BRICS सम्मेलन सफल हुआ। पूरी दुनिया में इसका जलवा है। नरेंद्र मोदी, शी जिनपिंग और पुतिन की ‘हम साथ साथ हैं’ की तस्वीरों ने धूम मचा दी। दुनिया के बड़े अखबारों और मीडिया की हेडलाइन्स इस प्रकार है। अमेरिका के ABC न्यूज़ ने लिखा ‘Modi and Xi among biggest winners at this year's summit’, लंदन के The Financial Times ने लिखा, BRICS summit में ट्रंप के कारनामों से परेशान दुनिया के बड़े बड़े लीडर्स की अनोखी एकजुटता देखने को मिली। Chicago Tribune ने लिखा, ‘India's Modi China's Xi striving to reset ties on summit sidelines’, चीन के Global Times ने लिखा, ‘Four pioneers give greater BRICS more weight’। BBC ने लिखा ‘Iran war reshapes BRICS ties’।
आश्चर्य तो ये हुआ कि पिछले 10 साल से जो यशवंत सिन्हा मोदी के ज़बरदस्त आलोचक रहे, उन्होंने भी BRICS को सफल बता कर मोदी की रणनीति की जमकर तारीफ़ की। ऐसे बहुत से उदाहरण मैं आपको दे सकता हूं लेकिन हमारे नेता विपक्ष राहुल गांधी को इस बात से problem हुई कि BRICS के menu में सिर्फ vegetarian dishes क्यों थी? BRICS में कई गंभीर फ़ैसले हुए, युद्ध विराम कराने की कोशिश हुई, डॉलर के वर्चस्व पर लगाम लगाने की योजना बनी, AI के ख़तरे पर सबने मिलकर चिंता की, कई मुल्क़ों के आपसी गिले शिकवे दूर हुए। ये कोई मेला नहीं था, जहां लोग खाने पीने और मज़ा उड़ाने आए थे लेकिन राहुल गांधी को सिर्फ़ ये दिखाई दिया कि डिनर में non-veg serve नहीं हुआ।
सोशल मीडिया पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का काजू खाकर मुंह चलाते वीडियो लूप में चलाया गया। अगर मोदी के सबसे कड़वे आलोचकों को BRICS की आलोचना करने के लिए सिर्फ़ यही मिला तो इसका मतलब है कि सम्मेलन पूरी तरह सफल हुआ। इसमें जो फ़ैसले हुए, वो दुनिया में एक नए वर्ल्ड ऑर्डर का रास्ता तय करेंगे। फिर भी अगर किसी को मिर्ची लगे, तो कोई क्या करे? किसी को 'नाराज़ फूफा' बनने का इतना ही शौक़ है तो कोई क्या कहे?
एशिया कप : नक़वी की फिर से फज़ीहत क्यों हुई?
अब बात पाकिस्तान के नाराज फूफा की। भारत की चैंपियन्स बेटियों ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चीफ मोहसिन नकवी के हाथ से एशिया कप विनर्स ट्रॉफी लेने से इंकार कर दिया तो नकवी मुंह फुला कर बैठे हैं।
हमारी महिला क्रिकेट टीम ने आठवीं बार एशिया कप पर कब्जा किया। पूरे टूर्नामेंट में टीम इंडिया एक भी मैच नहीं हारी। श्रीलंका की टीम को मोहसिन नकवी ने रनरअप की ट्रॉफी और चेक दिया लेकिन टीम इंडिया ने पाकिस्तान के मंत्री के हाथों से विनर्स ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया।
भारतीय टीम स्टेज पर ही नहीं गई। काफी देर तक इंतजार करने के बाद मोहसिन नकवी मुंह लटका कर मैदान से बाहर चले गए। BCCI के सचिव देवजीत सैकिया ने कहा कि भारत का स्टैंड पहले से स्पष्ट था, इसके बाद भी नकवी खुद अपनी बेइज्जती कराने क्यों आए, ये तो वही बता सकते हैं।
मोहसिन नक़वी कहने को तो पाकिस्तान क्रिकेट चलाते हैं, जनरल आसिम मुनीर के क़रीबी हैं, लेकिन जैसे मुनीर ने पाकिस्तान को बर्बाद किया है, वैसे ही मोहसिन नक़वी ने पाकिस्तान क्रिकेट को तबाह किया है। अब हाल ये हो गया है कि पाकिस्तान में talented क्रिकेट खिलाड़ी घर बैठे हैं, सिफारिशी players खेलते हैं और हर जगह पाकिस्तान की टीम बुरी तरह पिटती है। हमारी महिला cricketers की टीम ने एशिया कप में पाकिस्तानी टीम का क्या हाल किया था, ये सब ने देखा है।
मोहसिन नक़वी पिछले साल हमारी पुरुष टीम की trophy लेकर भाग गए थे और इस बार उन्होंने Women's team की trophy अपने दफ़्तर में रख ली। लेकिन ये ज़्यादा दिन नहीं चलेगा। 200 दिन बाद नक़वी Asian Cricket Council से बाहर हो जाएंगे। भारत को तो ट्रॉफी मिल जाएगी लेकिन मोहसिन नक़वी ने जो अपनी फ़ज़ीहत करवाई वो उन्हें ज़िंदगी भर याद रहेगी।
UCC से किसे दिक्कत है और क्यों ?
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि 2029 तक NDA शासित 21 राज्यों में यूनीफॉर्म सिविल कोड लागू हो जाएगा। मुस्लिम संगठनों और विरोधी दलों के नेताओं ने इस पर सख्त ऐतराज़ जताया। NDA की सहयोगी JDU के दो नेता, श्याम रजक और खालिद अनवर ने कहा कि जिन राज्यों में बीजेपी की सरकारें है, वहां बीजेपी UCC लागू करे, लेकिन बिहार में ये लागू नहीं होगा क्योंकि नीतीश कुमार पहले भी इसके विरोध में थे और आगे भी रहेंगे।
AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि UCC के नाम पर सरकार मुसलमानों को टारगेट करना चाहती है। ओवैसी ने कहा कि अब सुखबीर बादल और चन्द्रबाबू नायडू जैसे नेताओं को बताना चाहिए कि क्या वो UCC का समर्थन करेंगे। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के नेता कासिम रसूल इलियास ने कहा कि जो लोग अभी खामोश हैं, सोच रहे हैं कि ये सिर्फ मुसलमानों का मसला है, वो गलतफहमी में है, संघ और बीजेपी धीरे-धीरे बाकी सभी धर्मों को इसमें लपेट देगी, इसलिए सबको इसके खिलाफ खड़ा होना चाहिए। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि मोदी सरकार तो कांग्रेस की गलतियों को ठीक कर रही है।
बीजेपी का UCC लागू करने का इरादा कोई नई बात नहीं है। यह तो हमेशा से बीजेपी के manifesto में रहा है, न तो कुछ छुपाकर किया गया, न कोई ज़ोर-ज़बरदस्ती हुई। उत्तराखंड में UCC एक प्रयोग के तौर पर लागू हुआ। UCC को लेकर मुसलिम नेताओं ने जो शक-शुब्हा ज़ाहिर किए थे, वो बेबुनियाद साबित हुए। क़ानून लागू हुए ढाई साल से ज़्यादा हो गए, न निकाह पर रोक लगी, ना किसी ने बेडरुम में झांकने की कोशिश की, मुसलमानों की पहचान भी बनी रही और धार्मिक परंपराएं भी जारी हैं। न किसी ने काग़ज़ मांगे, न किसी की नागरिकता ख़तरे में पड़ी। जब ये सब सामने है तो बेवजह क़ानून का विरोध करने का क्या मतलब? अगर इस पर कोई आपत्ति है तो उसका ठोस कारण सामने रखना चाहिए।
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