राममंदिर चढ़ावा चोरी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज ने कहा कि यह घटना भारतीय समाज के नैतिक पतन की पराकाष्ठा है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को कानून में बदलाव करना चाहिए ताकि करप्शन के आरोपियों को मौत की सजा दी जा सके।
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हाईकोर्ट जस्टिस अतुल श्रीधरन ने यह टिप्पणी तब की जब वे एक केस में बुलडोजर एक्शन पर सुनवाई कर रहे थे। उनके साथ बेंच में जस्टिस जस्टिस सिद्धार्थ नंदन भी मौजूद थे।
जस्टिस अतुल श्रीधरन ने कहा-

राममंदिर चढ़ावा चोरी से भी अगर किसी को फर्क नहीं पड़ता तो उसे किसी भी बात से शर्म नहीं आ सकती है। यह घटना हमारे समाज के नैतिक पतन की पराकाष्ठा को दिखाती है।

जस्टिस श्रीधरन ने कहा, "आम भारतीय ने करप्शन को सामान्य मान लिया है। वजह तब तक इसे गलत नहीं मानता, जब तक कोई पकड़ा न जाए। ट्रांसपेरेसी की लिस्ट में भारत दुनिया के 182 देशेों में 91वें नंबर पर है, इससे भी हमें शर्म नहीं आती।"

बुलडोजर एक्शन पर सुनवाई कर रहे थे जज
हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की पीठ एक मामले में बुलडोजर एक्शन पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका हमीरपुर के रहने वाले फैमुद्दीन एवं अन्य की ओर से दायर की गई है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनके रिश्तेदार आफान खान के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और यूपी अवैध धर्म परिवर्तन अधिनियम समेत कई धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई थी।
इसके बाद से पुलिस और स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत से उनकी संपत्तियों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कोर्ट से अपनी संपत्ति की सुरक्षा देने की मांग की थी। उनका तर्क था कि केवल एफआईआर के आधार पर किसी की संपत्ति के खिलाफ कार्रवाई गलत है।
हालांकि, इस मामले में जज अतुल श्रीधरन की बातों से न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन का मत अलग था। इसके चलते केस को तीसरे जज से सुनवाई कराने के लिए रेफर कर दिया गया।

राममंदिर केस में सुप्रीम कोर्ट का आदेश- नई SIT बने
- अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को दोबारा SIT बनाने का आदेश दिया है। चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने कहा- नए सिरे से SIT बनाई जाए। सीनियर IPS अधिकारी टीम की अगुआई करें, ताकि जांच किसी निर्णायक स्तर तक पहुंचे।
- CJI ने कहा- हम केवल सावधान करना चाहते हैं। इस मामले में राजनीति न करें। पहली नजर में यह दंड कानून के तहत अपराध का मामला लगता है। इसकी निष्पक्ष, स्वतंत्र और पूरी ईमानदारी से जांच होनी चाहिए। जांच को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाना चाहिए। बस हमारी यही बात है।
चढ़ावा चोरी के 8 आरोपी जेल में
- 7 जून को पूर्व सपा मंत्री पवन पांडेय ने राम मंदिर के चढ़ावे से 5 से 7.5 करोड़ रुपए की चोरी का दावा किया था। अखिलेश यादव ने भी सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए और न्यायिक जांच की मांग की थी।
- चंपत राय ने आरोपों से इनकार किया। विवाद बढ़ने पर भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने CBI जांच की मांग की। 10 जून को PMO ने राम मंदिर ट्रस्ट से रिपोर्ट तलब की थी।
- चढ़ावा चोरी मामले में ट्रस्टी कृष्ण मोहन ने 25 जून को FIR दर्ज कराई थी। पुलिस ने उसी दिन रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, मनीष यादव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्रा को गिरफ्तार किया था। वर्तमान में सभी फैजाबाद जेल में हैं। इन सभी पर चढ़ावा गिनती करते वक्त नोटों और गहनों की चोरी का आरोप है।
- SIT ने ट्रस्ट्री अनिल मिश्रा को चढ़ावा चोरी के लिए जिम्मेदार माना है। आरोप है कि उन्होंने चढ़ावा गिनती की प्रक्रिया में लापरवाही बरती। तय गाइडलाइन का पालन नहीं किया। ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं। उनका इस्तीफा स्वीकार भी हो चुका है।

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