Sep 12, 2026 08:17 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

मुख्य बातें
- केंद्रीय रिजर्व बैंक ने टाटा संस की नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (NBFC) का लाइसेंस सरेंडर करने की अर्जी को खारिज कर दिया है
- अब कंपनी पर शेयर बाजार में लिस्ट होने का दबाव है

टाटा संस को बड़ा झटका लगा है
टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा संस को बड़ा झटका लगा है। दरअसल, केंद्रीय रिजर्व बैंक ने टाटा संस की नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (NBFC) का लाइसेंस सरेंडर करने की अर्जी को खारिज कर दिया है। इससे नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक का कारोबार करने वाले टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी को पब्लिक मार्केट में लिस्ट होना पड़ सकता है।
क्या कहा आरबीआई ने?
शनिवार को कंपनी सेक्रेटरी और चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर को मिले एक पत्र में RBI ने बताया कि ग्रुप जरूरी शर्तों को पूरा नहीं करता है, इसलिए मार्च 2024 में डी-रजिस्ट्रेशन के लिए दी गई अर्जी को खारिज कर दिया गया है। इस वजह से टाटा संस का पब्लिक मार्केट में लिस्ट होना तय माना जा रहा है। अब कंपनी को 'अपर-लेयर NBFC' माना गया है। आरबीआई के नियम के तहत इस कैटेगरी की कंपनी को लिस्ट कराना अनिवार्य है। इस घटनाक्रम पर टाटा संस की ओर से भी तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। वहीं, आरबीआई ने भी किसी तरह का जवाब नहीं दिया है।
बता दें कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने जून में बड़ी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) को वर्गीकृत करने के लिए एसेट की सीमा बढ़ाने या रिस्क-आधारित स्कोरिंग के जटिल तरीके को बनाए रखने की इंडस्ट्री की मांगों को खारिज कर दिया था। इस फैसले से टाटा संस पर संभावित लिस्टिंग का दबाव बढ़ गया।
आरबीआई ने दी है 15 कंपनियो की लिस्ट
दरअसल, RBI ने 15 कंपनियों की एक लिस्ट जारी की थी, जिन्हें अपर लेयर NBFC के तौर पर क्लासिफाइड किया गया और अक्टूबर 2025 तक लिस्ट होने का आदेश दिया गया। इस साल की शुरुआत में, RBI ने इस लिस्ट का दायरा बढ़ाते हुए इसमें सरकारी NBFCs को भी शामिल किया और यह भी घोषणा की कि 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक एसेट्स वाली कोई भी NBFC अपने आप 'अपर लेयर NBFC' मानी जाएगी।
मैनेजमेंट में चल रही हलचल
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब 170 अरब डॉलर की कंपनी टाटा संस को अभी भी लीडरशिप से जुड़ी चुनौतियों और बंटे हुए बोर्ड का सामना करना पड़ रहा है। इसी वजह से चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने अगले साल फरवरी में अपना कार्यकाल खत्म होने पर दोबारा नियुक्ति न लेने का फैसला किया। समूह के शेयरहोल्डर्स के बीच भी मतभेद हैं। नोएल टाटा के नेतृत्व वाला टाटा ट्रस्ट्स (जो कई नॉन-प्रॉफिट संस्थाओं का समूह है और टाटा संस में 65% से ज़्यादा हिस्सेदारी रखता है) कंपनी को लिस्ट कराने के पक्ष में नहीं है।
वहीं, शापूरजी पलोनजी ग्रुप (जिसके पास करीब 18% हिस्सेदारी है और जो सबसे बड़ा प्राइवेट शेयरहोल्डर है) ग्रुप को लिस्ट कराने के लिए सार्वजनिक रूप से दबाव बना रहा है। जानकारों का कहना है कि लिस्टिंग से ग्रुप को अपने सभी कामकाज, जैसे कैपिटल एलोकेशन (पूंजी का बंटवारा) के बारे में ज्यादा पारदर्शी होना पड़ेगा। इसके साथ ही इन्वेस्टर्स के दबाव के कारण फाइनेंशियल रिटर्न की मांग बढ़ेगी, जिससे लंबे समय के लिए दांव लगाना मुश्किल हो जाएगा।