July 23, 2026

नेशनल हाईवे लैंड एक्विजिशन पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- अफसर नहीं, न्यायिक निकाय तय करे मुआवजा

नेशनल हाईवे लैंड एक्विजिशन पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- अफसर नहीं, न्यायिक निकाय तय करे मुआवजा

Supreme Court: नेशनल हाईवे निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण के मुआवजे पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है. कोर्ट ने केंद्र सरकार से नेशनल हाईवे एक्ट में बदलाव पर विचार करने को कहा है.

Supreme Court: नेशनल हाईवे निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण के मुआवजे पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है. कोर्ट ने केंद्र सरकार से नेशनल हाईवे एक्ट में बदलाव पर विचार करने को कहा है.

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सुप्रीम कोर्ट लगाएगा स्पेशल लोक अदालत Photograph: (ANI)

Supreme Court: नेशनल हाईवे के निर्माण के लिए अधिग्रहित की जाने वाली जमीन के मुआवजे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी की है. कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह नेशनल हाईवे एक्ट में जरूरी बदलाव करने पर विचार करे, ताकि जमीन के मुआवजे से जुड़े विवादों का फैसला केवल सरकारी अधिकारियों के भरोसे न रहे.

मुआवजा तय करना पूरी तरह न्यायिक प्रक्रिया

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जमीन का मुआवजा तय करना एक न्यायिक प्रक्रिया है. ऐसे मामलों में फैसला लेने वाले व्यक्ति को कानून और न्यायिक प्रक्रिया की अच्छी समझ होना जरूरी है. कोर्ट ने मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि नेशनल हाईवे एक्ट में मुआवजे से जुड़े विवादों को सरकारी अधिकारियों के पास भेजने की व्यवस्था है, जबकि दूसरे भूमि अधिग्रहण कानूनों में न्यायिक रूप से प्रशिक्षित फोरम की भूमिका रहती है.

हाईवे बनते ही बढ़ती है आसपास की कीमतें

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सामान्य तौर पर हाईवे बनने के बाद उसके आसपास की जमीन की कीमत बढ़ जाती है. ऐसे में जिन लोगों की जमीन सरकार अधिग्रहित करती है, उन्हें उचित मुआवजा मिलना बेहद जरूरी है. कोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि पहले नेशनल हाईवे एक्ट के तहत जमीन मालिकों को मुआवजे के साथ सोलैटियम और ब्याज का लाभ नहीं मिलता था और इस मुद्दे पर भी अदालत को हस्तक्षेप करना पड़ा था.

केंद्र सरकार कर रही है कानून में बदलाव पर विचार

सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इस व्यवस्था में बदलाव का प्रस्ताव केंद्र सरकार के स्तर पर विचाराधीन है. उन्होंने भरोसा दिया कि इस मामले को जल्द ही सक्षम प्राधिकारी के सामने रखा जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने टाली सुनवाई, अंतरिम व्यवस्था रहेगी लागू

केंद्र के इस आश्वासन के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई फिलहाल आगे के लिए टाल दी. हालांकि कोर्ट ने साफ किया कि तब तक मौजूदा अंतरिम व्यवस्था जारी रहेगी. नेशनल हाईवे एक्ट के तहत नियुक्त मध्यस्थ लंबित मामलों की सुनवाई करते रहेंगे, लेकिन उनके फैसले इन कार्यवाहियों के अंतिम परिणाम पर निर्भर रहेंगे.

न्यायिक निष्पक्षता की दिशा में बड़ा कदम

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह फिलहाल कानून में बदलाव का निर्देश नहीं दे रहा है, बल्कि केंद्र को इस पहलू पर विचार करने का सुझाव दे रहा है. कोर्ट का मानना है कि अगर सरकार खुद इस मुद्दे पर कानून में उचित बदलाव की संभावना देख रही है, तो अदालत को सीधे कोई अंतिम फैसला लेने से पहले उस प्रक्रिया का इंतजार करना चाहिए.

इस मामले में कोर्ट की टिप्पणी से यह सवाल फिर सामने आया है कि जमीन के मुआवजे जैसे संवेदनशील मामलों में फैसला लेने की प्रक्रिया कितनी निष्पक्ष और न्यायसंगत होनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि मुआवजा तय करने की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें जमीन मालिकों को न्यायिक सुरक्षा और निष्पक्ष सुनवाई का भरोसा मिल सके.

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