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सोनम वांगचुक की मांग पूरी, सफदरजंग की जगह मेदांता में होगा इलाज; दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया आदेश
- Reported by: गौरव श्रीवास्तवAuthored by: शिशुपाल कुमार
- Updated Jul 21, 2026, 03:50 PM IST
नीट पेपर लीक केस मुद्दे पर अनशन कर रहे सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) को अब सफदरजंग से मेदांता शिफ्ट होने की इजाजत मिल गई है। दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने आदेश दे दिया है।
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सोनम वांगचुक को सफदरजंग से शिफ्ट करने का आदेश (फोटो-X)
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) के इलाज पर बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो की मांग को स्वीकार कर लिया है। गीतांजलि के जरिए सोनम वांगचुक ने मांग की थी कि उन्हें उनकी पसंद के अस्पताल में इलाज कराया जाए। हाईकोर्ट ने कहा कि हम आदेश देते हैं कि सोनम वांगचुक को तत्काल मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित किया जाए। मेदांता के निदेशक आवश्यक विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम गठित करेंगे, जो लगातार वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी करेगी और उन्हें आवश्यक दवाएं भी उपलब्ध कराएगी। दिल्ली हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने इस मांग को खारिज कर दिया था, जिसके बाद डिवीजन बेंच के सामने इस फैसले को चुनौती दी गई थी।
सरकार ने नहीं किया विरोध
दिल्ली हाई कोर्ट में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अगर वांगचुक को मेदांता अस्पताल ले जाना है तो सरकार को इस पर कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मरीज को अस्पताल से छुट्टी मेदांता के डॉक्टरों की सलाह पर ही दी जानी चाहिए, न कि उनकी अपनी इच्छा से।
सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट में यह भी कहा कि मरीज के आसपास मौजूद कुछ लोग उसकी सेहत की परवाह किए बिना उसे अस्पताल से बाहर ले जाना चाहते हैं। सुनवाई के दौरान सोनम वांगचुक के डॉक्टर लांबा भी कोर्ट में मौजूद रहे। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में दोपहर 2:30 बजे अपना आदेश सुनाएगा।
वांगचुक की पत्नी ने क्या कहा था?
आंग्मो ने अपनी अपील में कहा है कि एकल न्यायाधीश का रविवार का आदेश बिना किसी गिरफ्तारी के ही वांगचुक को अवैध रूप से सफदरजंग अस्पताल में रहने के लिए बाध्य करता है और यह निर्देश देता है कि न तो वांगचुक, न ही उनकी पत्नी के पास उनके चिकित्सीय उपचार से संबंधित निर्णय लेने का अंतिम अधिकार है। अपील में यह भी कहा गया है कि आदेश में ’सूचित सहमति’ और किसी व्यक्ति के अपने उपचार को स्वीकार करने या उससे इनकार करने के मौलिक अधिकार पर विचार नहीं किया गया है।
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शिशुपाल कुमारauthor
शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।
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