वर्दी के बाद भी सम्मान की राह: देश में पहला उत्तराखंड का 'अग्निवीर रोजगार प्रकोष्ठ' खोलेगा दूसरी पारी के द्वार
By Oneindia Staff
Published: Wednesday, July 22, 2026, 18:49 [IST]
Uttarakhand Agniveer Employment Cell: देश की सेवा करना किसी अग्निवीर की यात्रा का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत होती है। चार वर्षों तक सेना में अनुशासन, नेतृत्व और कठिन परिस्थितियों में काम करने का अनुभव हासिल करने के बाद सबसे बड़ा सवाल होता है, अब आगे क्या? उत्तराखंड सरकार इसी सवाल का जवाब तलाशने की तैयारी में है।
राज्य सरकार देश में अपनी तरह की अभूतपूर्व पहल के तहत अग्निवीर रोजगार प्रकोष्ठ (Agniveer Employment Cell - ARC) स्थापित करने जा रही है। इसका उद्देश्य सेना से लौटने वाले अग्निवीरों को नागरिक जीवन में सहज बदलाव के साथ सम्मानजनक रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। सरकार का मानना है कि सेना में अर्जित अनुशासन, तकनीकी दक्षता, नेतृत्व क्षमता और संकट प्रबंधन का अनुभव केवल सैन्य सेवा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि राज्य के विकास में भी उसका उपयोग होना चाहिए।
रोजगार के पांच बड़े रास्ते
प्रस्तावित रोजगार प्रकोष्ठ पूर्व अग्निवीरों के लिए पांच प्रमुख क्षेत्रों में अवसर तलाशेगा-
- राज्य सरकार की नौकरियां
- केंद्रीय सुरक्षा बल
- निजी क्षेत्र
- पर्यटन एवं आपदा प्रबंधन
- स्वरोजगार और उद्यमिता
सरकार का उद्देश्य केवल नौकरी की जानकारी देना नहीं, बल्कि अग्निवीरों को उनकी योग्यता और अनुभव के अनुरूप सही अवसरों से जोड़ना है। पुलिस, वन विभाग, आपदा प्रबंधन, सुरक्षा सेवाओं और विभिन्न निजी उद्योगों में रोजगार की संभावनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
पहली खेप की वापसी से पहले होगी पूरी तैयारी
अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए पहले बैच के अग्निवीर 31 दिसंबर 2026 को अपनी चार वर्षीय सेवा पूरी कर नागरिक जीवन में लौटेंगे। राज्य सरकार की योजना है कि इससे पहले ही रोजगार प्रकोष्ठ पूरी तरह सक्रिय हो जाए, ताकि लौटने वाले अग्निवीरों को करियर की नई शुरुआत के लिए इंतजार न करना पड़े।
अग्निपथ योजना क्या है?
अग्निपथ योजना के तहत 17.5 से 21 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की सेना, नौसेना और वायुसेना में चार वर्षों के लिए भर्ती की जाती है। इनमें से लगभग 25 प्रतिशत अग्निवीर 1 फरवरी 2027 से नियमित सशस्त्र बलों में अपनी सेवाएं जारी रखेंगे, जबकि शेष 75 प्रतिशत नागरिक जीवन में लौटेंगे। ऐसे में सेवा के बाद रोजगार और कौशल का बेहतर उपयोग एक महत्वपूर्ण आवश्यकता बनकर सामने आता है।
डिजिटल स्किल बैंक से होगी योग्यता की पहचाना
सरकार प्रत्येक लौटने वाले अग्निवीर का ऑनलाइन पंजीकरण करेगी। इसके साथ ही एक डिजिटल स्किल बैंक तैयार किया जाएगा, जिसमें उनकी सैन्य ट्रेनिंग, तकनीकी दक्षता, विशेषज्ञता और कार्य अनुभव का पूरा रिकॉर्ड दर्ज होगा। इसी आधार पर विभिन्न क्षेत्रों में उनके लिए उपयुक्त रोजगार के अवसर तलाशे जाएंगे। जो अग्निवीर अपनी योग्यता को और बेहतर बनाना चाहेंगे, उनके लिए 10 से 15 दिनों के अल्पकालिक कौशल उन्नयन और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी उपलब्ध कराने की योजना है।
50 से अधिक क्षेत्रों में रोजगार की संभावना
- सरकार का लक्ष्य पूर्व अग्निवीरों को 50 से अधिक क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का है। इनमें पर्यटन, होटल एवं आतिथ्य उद्योग, सुरक्षा सेवाएं, लॉजिस्टिक्स, आधारभूत ढांचा, कृषि, खेल, विनिर्माण और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
- रोजगार प्रकोष्ठ सरकार, कौशल विकास संस्थानों, निजी कंपनियों और पूर्व अग्निवीरों के बीच एक समन्वय मंच के रूप में काम करेगा, ताकि प्रशिक्षित युवाओं तक अवसर आसानी से पहुंच सकें।
मुख्यमंत्री कार्यालय करेगा निगरानी
- इस पूरी व्यवस्था की निगरानी सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय के स्तर पर किए जाने की योजना है, ताकि विभिन्न विभागों और संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल बना रहे।
- इससे पहले राज्य सरकार अग्निवीरों के लिए राज्य सरकार की नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने की घोषणा कर चुकी है। साथ ही उत्तराखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की भर्ती में भी उन्हें प्राथमिकता देने की बात कही गई है।
सेवा से समाजिक सम्मान तक का सफर
अधिकांश अग्निवीरों के लिए सैन्य सेवा उनके पेशेवर जीवन का पहला अध्याय होती है। उत्तराखंड की यह पहल उस दूसरे अध्याय को भी उतना ही मजबूत बनाने की कोशिश है। उद्देश्य यह है कि सेना में सीखे गए अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्रसेवा की भावना को नागरिक जीवन में भी नई भूमिका मिले, ताकि देश की सेवा का उनका सफर वर्दी उतरने के बाद भी समाज के विकास के साथ जारी रह सके।