उन्हें तय दर पर रिटर्न मिलता है। दरअसल, जब बैंकिंग सिस्टम में बहुत ज्यादा नकदी होती है, तो बैंकों के बीच छोटी अवधि के कर्ज की ब्याज दरें नीचे जाने का दबाव बन सकता है। RBI ऐसे ऑपरेशन के जरिए नकदी की मात्रा को संतुलित करने की कोशिश करता है।

बैंकिंग सिस्टम में इतना अतिरिक्त कैश क्यों है?

सिस्टम में अतिरिक्त तरलता कई वजहों से बढ़ सकती है। इनमें विदेशी मुद्रा से जुड़े लेनदेन, बैंकों में विदेशी मुद्रा जमा में बदलाव और केंद्रीय बैंक की विभिन्न वित्तीय गतिविधियां शामिल हैं। जब इन माध्यमों से बैंकिंग सिस्टम में पैसा बढ़ता है, तो बैंकों के पास उनकी तत्काल जरूरत से ज्यादा नकदी जमा हो जाती है। ऐसे में RBI को समय-समय पर बाजार से अतिरिक्त पैसा वापस खींचना पड़ता है।

क्या इसका आपके होम लोन पर असर पड़ेगा?

RBI का यह कदम आपके बैंक खाते में जमा रकम को सीधे प्रभावित नहीं करता। यानी जमाकर्ताओं के पैसे पर इसका तत्काल कोई सीधा असर नहीं पड़ता। हालांकि, बैंकिंग सिस्टम में नकदी की मात्रा का असर बाजार की अल्पकालिक ब्याज दरों पर पड़ सकता है। आगे चलकर इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव होम लोन, कार लोन और अन्य कर्जों की ब्याज दरों पर देखने को मिल सकता है। लेकिन सिर्फ एक दिन के VRRR ऑपरेशन से कर्ज की दरों में तुरंत बदलाव होना जरूरी नहीं है।

RBI क्यों करता है तरलता का प्रबंधन?

RBI के लिए बैंकिंग सिस्टम में नकदी का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। अगर बाजार में बहुत कम पैसा हो, तो कर्ज महंगा हो सकता है। वहीं, जरूरत से ज्यादा नकदी होने पर अल्पकालिक ब्याज दरों पर नीचे आने का दबाव बन सकता है। इसी संतुलन के लिए RBI स्थिति के हिसाब से अलग-अलग उपाय करता है। अतिरिक्त नकदी होने पर वह VRRR जैसे साधनों के जरिए पैसा सोख सकता है, जबकि जरूरत पड़ने पर बाजार में तरलता बढ़ाने के कदम भी उठाए जाते हैं।

4.92 लाख करोड़ के सरप्लस पर RBI की नजर

21 सितंबर तक बैंकिंग सिस्टम में करीब 4.92 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त तरलता मौजूद थी। ऐसे में ₹71,971 करोड़ का VRRR ऑपरेशन इसी व्यापक तरलता प्रबंधन का हिस्सा है। RBI का लक्ष्य बाजार से पैसा पूरी तरह निकालना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि बैंकिंग सिस्टम में नकदी की मात्रा आर्थिक गतिविधियों और अल्पकालिक ब्याज दरों के लिए संतुलित बनी रहे।