हरियाणा के सरकारी कर्मचारी अब बदल पाएंगे अपना स्थाई पता : लेकिन 'होमटाउन' पर सरकार ने इसलिए लगा दिया लॉक, जानें क्या है मामला
निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए गजटेड अधिकारियों को उनके गृह जिले में पदस्थापना न देने का पुराना नियम जारी रहेगा। इसके अलावा जिन कर्मचारियों के पते या होमटाउन में पहले बदलाव हो चुका है, उन मामलों की दोबारा समीक्षा नहीं की जाएगी।
हरियाणा के सरकारी कर्मचारियों के लिए स्थाई पते में बदलाव का नया नियम लागू।
- Published: 22 Jul 2026, 03:19 PM IST
- Last Updated: 22 Jul 2026, 03:19 PM IST
हरियाणा सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों के गृहनगर (होमटाउन) और स्थायी पते को लेकर लंबे समय से बने असमंजस और भ्रम की स्थिति को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। राज्य सरकार के मानव संसाधन विभाग (HRD) ने इस विषय पर विस्तृत और आधिकारिक परिपत्र जारी किया है। इसमें साफ किया गया है कि कोई भी कर्मचारी अपनी पूरी सेवा अवधि के दौरान अपना स्थायी पता (Permanent Address) बदल सकता है, लेकिन उसके सेवा रिकॉर्ड में दर्ज 'होमटाउन' या 'गृह जिला' किसी भी परिस्थिति में बदला नहीं जाएगा।
सरकार के नए आदेशों के अनुसार होमटाउन और स्थायी पता दोनों अलग-अलग प्रशासनिक अवधारणाएं हैं और इन्हें एक-दूसरे का स्थानापन्न (विकल्प) नहीं माना जा सकता। यह नया और संशोधित दिशा-निर्देश प्रदेश के सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, बोर्ड-निगमों के प्रबंध निदेशकों, जिला उपायुक्तों और राज्य के सभी विश्वविद्यालयों को भेज दिया गया है।
स्थायी पता बदलने की ये है पूरी प्रक्रिया
मानव संसाधन विभाग की ओर से जारी पत्रों में बताया गया है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी अपनी नौकरी के दौरान किसी नए शहर या स्थान पर स्थायी रूप से बस जाता है, वहां अपना मकान निर्मित कर लेता है या संपत्ति खरीद लेता है, तो वह सक्षम प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति प्राप्त करके अपने सेवा रिकॉर्ड में नया स्थायी पता दर्ज करवा सकता है। हालांकि, इस नए पते के आधार पर उसके मूल होमटाउन में कोई संशोधन या बदलाव नहीं किया जाएगा।
राजपत्रित अधिकारियों के लिए लागू रहेंगे पुराने कड़े नियम
राज्य सरकार ने अपने फैसले में यह भी पूरी तरह साफ किया है कि प्रथम और द्वितीय श्रेणी के राजपत्रित (गजटेड) अधिकारियों को उनके गृह जिले में पदस्थापना न देने का पुराना नियम यथावत जारी रहेगा। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक कामकाज में निष्पक्षता, पारदर्शिता और तटस्थता बनाए रखना है।
सरकार का मानना है कि स्थानीय रिश्तेदारों, सामाजिक प्रभाव और पारिवारिक हितों के टकराव से बचने के लिए यह व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है, ताकि भूमि प्रबंधन, कानून-व्यवस्था, कर-संग्रह और विकास परियोजनाओं जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण मामलों में बिना किसी पक्षपात के स्वतंत्र निर्णय सुनिश्चित किए जा सकें।
पूर्व में स्वीकृत मामलों की दोबारा नहीं होगी जांच
परिपत्र में सरकार ने यह विशेष रूप से रेखांकित किया है कि जिन कर्मचारियों या अधिकारियों के होमटाउन या स्थायी पते में सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से पहले ही बदलाव किया जा चुका है, उन मामलों को दोबारा जांच के लिए नहीं खोला जाएगा। पूर्व में दी गई ऐसी सभी स्वीकृतियां पूरी तरह मान्य रहेंगी और उन पर नया नियम लागू नहीं होगा।