September 20, 2026

PVR INOX में नो कैश, सिर्फ UPI के फैसले पर बवाल, क्या कहता है RBI का नियम?

सिनेमा हॉल में मूवी और स्नैक्स के लिए नकद भुगतान लेने से मना करने पर PVR INOX की मुश्किलें बढ़ गई हैं. अहमदाबाद के एक वकील ने मल्टीप्लेक्स की मनमानी ‘नो कैश पॉलिसी’ के खिलाफ कानूनी नोटिस थमा दिया है. जानिए क्या कोई प्राइवेट बिजनेस भारतीय करेंसी लेने से इनकार कर सकता है और इस पर नियम क्या कहते हैं.

PVR INOX, legal notice, cashless payment rules, UPI payment dispute, RBI Legal Tender Act

सिनेमा हॉल में मूवी और स्नैक्स के लिए नकद भुगतान लेने से मना करने पर PVR INOX की मुश्किलें बढ़ गई हैं. Credit: MetaAI

विज्ञापन

मल्टीप्लेक्स चेन PVR INOX में फिल्म देखने और स्नैक्स खरीदने के दौरान पेमेंट को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. सिनेमा हॉल के फूड काउंटर पर नकद (कैश) लेने से मना करने और सिर्फ UPI से भुगतान का दबाव बनाने पर एक ग्राहक ने कंपनी को कानूनी नोटिस भेज दिया है. ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला अहमदाबाद के पैलेडियम मॉल स्थित PVR INOX का है. जानकारी के अनुसार, अहमदाबाद के वकील उत्कर्ष दवे 13 सितंबर को सिनेमा कॉम्प्लेक्स में फिल्म देखने पहुंचे थे. टिकट खरीदने के बाद जब वे फूड काउंटर पर खाने-पीने का सामान लेने गए तो वहां मौजूद स्टाफ ने कैश लेने से साफ इनकार कर दिया और केवल UPI के जरिए भुगतान करने को कहा.

अक्टूबर में बढ़ सकती है आपकी EMI? US Fed के कड़े रुख के बाद RBI पर ब्याज दरें बढ़ाने का भारी दबाव

Advertisment

कानून का दिया हवाला, 7 दिनों में मांगा जवाब

वकील उत्कर्ष दवे ने PVR INOX लिमिटेड को भेजे कानूनी नोटिस में कंपनी की इस ‘सिर्फ कैशलेस’ पॉलिसी को मनमाना बताया है. उन्होंने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) एक्ट, 1934 की धारा 26(1) का हवाला देते हुए कहा कि केंद्रीय बैंक द्वारा जारी नोट भारत में लीगल टेंडर हैं. ऐसे में किसी भी ग्राहक को नकद लेनदेन से रोकना सीधे तौर पर नियमों और पारदर्शिता का उल्लंघन है.
नोटिस में पूछा गया है कि क्या कंपनी ने ऐसी नीति काउंटर पर पहले से स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की थी? साथ ही, जिन ग्राहकों के पास स्मार्टफोन या इंटरनेट नहीं है, क्या उन्हें वैध नोट होने के बावजूद सेवा लेने से रोक दिया जाएगा? वकील ने 7 दिनों के भीतर जवाब न मिलने पर उपभोक्ता आयोग जाने की चेतावनी दी है.

क्या प्राइवेट बिजनेस कैश लेने के लिए बाध्य हैं?

कानून के जानकारों का कहना है कि कोई भी प्राइवेट बिजनेस लागू कानूनों के दायरे में रहते हुए अपने सामान या सेवाओं की बिक्री से जुड़ी शर्तें तय करने के लिए पूरी तरह आजाद है. यह छूट खास तौर पर उन कारोबारों के लिए जरूरी है जहां कैश से लेनदेन संभव या व्यावहारिक नहीं होता, जैसे ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, डिजिटल सर्विसेज, ऐप-बेस्ड सर्विस और ऑटोमेटेड सिस्टम. ऐसे मामलों में सिर्फ डिजिटल भुगतान मांगना कंपनी के काम करने के तरीके का हिस्सा माना जाता है. यही नहीं, कोई फिजिकल स्टोर भी आम तौर पर ‘सिर्फ कैशलेस’ पॉलिसी लागू कर सकता है, बशर्ते किसी विशेष रेगुलेटरी नियम के तहत कैश लेना अनिवार्य न किया गया हो.

बिना बताए थोपी नहीं जा सकती कैशलेस पॉलिसी

कानूनी जानकारों का स्पष्ट कहना है कि भले ही कोई बिजनेस सिर्फ UPI या कार्ड से भुगतान की शर्त रखे, लेकिन इसकी जानकारी ग्राहकों को पहले से और बिल्कुल साफ तौर पर दी जानी चाहिए. ग्राहक जब बिलिंग काउंटर पर पहुंचे, तब अचानक कैश लेने से मना करना पारदर्शिता और उपभोक्ता अधिकारों के खिलाफ माना जाता है.

विज्ञापन

विज्ञापन

हिंदी न्यूज़बिजनेसPVR INOX में नो कैश, सिर्फ UPI के फैसले पर बवाल, क्या कहता है RBI का नियम?

लेख समाप्त

विज्ञापन

और पढ़ें

होम पेज पर वापस जाएँ