August 22, 2026

RBI के एक फैसले से विदेश में चमके भारतीय बैंक, इस साल विदेश से जुटाए 12 अरब डॉलर

विदेशी निवेशकों का भरोसा भारतीय अर्थव्यवस्था पर लगातार गहरा होता जा रहा है. इसका ताजा उदाहरण भारतीय बैंकों द्वारा अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुटाई गई भारी भरकम पूंजी है. इस साल 2026 में अब तक देश के प्रमुख बैंकों ने विदेशी बाजारों से 12 अरब डॉलर की बड़ी रकम उठाई है. जब देश के बैंकों के पास विदेशी फंड की पर्याप्त लिक्विडिटी होती है, तो वे कारोबारियों और ग्राहकों को ज्यादा मजबूती से लोन और अन्य वित्तीय सेवाएं दे पाते हैं. बैंकों की इस शानदार सफलता के पीछे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का एक अहम फैसला और भारतीय बैंकिंग व्यवस्था की मजबूत साख बड़ी वजह बनी है.

विदेशी बाजार में भारतीय बैंकों की धूम

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय बैंकों के बॉन्ड की भारी मांग देखी जा रही है. अगर हम समग्र आंकड़ों पर गौर करें, तो साल 2026 में अब तक भारत से कुल 17 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज (Overall Debt from India) जुटाया जा चुका है. आपको बता दें कि इस 17 अरब डॉलर में से 12 अरब डॉलर अकेले भारतीय बैंकों ने जुटाए हैं, जबकि बाकी हिस्सा अन्य कॉर्पोरेट कंपनियों का है. अगर विदेशी कर्ज जुटाने की यही रफ्तार बनी रही, तो यह आंकड़ा साल 2021 के 22 अरब डॉलर के ऐतिहासिक रिकॉर्ड को भी आसानी से पार कर जाएगा. पिछले साल यानी 2025 में देश से जुटाई गई कुल रकम महज 5 अरब डॉलर तक ही सीमित थी. हालिया हफ्ता इस लिहाज से सबसे व्यस्त रहा. इस दौरान आईसीआईसीआई (ICICI) बैंक, कोटक महिंद्रा, आईडीएफसी (IDFC) फर्स्ट बैंक, एचडीएफसी (HDFC) बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा ने विदेशी बाजार से मिलकर 4.4 अरब डॉलर जमा कर लिए हैं.

रिजर्व बैंक का फैसला बना संजीवनी

विदेशी निवेश की इस बाढ़ के पीछे रिजर्व बैंक की वन-टाइम स्वैप सुविधा (one-time swap facility) ने एक बड़े उत्प्रेरक का काम किया है. विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंक यानी FCNR-B जमा के लिए 31 अगस्त की समयसीमा तय की गई है. इस तारीख तक बुक किए गए डिपॉजिट्स पर स्वैप सपोर्ट का सीधा लाभ मिलेगा. यही वजह है कि बैंक इस डेडलाइन के खत्म होने से पहले ज्यादा से ज्यादा विदेशी फंड सुरक्षित कर लेना चाहते हैं. 5 जून को जब आरबीआई ने इस विशेष योजना का ऐलान किया था, उसके बाद से ही बैंकों ने इस दिशा में पूरी ताकत झोंक दी. यह इसी से समझा जा सकता है कि बैंकों द्वारा जुटाए गए कुल 12 अरब डॉलर में से 10 अरब डॉलर की रकम तो सिर्फ 5 जून की घोषणा के बाद ही आई है.

एचडीएफसी बैंक ने बनाया सबसे बड़ा रिकॉर्ड

विदेशी बाजार से फंड जुटाने की इस दौड़ में देश का सबसे मूल्यवान बैंक एचडीएफसी सबसे आगे निकला है. गुरुवार को एचडीएफसी बैंक ने अकेले 1.75 अरब डॉलर जुटाए, जो किसी भी भारतीय बैंक द्वारा किया गया अब तक का सबसे बड़ा इश्यू (issue) है. इससे पहले जून में भी इसी बैंक ने 750 मिलियन डॉलर जुटाए थे. एचडीएफसी बैंक के ट्रेजरी हेड अरूप रक्षित का कहना है कि यह पूंजी बैंक के ग्राहकों को बेहतर वित्तीय लाभ देने के साथ-साथ विदेशों में मौजूद ग्राहकों की फंडिंग के भी काम आएगी. उनका मानना है कि इतनी बड़ी रकम जुटाना भारतीय बैंकिंग की ताकत और बैंक की क्रेडिट क्वालिटी पर निवेशकों के भरोसे का प्रमाण है. इसी तर्ज पर शुक्रवार को आईडीएफसी फर्स्ट ने 100 मिलियन और बैंक ऑफ बड़ौदा ने भी अपने पुराने इश्यू में 400 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी की.

निवेशकों का रेस्पॉन्स है शानदार

आमतौर पर जब बाजार में एक साथ बहुत ज्यादा सप्लाई आती है, तो कर्ज की लागत बढ़ जाती है. लेकिन भारतीय बैंकों के मामले में ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ. एचएसबीसी (HSBC) इंडिया के विनोद वेंकटेश बताते हैं कि इतनी कम अवधि में भारी सप्लाई के बावजूद स्प्रेड्स (मुनाफे का अंतर) साल की शुरुआत के मुकाबले सिर्फ 5 बेसिस पॉइंट (एक प्रतिशत का सौवां हिस्सा) ही बढ़े हैं. निवेशकों ने ओवरसप्लाई की चिंताओं को दरकिनार करते हुए बैंकों की मूल साख पर अपना ध्यान केंद्रित किया है. एमयूएफजी (MUFG) के गौरव भगत के मुताबिक, अमेरिकी ट्रेजरी में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों का रेस्पॉन्स इतना शानदार है कि सौदे औसतन 2.89 गुना ज्यादा सब्सक्राइब हुए हैं.

फंड जुटाने का ये सिलसिला अभी थमेगा नहीं

एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि विदेशी फंड जुटाने का ये सिलसिला अभी थमेगा नहीं. साल के अंत तक बाजार में 5 से 7.5 अरब डॉलर की अतिरिक्त पूंजी आने की उम्मीद है. हालांकि, 31 अगस्त को स्वैप विंडो बंद होने के बाद बैंकों की तरफ से सप्लाई में कुछ कमी आ सकती है, लेकिन जिन बैंकों ने कम अवधि के लिए फंड लिया था वे बाद में रिफाइनेंस के लिए लौट सकते हैं. इसके अलावा 1.5% की एक अन्य स्वैप विंडो दिसंबर तक खुली है. साथ ही, कॉर्पोरेट्स और एनबीएफसी (NBFC) कंपनियों की तरफ से भी विदेशी बाजार में बॉन्ड जारी करने का काम जारी रहेगा.

विभव शुक्ला

विभव शुक्ला

विभव शुक्ला वर्तमान में TV9 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर बिजनेस डेस्क पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता में उन्हें छह वर्षों का अनुभव है. विभव मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी. इसके बाद वह Inshorts और गुजरात फर्स्ट जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े रहे हैं.

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