साइबर अपराध पर शिकंजा कसने के लिए महाराष्ट्र पुलिस ने पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू कर दी है। केंद्र सरकार के देशव्यापी 'ऑपरेशन म्यूल हंट' के तहत रविवार को महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में कई म्यूल (फर्जी बैंक खाताधारकों) के खिलाफ एक ही दिन में एफआईआर दर्ज की गई। ये वे लोग हैं, जो कमीशन के लालच में साइबर अपराधियों को अपने बैंक खातों का इस्तेमाल करने देते हैं और ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में पहुंचाने में मदद करते हैं।
सबसे बड़ी कार्रवाई नाशिक और पुणे में हुई, जहां अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में म्यूल खाताधारकों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए। जांच में सामने आया कि इन खातों के जरिए करीब 11.5 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की रकम का लेनदेन हुआ। यह कार्रवाई राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल से मिली जानकारी के आधार पर की गई।
विज्ञापन
महाराष्ट्र के खराड़ी पुलिस स्टेशन में दर्ज एक मामले में एक बैंक खाते से हाल के दिनों में 3.6 करोड़ रुपये से अधिक का संदिग्ध लेनदेन मिला। जांच में पता चला कि इस खाते का इस्तेमाल ऑनलाइन शेयर बाजार में निवेश के नाम पर ठगी, डिजिटल अरेस्ट और नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले गिरोह कर रहे थे। इसी तरह वाघोली पुलिस ने 1.8 करोड़ रुपये और पुणे एयरपोर्ट पुलिस ने 1.2 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन वाले मामलों में भी खाताधारकों के खिलाफ केस दर्ज किए हैं।
विज्ञापन
आईपीएस अधिकारी संजय दराडे ने मीडिया को बताया कि साइबर अपराधी ठगी की रकम को छिपाने के लिए उसे कई बैंक खातों में ट्रांसफर कर उसकी कई लेयर बना देते हैं। ऐसे में जो लोग अपने खाते कमीशन के बदले उपलब्ध कराते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। पुलिस अब ऐसे सभी खाताधारकों की पहचान और उनके केवाईसी दस्तावेजों की जांच कर रही है।
पुणे के बानेर इलाके में भी एक निजी बैंक के खाते से 65.5 लाख रुपये के संदिग्ध लेनदेन का मामला सामने आया है। जांच में पता चला कि इस खाते का इस्तेमाल ठाणे, नागपुर के अलावा मध्य प्रदेश और कर्नाटक के लोगों से साइबर ठगी के लिए किया गया था। पुलिस ने इस खाते को फ्रीज कर दिया है। वहीं, पिंपरी-चिंचवड़ के बावधान और भोसरी पुलिस स्टेशनों में भी दो अलग-अलग मामलों में क्रमशः 64 लाख रुपये और 12.3 लाख रुपये के संदिग्ध लेनदेन पर एफआईआर दर्ज की गई है। उधर, नासिक साइबर पुलिस ने 58 संदिग्ध बैंक खातों की पहचान की है, जिनसे 79 लाख रुपये से अधिक का लेनदेन हुआ। इस मामले में वहां भी तीन एफआईआर दर्ज की गई हैं।
इस सख्त कार्रवाई के साथ महाराष्ट्र पुलिस ने निर्दोष लोगों को राहत देने की दिशा में भी अहम कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर पुलिस ने उन लोगों के लिए नया शिकायत निवारण मॉड्यूल लागू किया है, जिनके बैंक खाते अनजाने में साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी रकम आने के कारण फ्रीज हो गए थे।
पुलिस के अनुसार,पहले ऐसे खातों को दोबारा चालू कराने के लिए लोगों को अदालत का सहारा लेना पड़ता था, जिससे काफी समय लगता था। अब यदि कोई दुकानदार या नागरिक अपनी बैंक की मुख्य शाखा में खाता अनफ्रीज कराने का आवेदन देगा, तो बैंक इसकी जानकारी सीएफसीआरएमएस (सिटिजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम) पोर्टल पर अपलोड करेगा। इसके बाद जांच अधिकारी दस्तावेजों या वीडियो कॉल के जरिए खाताधारक की पहचान और लेनदेन की जांच करेगा। यदि यह साबित हो जाता है कि संबंधित व्यक्ति निर्दोष है और उसने केवल अपने व्यापार के तहत भुगतान प्राप्त किया था, तो पुलिस अधिकारी के स्तर पर ही उसका खाता अनफ्रीज किया जा सकेगा। नई व्यवस्था से उन सैकड़ों छोटे दुकानदारों, व्यापारियों और आम नागरिकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके बैंक खाते अनजाने में संदिग्ध लेनदेन की वजह से बंद हो जाते थे।