July 27, 2026

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सिर्फ शुरुआत है, उद्धव ठाकरे का केंद्र पर हमला; बोले- छात्र आंदोलन से झुकी सरकार| Navbharat Live

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सिर्फ शुरुआत है, उद्धव ठाकरे का केंद्र पर हमला; बोले- छात्र आंदोलन से झुकी सरकार

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    गोरक्ष पोफली

Updated On: Jul 27, 2026 | 06:28 PM IST

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सार

Samana Editorial On Protest: ठाकरे गुट के मुखपत्र सामना में केंद्र सरकार पर हमला बोला गया है। उद्धव ठाकरे का दावा है कि छात्र आंदोलन के दबाव में आकर सरकार को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेना पड़ा।

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उद्धव ठाकरे (सोर्स: सोशल मीडिया)

विस्तार

Uddhav Thackeray Attack On Center: शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे ने भाजपा नीत एनडीए सरकार पर तीखा हमला करते हुए सोमवार को दावा किया कि नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं और छात्र नेताओं के 35 दिनों तक चले आंदोलन के दौरान केंद्र सरकार देशभर में हंसी का पात्र बन गई।

पार्टी के मुखपत्र सामना में प्रकाशित एक तीखे संपादकीय में ठाकरे गुट ने कहा कि नीट परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ हुए लंबे आंदोलन ने केंद्र सरकार को वास्तविकता का पूरा एहसास कराया और सरकार की छवि को गंभीर झटका पहुंचाया।

जनाक्रोश के चलते धर्मेंद्र प्रधान को देना पड़ा इस्तीफा

सामना के संपादकीय में कहा गया कि देशभर के युवाओं के गुस्से ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस आंदोलन का पहला राजनीतिक शिकार बना दिया। पार्टी का दावा है कि शुरुआत में सरकार इस्तीफे के पक्ष में नहीं थी। संपादकीय में उन खबरों का भी जिक्र किया गया, जिनमें कहा गया था कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि एनडीए की कार्यशैली में इस्तीफे शामिल नहीं हैं। हालांकि, बढ़ते जनाक्रोश के चलते सरकार को अंतत धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेना पड़ा।

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संपादकीय में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के आधिकारिक कारण को भी खारिज किया गया। प्रधान ने कहा था कि उन्होंने राष्ट्रीय एकता बनाए रखने और राष्ट्रविरोधी ताकतों को आंदोलन का फायदा उठाने से रोकने के लिए इस्तीफा दिया है। इस पर संपादकीय में सवाल किया गया, जंतर-मंतर या देशभर के प्रदर्शनों में उन्हें कौन-सी राष्ट्रविरोधी ताकतें दिखाई दीं?

छात्रों को राष्ट्रविरोधी बताना अपमान है

संपादकीय में कहा गया, छात्र नेताओं और जलवायु कार्यकर्ताओं को राष्ट्रविरोधी बताना पूरे देश में मौजूद वास्तविक आक्रोश का अपमान है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का राष्ट्रीय एकता से कोई संबंध नहीं है। देश तो नीट पेपर लीक के कारण जान गंवाने वाले 20 युवाओं के बलिदान से एकजुट हुआ था।

संपादकीय में उन प्रमुख चेहरों का भी उल्लेख किया गया, जिन्होंने 35 दिनों के आंदोलन को गति दी। इनमें अमेरिका से लौटे अभिजीत दीपके, जिन्होंने पेपर लीक के खिलाफ लोगों को संगठित करने के लिए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ बनाई, जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और छात्र नेता नेहा बोरा शामिल हैं।

सरकार के रुख और बयानों में विरोधाभास का आरोप

पार्टी ने सरकार के रुख में विरोधाभास होने का भी आरोप लगाया। संपादकीय में कहा गया कि एक तरफ भाजपा ने सोनम वांगचुक को विदेशी एजेंट बताने की कोशिश की, वहीं दूसरी तरफ उसके मंत्री उनसे मिलकर अनशन समाप्त करने की अपील करते नजर आए।

संपादकीय में कहा गया कि इस पूरे मामले का राजनीतिक असर केवल धर्मेंद्र प्रधान तक सीमित नहीं रह सकता। इसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को छात्रों पर कथित लाठीचार्ज के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया और प्रधानमंत्री मोदी से आधिकारिक माफी की मांग की गई।

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एंटी-पेपर लीक विधेयक को बताया महज दिखावा

ठाकरे गुट ने सरकार द्वारा लाए गए नए एंटी-पेपर लीक विधेयक को भी महज एक दिखावा बताया। पार्टी का आरोप है कि यह पुराना कानून ही है, जिसमें सिर्फ सजा और जुर्माने की रकम बदलकर छात्रों और अभिभावकों को भ्रमित करने की कोशिश की गई है।

उद्धव ठाकरे ने सामना के संपादकीय में दावा किया गया कि आंदोलन में शामिल युवाओं की डिजिटल समझ, तकनीकी क्षमता और स्वतःस्फूर्त संगठन ने एक महीने तक चले आंदोलन के दौरान भाजपा के डिजिटल प्रचार और आईटी सेल को प्रभावहीन बना दिया।उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना यूबीटी ने चेतावनी दी कि यदि सरकार छात्रों की नाराजगी और प्रशासनिक विफलताओं के मूल कारणों को दूर नहीं करती है, तो देशभर में असंतोष की यह चिंगारी और बढ़ती जाएगी।

-एजेंसी रिपोर्ट से

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