बूंदी जिले के देई कस्बे में लंबे समय से चले आ रहे विवादित भूखंड के मामले ने शुक्रवार को उस समय नया मोड़ ले लिया, जब सर्व समाज के आह्वान पर पूरा कस्बा बंद रहा और लोगों ने जुलूस निकालकर नगर पालिका प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। विवादित भूखंड पर प्रदर्शन, नगर पालिका का घेराव और नारेबाजी के बाद प्रशासन हरकत में आया और मौके पर किए गए अवैध निर्माण को हटाने के लिए बुलडोजर चलाया गया। सुबह से ही देई कस्बे में बाजार बंद रहे। बड़ी संख्या में लोग चारभुजा चौक पर एकत्र हुए और जुलूस के रूप में विवादित भूखंड की ओर रवाना हुए।
प्रदर्शनकारियों ने नगर पालिका प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके बाद नगर पालिका कार्यालय का घेराव किया गया। जिम्मेदार अधिकारी के मौके पर नहीं मिलने पर लोगों में नाराजगी और बढ़ गई। प्रदर्शनकारी वापस विवादित भूखंड पर पहुंचे और वहां चारभुजानाथ तथा बाबा बख्तावर सिंह महाराज के नाम का बोर्ड लगाया। लोगों ने मौके पर धरना देकर प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
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हंगामा बढ़ा तो प्रशासन ने चलाया बुलडोजर
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे। समझाइश के प्रयास किए गए, लेकिन लोग अपनी मांगों पर अड़े रहे। इसके बाद प्रशासन ने विवादित स्थल पर किए गए निर्माण की जांच के बाद कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चलाया और अवैध निर्माण को हटाने की कार्रवाई शुरू की। कार्रवाई के दौरान मौके पर पुलिस जाप्ता भी तैनात रहा, ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद पूरे मामले ने और तूल पकड़ लिया और लोगों की नजर अब आगे की कार्रवाई पर टिक गई है।
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1955 से विवादित है भूखंड, कब्जे का लगाया आरोप
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विवेकानंद चौराहे के पास स्थित यह भूखंड वर्ष 1955 से विवादित है। लोगों ने आरोप लगाया कि भूखंड पर कथित रूप से कब्जा कर अवैध निर्माण किया गया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से भूमि के पुराने रिकॉर्ड, दस्तावेजों और निर्माण की पूरी जांच कराने की मांग की है।
पट्टे और रजिस्ट्री के दस्तावेजों की जांच की मांग
आंदोलनकारियों ने भूखंड से जुड़े कथित फर्जी अथवा नियम विरुद्ध पट्टे और रजिस्ट्री की मूल अभिलेखों के आधार पर जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच में कोई दस्तावेज फर्जी या नियम विरुद्ध पाया जाता है तो उसे नियमानुसार निरस्त किया जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही ग्राम पंचायत देई और नगर पालिका देई की ओर से पूर्व में जारी संदिग्ध एवं नियम विरुद्ध पट्टों की भी विशेष जांच कराने की मांग उठाई गई है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जांच में गलत पाए जाने वाले पट्टे निरस्त किए जाएं तथा जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका सामने आने पर कार्रवाई की जाए।
चारभुजानाथ-बख्तावर महाराज के नाम पट्टे की मांग
प्रदर्शनकारियों और समितियों की ओर से यह भी मांग रखी गई कि पूर्व पट्टाधारी परिवार द्वारा भूमि को चारभुजा समिति, देई और बख्तावर महाराज समिति, देई को दान किए जाने की बात कही जा रही है। ऐसे में नियमानुसार दोनों समितियों के पक्ष में पट्टा जारी किया जाए।
तहसीलदार बोले- जांच के बाद हटाया गया निर्माण
नायब तहसीलदार निराधार चौहान ने बताया कि पूरे मामले की जांच-पड़ताल करवाने के बाद निर्माण पर बुलडोजर चलाकर कार्रवाई की गई है। मामले की जांच अभी जारी है। जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन और चुनाव बहिष्कार की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो देई में बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा। धरना-प्रदर्शन के साथ आवश्यकता पड़ने पर चक्काजाम की चेतावनी भी दी गई है। वहीं, आगामी नगरपालिका चुनाव के बहिष्कार की चेतावनी भी सामने आई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि विवादित भूखंड को लेकर निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो जनता सामूहिक रूप से चुनाव बहिष्कार का निर्णय लेने पर मजबूर हो सकती है।
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फिलहाल हंगामे और विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन द्वारा बुलडोजर चलाकर की गई कार्रवाई से मामला एक बार फिर चर्चा में है। अब विवादित भूखंड के दस्तावेजों की जांच और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।