Updated On: Jul 19, 2026 | 08:50 AM IST
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सार
Potassium Ki Kami: पोटैशियम शरीर में मांसपेशियों की ताकत, तंत्रिका तंत्र की सेहत और शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। आइए जानते हैं पोटैशियम की कमी के कारण, लक्षण और उपाय।

पोटैशियम (फोटो.सोशल मीडिया)
विस्तार
All About Potassium Deficiency: जैसे सभी विटामिन, प्रोटीन व खनिज तत्व शरीर के लिए आवश्यक है, उसी प्रकार पोटैशियम भी हमारे शरीर के लिए जरूरी है। यह हमारे दिल की धड़कन को नियमित रखने और नर्वस सिस्टम को बेहतर बनाए रखने और मांसपेशियों को रिलैक्स रखने का काम करती है।
पोटैशियम की कमी से थकान अधिक महसूस होती है, मांसपेशियों में खिंचाव, बार-बार टॉयलेट जाना और दिल की धड़कनें तक अनियमित हो जाती है। पोटैशियम की कमी को अकसर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
जब आप लगातार बिना कारण थकान, कमजोरी या रात में मांसपेशियों में ऐंठन महसूस करते हैं और इसके साथ ही हाई बल्ड प्रेशर की समस्या आपको परेशान कर रही है, तो हो सकता है कि आपके शरीर में पोटैशियम की कमी है, इसे मेडिकल की भाषा में हाइपोकैलीमिया कहते हैं।
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क्या होता है पोटैशियम
पोटैशियम एक महत्वपूर्ण खनिज लवण है, जो हमारे शरीर में कई अहम भूमिकाओं को निभाता है। शरीर पोटैशियम की कमी को खाद्य पदार्थों के जरिए पूरा करता है।पोटैशियम का काम मांसपेशियों के संकुचन को नियंत्रित करना, नर्व को संकेत भेजना और बॉडी फ्लुड को मेंटेन करना है।
पोटेशियम के स्तर में थोड़ा सा बदलाव भी हमारे शरीर के विभिन्न कार्यों पर असर डाल सकता है। यह हमारे शरीर की कोशिकाओं में विद्युत गतिविधि को बनाए रखता है। जब पोटैशियम का स्तर कम होता है, तो यह उच्च विद्युत गतिविधि वाली कोशिकाओं जैसे तंत्रिकाएं, मांसपेशियां और हृदय को प्रभावित करता है।
जब पोटैशियम का स्तर 3.6mmol/litre से कम होता है, तो इसे पोटैशियम की कमी माना जाता है।
पोटैशियम की कमी के लक्षण
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अत्यधिक थकान और कमजोरी
पोटैशियम की कमी का यह सबसे आम लक्षण है। पर्याप्त आराम के बावजूद भी इसकी कमी के कारण कोशिकाएं ऊर्जा का उत्पादन ठीक से नहीं कर पाती, जिससे लगातार थकान और शारीरिक कमजोरी महसूस होती है।
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मांसपेशियों में ऐंठन और अकड़न
मांसपेशियों के संकुचन को नियंत्रित करने वाला विद्युत संतुलन बिगड़ने के कारण, हाथ-पैरों में बार-बार ऐंठन (खासकर रात में) होती है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
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अनियमित और तेज दिल की धड़कन
यह पोटेशियम की कमी के लक्षण में सबसे गंभीर है। दिल की धड़कन की लय को नियंत्रित करने वाले विद्युत संकेतों में बाधा आती है, जिससे दिल की धड़कन तेज होने लगती है और यह कार्डियक अरेस्ट का कराण बन सकता है।
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सुन्नता और झुनझुनी
नर्वस सिस्टम के बाधित होने के कारण उंगलियों, पैरों या अन्य अंगों में सुन्नता या पिन और सुई चुभने जैसा अजीब एहसास हो सकता है।
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पाचन संबंधी समस्याएं
पाचन तंत्र की चिकनी मांसपेशियों के कार्य धीमे हो जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप गंभीर कब्ज, पेट फूलना और ऐंठन की समस्या हो सकती है।
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हाई ब्लड प्रेशर
पोटेशियम की कमी रक्त वाहिकाओं को संकुचित कर सकती है और सोडियम के प्रभाव को बढ़ा सकती है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर की समस्या होती है।
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मानसिक भ्रम और मूड स्विंग्स
पोटेशियम ब्रेन फंक्शनिंग के लिए भी बेहद जरूरी है। पोटैशियम की अधिक कमी होने पर भ्रम, डिप्रेशन या मतिभ्रम जैसी मानसिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
शरीर में पोटैशियम की कमी कैसे हो जाती है
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वॉटर लॉस
यदि लंबे समय तक दस्त या उल्टी होना, अत्यधिक पसीना आना और लैक्सेटिव का अत्यधिक उपयोग होता है, तो शरीर से अधिक तरल पदार्थ बाहर निकल जाता है, जिससे पोटैशियम की कमी हो सकती है।
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दवाइयों का उपयोग
उच्च रक्तचाप और हृदय रोग के इलाज में इस्तेमाल होने वाले कुछ डाइयुरेटिक्स से किडनी में मौजूद पोटेशियम बाह निकलने लगते हैं। डॉक्टर अक्सर इन दवाओं का उपयोग करने वाले मरीजों को सप्लीमेंट्स देते हैं।
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अंतर्निहित स्वास्थ्य स्थितियां
हार्मोनल रोग, कुशिंग सिंड्रोम, गुर्दे की समस्या और लो मैग्नीशियम के कारण भी शरीर में पोटेशियम की कमी हो सकती है।
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डाइट
किसी भी चीज की कमी का इकलौता कारण डाइट नहीं हो सकता है, लेकिन फलों, सब्जियों और होल ग्रेन्स का आहार में शामिल न होना पोटेशियम की कमी का कारण बन सकते हैं।
पोटैशियम की कमी से होने वाली बीमारियां
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कार्डियक अरेस्ट
पोटैशियम की कमी से हमारे हार्ट हेल्थ को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचता है। यह वेंट्रिकुलर फाइब्रिलेशन जैसी घातक हार्ट डिजीज को ट्रिगर कर सकती है।
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हाइपोकॅलेमिक पैरालिसिस
पोटैशियम का स्तर बहुत कम होने पर अचानक और गंभीर मांसपेशियों की कमजोरी या पैरालिसिस हो सकता है, जिसे हाइपोकॅलेमिक पीरियोडिक पैरालिसिस कहते हैं।
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रबडोमायोलिसिस
अत्यधिक मांसपेशियों की क्षति यानी रबडोमायोलिसिस की स्थिति पैदा हो सकती है। इसमें टूटी हुई मांसपेशियों से हानिकारक पदार्थ, जिसे मायोग्लोबिन कहा जाता है, रक्त प्रवाह में लीक होकर किडनी को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकते हैं और किडनी फेलियर का कारण बन सकते हैं।
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किडनी की समस्या होना
लंबे समय तक पोटैशियम की कमी से होने वाला रोग किडनी के पानी को केंद्रित करने की क्षमता को खराब करता है, जिससे बार-बार पेशाब जाने की इच्छा बढ़ जाती है, इससे किडनी में सिस्ट बन सकते हैं।
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