September 15, 2026

खाते में आया फ्रॉड का पैसा तो तुरंत नहीं निकाल पाएंगे, RBI ला रहा सख्त नियम

मुंबई (उत्तम हिन्दू न्यूज): देश में तेजी से पैर पसार रहे साइबर फ्रॉड और मनी म्यूल खातों के जाल पर नकेल कसने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बेहद कड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने बैंकों में संदिग्ध या फर्जी लेन-देन को तुरंत रोकने के उद्देश्य से नए नियमों का मसौदा (ड्राफ्ट) जारी किया है। इसके तहत अगर किसी बैंक खाते में संदिग्ध गतिविधि या साइबर ठगी से जुड़ी रकम आती है, तो बैंक उस पैसे की निकासी पर तुरंत अस्थायी रोक यानी ‘डेबिट होल्ड’ (Debit Hold) लगा सकेगा। इससे ठगी की रकम को तुरंत निकाले जाने या दूसरे खातों में डायवर्ट किए जाने पर प्रभावी रोक लगेगी।

₹1,000 या उससे अधिक के संदिग्ध लेन-देन पर पैनी नजर
आरबीआई के प्रस्तावित दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि बैंक के ऑटोमेटेड या एआई-बेस्ड मॉनिटरिंग सिस्टम को ₹1,000 या उससे ज्यादा का कोई ट्रांजैक्शन असामान्य या संदिग्ध लगता है, तो बैंक उस राशि पर डेबिट होल्ड लगा देगा। बैंक इस कार्रवाई की तुरंत सूचना खाताधारक को डिजिटल या अन्य माध्यम से देगा। साथ ही ग्राहक से यह पूछा जाएगा कि यह रकम खाते में किस स्रोत या वजह से आई है। जब तक स्थिति स्पष्ट नहीं होती, ग्राहक उस रकम को न तो एटीएम या शाखा से निकाल सकेगा और न ही किसी अन्य खाते में ट्रांसफर कर पाएगा।

सफाई देने के लिए मिलेंगे 20 दिन, 10 दिन में बैंक को करना होगा फैसला
ड्राफ्ट नियमों में ग्राहकों के अधिकारों और हितों का भी पूरा ध्यान रखा गया है ताकि किसी वैध खाताधारक को परेशानी न हो। डेबिट होल्ड लगाए जाने के बाद ग्राहक को 20 दिनों का पर्याप्त समय दिया जाएगा ताकि वह अपने लेन-देन की सत्यता और फंड का वैध सोर्स साबित करने वाले दस्तावेज पेश कर सके। ग्राहक की ओर से जवाब मिलते ही बैंक को अगले 10 दिनों के भीतर अपनी जांच पूरी कर फैसला सुनाना होगा। यदि बैंक ग्राहक के स्पष्टीकरण से संतुष्ट हो जाता है, तो रकम से डेबिट होल्ड तुरंत हटा लिया जाएगा। वहीं, यदि ग्राहक 20 दिनों तक कोई जवाब नहीं देता, तो बैंक को होल्ड की तारीख से 30 दिनों के भीतर आगे की कार्रवाई तय करनी होगी।

ठगी की पुष्टि पर पुलिस के हवाले होगा मामला, अधिकतम 60 दिन की रोक
जांच के दौरान यदि बैंक को लेन-देन के पीछे गंभीर साइबर अपराध या मनी म्यूल रैकेट का अंदेशा होता है, तो वह मामले को तुरंत संबंधित पुलिस या साइबर क्राइम जांच एजेंसी के पास भेजेगा। जांच एजेंसी की ओर से निर्देश मिलने पर बैंक उसी के अनुसार कार्रवाई आगे बढ़ाएगा। यदि एजेंसी से 30 दिनों के भीतर कोई विशेष आदेश नहीं आता, तो 31वें दिन यह रोक हट जाएगी। आरबीआई के मसौदे के तहत किसी भी खाते पर अस्थायी डेबिट होल्ड की अधिकतम अवधि 60 दिन से ज्यादा नहीं हो सकेगी, बशर्ते किसी सक्षम प्राधिकारी ने अलग से निर्देश न दिया हो।

पूरे खाते को फ्रीज करना होगा अंतिम विकल्प, 2027 से लागू करने का प्रस्ताव
आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि बैंक सीधे पूरा खाता फ्रीज करने के बजाय केवल विवादित या संदिग्ध राशि पर ही रोक लगाएं। पूरे अकाउंट पर डेबिट होल्ड लगाना बिल्कुल अंतिम विकल्प होना चाहिए, जिसे केवल असाधारण और बेहद गंभीर परिस्थितियों में ही आजमाया जा सकता है। यह नया ढांचा आम जनता को साइबर जालसाजों के चंगुल से बचाने में ढाल का काम करेगा। केंद्रीय बैंक ने इन प्रस्तावित नियमों को 1 अप्रैल 2027 से पूर्ण रूप से लागू करने की योजना बनाई है, हालांकि बैंक चाहें तो इसे अपनी सुरक्षा प्रणाली के तहत पहले भी अपना सकते हैं।

You Might Be Interested In

  • 5 KM लंबी मेज पर एक साथ बैठे 20 हजार लोग, बना Guinness World Record
  • लॉरेंस गैंग के करीबी कर्मवीर देओ पर पंजाब पुलिस का शिकंजा, कनाडा से डिपोर्ट होकर दिल्ली पहुंचते ही गिरफ्तार
  • कूलर से आने लगी है सड़े पानी की बदबू? पानी की टंकी में डालें बस यह एक चीज, मिनटों में महक उठेगा कमरा
  • भारत में सख्ती के बाद META झुका, बाल यौन शोषण से जुड़े मामलों की जानकारी एजेंसियों को देगा
  • अब रिक्शा खींचेगा रोबोट, चार पैरों वाले ‘मैजिकडॉग’ ने इंसानों को कराई सवारी; दुनिया हैरान
  • ईंट-पत्थर नहीं, 80 हजार प्लास्टिक की बोतलों से बुजुर्ग दंपती ने खड़ा कर दिया आलीशान आशियाना