बगरू के एक सरकारी स्कूल के निरीक्षण को लेकर हुए विवाद के बीच अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने साफ कहा है कि सरकारी स्कूलों को किसी भी कीमत पर राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने दिया जाएगा। महासंघ ने राजकीय विद्यालयों को राजनीतिक गतिविधियों और बाहरी हस्तक्षेप से दूर रखने की जरूरत बताई। संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. ऋषिन चौबीसा ने शनिवार को बांसवाड़ा में मीडिया से बातचीत के दौरान बगरू प्रकरण का जिक्र करते हुए कहा कि हिंसा या मारपीट का किसी भी स्थिति में समर्थन नहीं किया जा सकता, लेकिन यह भी गंभीर सवाल है कि राजनीतिक विवादों को सरकारी स्कूलों तक ले जाने की जरूरत क्यों पड़ रही है।
स्कूल की व्यवस्था से शिकायत है तो विभाग से करें संपर्क
डॉ. चौबीसा ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति या संगठन को किसी सरकारी स्कूल की व्यवस्था, सुविधाओं या पढ़ाई से जुड़ी कोई शिकायत है तो इसके लिए शिक्षा विभाग और प्रशासन के तय माध्यम मौजूद हैं। शिकायतों का समाधान इन्हीं माध्यमों से किया जाना चाहिए। स्कूल परिसर में राजनीतिक विवाद खड़ा करना किसी भी तरह उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि स्कूल शिक्षा का केंद्र हैं और वहां बच्चों की पढ़ाई सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। राजनीतिक गतिविधियों और बाहरी हस्तक्षेप से स्कूलों का माहौल प्रभावित होता है, जिसका सीधा असर विद्यार्थियों और शिक्षकों पर पड़ सकता है।
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'विद्यालय में शिक्षा होगी, राजनीति नहीं'
महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा कि राजनीति करना लोकतांत्रिक अधिकार हो सकता है, लेकिन सरकारी स्कूलों को राजनीतिक संघर्ष का मंच बनाना स्वीकार नहीं किया जा सकता। शिक्षकों को राजनीतिक दबाव में लाने या उन्हें राजनीतिक गतिविधियों का हिस्सा बनाने की कोशिश शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है।
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उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “विद्यालय में शिक्षा होगी, राजनीति नहीं होगी।” उनका कहना था कि शिक्षक विद्यार्थियों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए हैं, किसी राजनीतिक दल के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए नहीं।
विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए
महासंघ पदाधिकारियों ने सरकार के निर्देशों का समर्थन करते हुए कहा कि किसी भी राजनीतिक दल या संगठन को अपनी गतिविधियों के लिए लोकतांत्रिक मंचों का इस्तेमाल करना चाहिए। सरकारी स्कूलों में जाकर राजनीतिक टकराव पैदा करना न विद्यार्थियों के हित में है, न शिक्षकों के और न ही राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था के।
उन्होंने कहा कि स्कूलों में ऐसा माहौल होना चाहिए, जहां बच्चे बिना किसी राजनीतिक दबाव के पढ़ाई कर सकें और शिक्षक भी पूरी स्वतंत्रता के साथ अपनी जिम्मेदारी निभा सकें।
ये पदाधिकारी रहे मौजूद
बांसवाड़ा में हुई प्रेस वार्ता के दौरान संभाग उपाध्यक्ष बलवंत बामनिया, प्रदेश मीडिया प्रकोष्ठ के आशीष उपाध्याय, संभाग संगठन मंत्री दिनेश मईडा, संभाग संयुक्त मंत्री गोपाल मीणा, जिलाध्यक्ष दिलीप पाठक, प्रतापगढ़ जिलाध्यक्ष लालूराम मीणा, निर्मल कुमार निनामा, हीरालाल कोटेड और रमेशचंद्र मौजूद रहे।
इस दौरान महासंघ पदाधिकारियों ने बगरू प्रकरण को लेकर संगठन का पक्ष रखा और सरकारी विद्यालयों को राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखने की बात दोहराई।