
पंजाब की मुख्य न्यायाधीश और सीएम मान.
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में आज VC के जरिए हुई कैबिनेट बैठक में केंद्र सरकार के खिलाफ एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया है. मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर पंजाब के अधिकारों पर डाका डालने और संवैधानिक नियमों का लगातार उल्लंघन करने का गंभीर आरोप लगाया है. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट सांझा करते हुए कहा कि राज्य सरकार की सहमति लिए बिना पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के नए चीफ जस्टिस की नियुक्ति की गई है.
उन्होंने इसे तय प्रक्रियाओं (Memorandum of Procedure) और संवैधानिक नियमों का सीधा उल्लंघन बताया है. पंजाब सरकार ने मांग की है कि इस नियुक्ति को तुरंत रोका जाए और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए राज्य की राय का सम्मान किया जाए.
पंजाब कैबिनेट ने केंद्र के खिलाफ खोला मोर्चा
मुख्यमंत्री मान ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को भरोसे में लिए बिना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करना न्यायपालिका के कामकाज में केंद्र का सीधा दखल है. केंद्र सरकार द्वारा पंजाब के 9,000 करोड़ रुपये के आरडीएफ (Rural Development Fund) और बाढ़ राहत पैकेज को रोकने पर भी कैबिनेट ने कड़ी नाराजगी जताई. कैबिनेट बैठक में भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) के नियमों में केंद्र द्वारा किए गए एकतरफा बदलावों का भी पुरजोर विरोध किया गया.
ਅੱਜ ਪੰਜਾਬ ਕੈਬਨਿਟ ਦੀ ਮੀਟਿੰਗ ਵਿੱਚ ਕੇਂਦਰ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋਂ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਹੱਕਾਂ ‘ਤੇ ਲਗਾਤਾਰ ਮਾਰੇ ਜਾ ਰਹੇ ਡਾਕੇ ਅਤੇ ਸੰਵਿਧਾਨਕ ਨਿਯਮਾਂ ਦੀ ਉਲੰਘਣਾ ਖਿਲਾਫ਼ ਸਰਬਸੰਮਤੀ ਨਾਲ ਅਹਿਮ ਮਤਾ ਪਾਸ ਕੀਤਾ ਗਿਆ… ਸੂਬਾ ਸਰਕਾਰ ਦੀ ਸਹਿਮਤੀ ਲਏ ਬਿਨਾਂ ਪੰਜਾਬ ਅਤੇ ਹਰਿਆਣਾ ਹਾਈਕੋਰਟ ਦੇ ਨਵੇਂ ਚੀਫ਼ ਜਸਟਿਸ ਦੀ ਨਿਯੁਕਤੀ ਕਰਨਾ ਤੈਅ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆਵਾਂ pic.twitter.com/wguvfcfxjH
— Bhagwant Mann (@BhagwantMann) September 6, 2026
पंजाब सरकार ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि केंद्र सरकार द्वारा राज्य के संवैधानिक अधिकारों को दबाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और पंजाब सरकार इसका विरोध करेगी.
जानें बैठक के बाद क्या बोले मंत्री डॉ बलबीर सिंह
बैठक के बाद पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ बलबीर सिंह ने कैबिनेट बैठक को लेकर दी जानकारी. उन्होंने कहा कि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (चीफ जस्टिस) के रूप में अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया. मानक प्रक्रिया (Standard Procedure) का पालन नहीं किया गया, भारतीय जनता पार्टी ने पंजाबियों को नजरअंदाज किया है. उन्होंने कहा कि पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश (सीनियर मोस्ट जज) जस्टिस जी.एस. संधावालिया की मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में नियुक्ति के दौरान उनके साथ धक्का (अन्याय) किया गया.
मध्य प्रदेश सरकार ने जस्टिस संधावालिया की नियुक्ति को 2 महीने तक रोक कर रखा. उसके बाद चीफ जस्टिस ने उनकी नियुक्ति हिमाचल प्रदेश में कर दी. पंजाब के मुख्यमंत्री की सहमति लेने से इनकार किया गया, उनके विचार लेने से मना किया गया. इससे यह स्पष्ट होता है कि ये सिर्फ मुख्यमंत्री जी का अपमान नहीं है, बल्कि आज भारतीय जनता पार्टी 3 करोड़ पंजाबियों का अपमान कर रही है. जल्द ही राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और पंजाब के राज्यपाल को पत्र लिखकर पंजाब सरकार की सहमति तक जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को चीफ जस्टिस की शपथ ना दिलाने का अनुरोध किया जाएगा.
केंद्र ने कहा- विवाद दुर्भाग्यपूर्ण और अनावश्यक
भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल, चंडीगढ़ सत्य पाल जैन ने एक बयान जारी कर कहा कि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर जस्टिस अश्वनी शर्मा की नियुक्ति को लेकर पंजाब सरकार ने जो हालिया विवाद खड़ा किया है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और पूरी तरह से अनावश्यक है. यह नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति ने की है, जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 217 (1) के तहत सर्वोच्च संवैधानिक अधिकारी हैं.
उन्होंने कहा कि जजों की नियुक्ति के लिए एक तय प्रक्रिया है जिसे ‘मेमोरेंडम ऑफ़ प्रोसीजर’ (MOP) कहा जाता है. इस नियुक्ति से पहले पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया है. सभी तय प्रक्रियाओं और जरूरी प्रोटोकॉल का पालन किया गया है और कानून के किसी भी प्रावधान का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है.
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 6-8-2026 को पहले लॉट में महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, पंजाब और हरियाणा के चीफ जस्टिस की नियुक्ति के लिए और दूसरे लॉट में राजस्थान, जम्मू-कश्मीर और मध्य प्रदेश के लिए नामों की सिफारिश की थी. इन प्रस्तावों पर सभी संबंधित राज्य सरकारों की राय मांगी गई थी.
मान सरकार के आरोपों पर केंद्र का जवाब
उन्होंने कहा कि पंजाब को छोड़कर सभी राज्य सरकारों ने एक हफ्ते के भीतर अपनी राय भेज दी और सभी नियुक्तियां समय पर कर दी गईं. असल में, MOP के मुताबिक, पंजाब और हरियाणा दोनों सरकारों को इस प्रस्ताव के बारे में बताया गया था और 10-8-2026 को उनकी राय मांगी गई थी. पंजाब और हरियाणा, दोनों राज्यों के गवर्नरों ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी और हरियाणा सरकार ने भी 12-8-2026 और 13-8-2026 को प्रस्ताव के पक्ष में अपनी राय भेज दी.
उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार के पास अपनी राय भेजने के लिए पर्याप्त समय था – यानी एक या दो हफ्ते का उचित समय, लेकिन उन्होंने अब तक कोई राय नहीं भेजी है. वैसे भी, राज्य सरकारों की राय बाध्यकारी नहीं होती है, क्योंकि सिर्फ राज्य सरकारों की राय लेना ज़रूरी होता है और इस मामले में राज्य सरकारों के पास कोई ‘वीटो’ पावर नहीं होती है. किसी को भी न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करने और गैर-राजनीतिक मुद्दे का राजनीतिकरण करने के मकसद से किसी प्रस्ताव को अनिश्चित काल तक रोके रखने का अधिकार नहीं है.
ये भी पढ़ें- पंजाब CM भगवंत मान ने गिनाईं सरकार की उपलब्धियां, बोले- पंजाब में नफरत नहीं, प्यार के खिलेंगे फूल

मोहित मलहोत्रा
भारतीय विद्या भवन दिल्ली से पत्रकारिता, 17 वर्षों का अनुभव, LIVE INDIA, NEWS 24 & NEWS 18 INDIA का पूर्व अनुभव, फिलहाल TV9 Bharatvarsh में चंडीगढ़ ब्यूरो - पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के लिए डिप्टी एडिटर
Read More