July 14, 2026

Pregnant Buffalo Surgery: 9 माह की प्रेग्नेंट भैंस के पेट से निकाली 66 नुकीली धातुएं! 4 डॉक्टर बने 'देवदूत'

Time Published: Tuesday, July 14, 2026, 15:29 [IST]

Pregnant Buffalo Surgery: हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहां एक 9 महीने की गर्भवती भैंस के पेट में 66 नुकीली धातुओं का जखीरा निकाला गया। भैंस के पहले ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड कराए गए। इसके बाद चार डॉक्टरों की टीम ने कई चले घंटों के ऑपरेशन के बाद सफल सर्जरी की।

चौंकाने वाली बात यह है कि भैंस के पेट से कीलें, तार और छोटे-छोटे धातु के टुकड़े बरामद किए गए। गनीमत रही कि भैंस और उसके बच्चे को कुछ नहीं हुआ। लेकिन इस खबर ने पूरे जिले को चर्चा का विषय बना दिया। आइए विस्तार से जानते हैं कि यमराज की सवारी भैंस के लिए कैसे देवदूत बने 4 डॉक्टर...

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Himachal Pradesh Una Pregnant Buffalo Case: 9 महीने की गर्भवती की जान खतरे में...

मामला ऊना जिले के हरोली सब-डिवीजन के बारेवाल गांव का है। यहां के निवासी पशुपालक करनैल सिंह अपनी प्रेग्नेंट भैंस को लेकर ललरी स्थित वेटेरिनरी पॉलीक्लिनिक पहुंचे। भैंस 9 महीने की गर्भवती थी। करनैल ने डॉक्टर को बताया कि भैंस पिछले 10 दिनों से चारा नहीं खा रही है। भैंस काफी सुस्त, कमजोर और बीमार नजर आ रही थी। दवा से भी कोई फायदा नहीं दिख रहा था। ऐसे में वेटीनरी ऑफिसर डॉ. निशांत रानौत की टीम ने भैंस की जांच शूरू की।

भैंस का ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड, पेट में कीलें-तार

वेटेरिनरी ऑफिसर डॉ. निशांत रानौत ने भैंस की जांच के लिए पहले 4 डॉक्टरों की जांबाज टीम तैयार की। इसके बाद, भैंस का ब्लड टेस्ट, अल्ट्रासाउंड कराया गया। रिपोर्ट में भैंस के पेट में कीलें, तार, प्लास्टिक समेत धातु के 66 टुकड़े मिले। डॉक्टरों के पैरों तले जमीन खिसक गई। डॉक्टर ने बताया कि नुकीली चीजें पेट को और आंतों को चोट पहुंचा रही थीं। इतना ही नहीं, गर्भ में पल रहे पड़िया (भैंस का बच्चा) की जान भी खतरे में थी।

सच्चे देवदूत बने 4 डॉक्टर, सर्जरी सफल ने बचाई भैंस की जान

रिपोर्ट्स के मुताबिक, वेटेरिनरी ऑफिसर डॉ. निशांत रानौत समेत चार डॉक्टरों डॉ. नवनीत शर्मा, डॉ. शिल्पा रानौत, डॉ. स्टेफनी प्रधान की टीम ने भैंस की सर्जरी की। इसके बाद, घंटों चले ऑपरेशन के बाद भैंस के पेट से कुल 66 नुकीली धातु की वस्तुएं बरामद की गई। डॉक्टरों का कहना है कि अगर ऑपरेशन में कुछ दिन की देरी होती तो, भैंस और उसके बच्चे को गंभीर नुकसान पहुंचता। गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत भी हो सकती थी।

10 दिनों तक डॉक्टरों के ऑब्जर्वेशन में भैंस

डॉ. निशांत रानौत ने बताया कि सर्जरी के बाद से भैंस को अगले 7 से 10 दिनों तक ऑब्जर्वेशन में रखा जा रहा है। अब वो चारा भी खाने लगी है। धीरे-धीरे हालत में सुधार होने पर उसे वापस घर भेज दिया जाएगा।

अब भैंस की गर्भावस्था की स्थिति पर एक नजर...

आपको बता दें कि, भैंस का गर्भकाल औसतन 305 से 310 दिन (लगभग 10 महीने और 10 दिन) का होता है। अगर, भैंस कुछ उल्टा-सीधा खा लेती है, तो डिलीवरी में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।