पार्लियामेंट के मॉनसून सत्र के आखिरी चार दिन बहुत महत्वपूर्ण हैं। कांग्रेस और भाजपा ने अपने सांसदों के लिए सदन में मौजूद रहने का व्हिप जारी कर दिया। NDA के सहयोगी दलों से भी कहा गया है कि कोई भी सांसद सत्र के आखिरी चार दिन गैरहाजिर न रहे। कांग्रेस को लगता है कि सरकार आखिरी वक्त में परिसीमन (delimitation) बिल, महिला आरक्षण बिल और FCRA (Foreign Contributions Regulation Act) बिल पेश करा सकती है। राहुल गांधी अड़े हुए हैं कि ये तीनों बिल किसी कीमत पर पास नहीं होने देंगे।
पिछली बार लोकसभा में सरकार परिसीमन बिल पास कराने के लिए सरकार दो तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाई थी। तब मोदी ने कहा था कि ये कानून देश के हित में है, महिलाओं को संसद में एक तिहाई स्थान देने के लिए है एक दिन ये जरूर पास होगा। तभी से दो तिहाई बहुमत जुटाने की कवायद शुरू हुई। तृणमूल कांगेस टूटी, शिवसेना फिर टूटी, संख्या बढ़ी। किस्मत ने साथ दिया DMK कांग्रेस से नाराज़ हो गई। अब परिसीमन बिल के लिए DMK से बात हो रही है, शरद पवार की NCP और YSR की कांग्रेस से भी समर्थन मिलने की उम्मीद जगी है, अकाली दल के साथ आने के आसार बने हैं।
अगर इतनी जोड़-तोड़ और मेहनत की है तो ज़ाहिर है, परिसीमन बिल पास कराने के लिए ही की गई होगी। मुझे लगता है कि संसद में महिलाओं को एक तिहाई सीटें मिलनी ही चाहिए। इसका सर्वोत्तम तरीका है कि कुल सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 कर दी जाए और यह तभी संभव है जब परिसीमन के लिए कानून बने। इसीलिए ये दोनों कानून एक दूसरे से जुड़े हैं। इस समय विरोधी दलों में पहले जैसी एकता भी नहीं है। केजरीवाल राहुल गांधी से टकरा रहे हैं, DMK कहती है राहुल ने उन्हें धोखा दिया, शरद पवार डांवाडोल हैं। बाकी साथी भी कब बदल जाएं, कहा नहीं जा सकता, इसीलिए सरकार की कोशिश जारी है।
मोदी सही मौके का इंतजार कर रहे हैं। जैसे ही सही मौका आएगा, मोदी परिसीमन का चौका मारेंगे, संसद में सीटों की संख्या बढ़ेगी। इसका फैसला तो मोदी ने उसी समय कर लिया था, जब संसद का नया भवन बना था जिसमें लोकसभा के 1000 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था है। आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि नरेंद्र मोदी कितनी दूर की सोचते हैं।
हैंडलूम को हम दुनिया में लोकप्रिय बनाएं
हैंडलूम दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से स्वदेशी वस्तुएं जैसे खादी अपनाने, हैंडलूम प्रोडक्ट्स खरीदने और उन्हें लोकप्रिय बनाने की अपील की। मोदी ने कहा कि देश के लाखों गरीब परिवार बुनकर उद्योग से जुड़े हैं, अपने घरों में काम करते हैं, ऐसे में अगर खादी से बनी चीजें खरीदी जाएंगी तो लाखों परिवारों को रोजगार मिलेगा। हैंडलूम सिर्फ देश की विरासत नहीं है। इसकी डोर समाज को जोड़ती है। बनारसी साड़ी, पंजाब की फुलकारी, तमिलनाडु की कांजीवरम साड़ियां, जब घर में शादी होती है, कोई बड़ा त्योहार होता है तो उत्सव की ये निशानियां दिखाई देती हैं।
Vocal for local ने हैंडलूम को प्रमोट किया। मध्य प्रदेश की चंदेरी, असम की मूगा रेशम और राजस्थान की कोटा डोरिया को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दी है। बाज़ार दिया। फ्रांस और इटली के फैशन डिज़ाइनर्स ने भारतीय हैंडलूम से बने कपड़ों को luxury fashion का हिस्सा बनाया। ये सब products brand तो बन गए, इन्हें बाज़ार भी मिला लेकिन विश्व बाजार में ये products भारत को हिस्सेदारी नहीं दिला पाए। इसका मतलब ये नहीं कि हमारे हैंडलूम की गुणवत्ता कमजोर है। मार्केटिंग, डिज़ाइनिंग और पैकैजिंग की कमी की वजह से विश्व बाजार में जगह नहीं मिल पाई। इसे दुरुस्त करने की ज़रूरत है।
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