July 28, 2026

पैलेट गन पर बैन लगाने की मांग, सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में पेपर लीक के मुद्दे पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) द्वारा पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया था. जिसमें कुछ प्रदर्शनकारी जख्मी बताए जा रहे हैं. वहीं अब प्रदर्शन में इसके इस्तेमाल पर सवाल खड़े हो रहे हैं. कई विपक्षी नेताओं ने इसको लेकर नाराजगी जाहिर की है. इस बीच सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है, जिसमें पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की गई है.

जानकारी के मुताबिक पूर्व IPS अधिकारी यशोवर्धन आजाद और पेलेट गन से घायल हुए दो अन्य लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. याचिका में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर नागरिकों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पैलेट गन और धातु वाले प्रोजेक्टाइल के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की गई है.

मुआवजा और इलाज की मांग

इसके साथ ही याचिका में 20 जुलाई को पैलेट लगने से घायल सभी पीड़ितों को उचित मुआवजा देने, उनका पूरा इलाज, पुनर्वास और चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है.

पैलेट गन से हुए जख्मी

यह याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत पूर्व आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद, प्रशांत कुमार सिंह और शेख इरशाद मंसूरी ने ने वकील वृंदा ग्रोवर के जरिए यह याचिका दायर की है. प्रशांत कुमार सिंह और शेख इरशाद मंसूरी का दावा है कि वो दोनों 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित ‘संसद चलो’ प्रदर्शन के दौरान RAF द्वारा चलाई गई पैलेट गन से जख्मी हुए थे.

पीड़ितों का दावा

प्रशांत कुमार ने दावा किया कि वो मार्च में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी के रूप में शामिल हुए थे. उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी तरफ से बिना किसी उकसावे या आक्रामकता के RAF के जवानों ने उन पर पैलेट गन से फायरिंग की. वहीं, 26 साल के शेख इरशाद मंसूरी का कहना है कि वो पासपोर्ट और वीजा संबंधी काम के बाद कनॉट प्लेस में थे. इसी दौरान RAF की पैलेट फायरिंग में वो जख्मी हो गए थे.

याचिका में कहा गया है कि प्रदर्शन के दौरान RAF ने अचानक पंप-एक्शन गन से फायरिंग की, जिससे धातु के छोटे-छोटे पैलेट बड़ी संख्या में भीड़ की ओर फैल गए. ये पैलेट याचिकाकर्ताओं के शरीर में धंस गए, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं, तेज दर्द हुआ और खून बहने लगा. याचिका में 20 जुलाई की घटना में घायल सभी लोगों को मुआवजा, पूर्ण चिकित्सा सुविधा, इलाज और पुनर्वास उपलब्ध कराने की मांग की गई है.

पहले चेतावनी देना जरूरी

याचिका में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 148 का हवाला देते हुए कहा गया है कि किसी भी भीड़ को तितर-बितर करने से पहले उसे चेतावनी देना और शांतिपूर्ण तरीके से हटने का आदेश देना जरूरी है. अगर भीड़ नहीं हटती, तब भी पहले सिविल फोर्स (Civil Force) का इस्तेमाल किया जाना चाहिए.

याचिका में कहा गया है कि 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी ने संसद चलो मार्च निकाला था. इस दौरान दिल्ली पुलिस ने भीड़ प्रबंधन के लिए RAF जवानों की भी मदद ली थी. शाम करीब 4 से 4.30 बजे के बीच पुलिस और RAF ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया. इसी दौरान आरएएफ ने अचानक पैलेट गन से फायरिंग कर दी, जिसमें कई स्टूडेंट्स के साथ वे भी घायल हो गए.

पीयूष पांडे

पीयूष पांडे

प्रमुखत: सुप्रीम कोर्ट, वित्त मंत्रालय और भारतीय निर्वाचन आयोग की खबरों की जिम्मेदारी. पत्रकारिता में 22 वर्षों से ज्यादा का अनुभव. हिंदुस्तान, अमर उजाला, दैनिक भास्कर और आज में सेवाएं दीं. खबरिया चैनल और अखबार के अलावा दैनिक भास्कर के डिजिटल प्लेटफॉर्म में जिम्मेदारी निभाई, जबकि ऑल इंडिया रेडियो के आमंत्रण पर कई विशिष्ट जनों के साक्षात्कार किए.

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