Monsoon health myths: बारिश का मौसम यकीनन हम सभी को अच्छा लगता है। लेकिन यह अपने साथ कई तरह की बीमारियां भी लेकर आता है। बारिश के सीजन में डायरिया, टाइफाइड, हैजा (कॉलेरा), हेपेटाइटिस ए और ई जैसी जलजनित और भोजनजनित बीमारियां अपनी जद में ले लेती हैं। इस मौसम में अक्सर लोग कई तरह के मिथक को सच मान बैठते हैं और ऐसे में उनकी समस्या और भी खराब हो जाती है।
इसलिए, किसी भी बात पर भरोसा करने से पहले उसकी जद तक जाना जरूरी है। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको बारिश से जुड़े कुछ ऐसे ही मिथक के बारे में बता रहे हैं, जो आपके लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं-
मिथक 1- साफ दिखने वाला पानी पीने के लिए सुरक्षित होता है।
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सच्चाई- बारिश के सीजन में जलजनित बीमारियां होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसलिए, इसे लेकर सावधानी बरतनी बेहद ही आवश्यक है। अक्सर लोग मान लेते हैं कि अगर पानी साफ और पारदर्शी दिख रहा है, तो वह पीने के लिए भी सुरक्षित होगा। लेकिन यह पूरी तरह से सच नहीं है। पानी में मौजूद बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी आंखों से दिखाई नहीं देते। इसलिए, इस तरह का पानी पीने से डायरिया, टाइफाइड, हैजा और हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारियां होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
क्या करें?
- हमेशा उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी पिएं।
- बाहर जाते समय अपनी पानी की बोतल साथ रखें।
- खुले में रखे हुए पानी को ना पीएं।
मिथक 2- सिर्फ स्ट्रीट फूड खाने से ही इंफेक्शन हो सकता है।
सच्चाई- बारिश के दिनों में यकीनन बाहर खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे इंफेक्शन होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। लेकिन इसकी एकमात्र वजह स्ट्रीट फूड नहीं है। अगर घर में भी खाना बनाते समय साफ-सफाई का ध्यान न रखा जाए या दूषित पानी का इस्तेमाल हो या पका हुआ भोजन लंबे समय तक बाहर रखा जाए, तो संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
क्या करें?
- फल और सब्जियों को इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह धोएं।
- खाना हमेशा ढककर रखें और बासी भोजन खाने से बचें।
- कच्चे और पके हुए भोजन के लिए अलग चॉपिंग बोर्ड और चाकू इस्तेमाल करें।
मिथक 3- पेट का संक्रमण खुद-ब-खुद ठीक हो जाएगा
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सच्चाई- बारिश के सीजन में पेट का संक्रमण होना बेहद आम बात है। लेकिन कई लोग दस्त या उल्टी होने पर सोचते हैं कि एक-दो दिन में सब ठीक हो जाएगा और डॉक्टर के पास जाने की जरूरत नहीं है। हल्के संक्रमण ठीक हो सकते हैं, लेकिन लगातार दस्त, उल्टी, बुखार या डिहाइड्रेशन होने पर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। समय पर इलाज न मिलने पर समस्या काफी गंभीर हो सकती है।
क्या करें?
- लगातार दस्त या उल्टी होने पर लापरवाही ना बरतें।
- ओआरएस और पर्याप्त पानी लेते रहें।
- खासकर, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों में इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
बारिश में किन बातों का ख्याल रखना जरूरी है?
अगर बारिश के मौसम में आप खुद को स्वस्थ रखना चाहती हैं तो कुछ बातों का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। मसलन-
- खाना खाने से पहले और शौचालय के बाद साबुन से हाथ धोएं।
- कटी हुई फल-सब्जियां लंबे समय तक खुली न रखें।
- बर्फ या खुले पेय पदार्थों को ना पीएं।
- घर के आसपास पानी जमा न होने दें।
- रसोई और पानी रखने वाले बर्तनों की नियमित सफाई करें।
FAQ
Q.
क्या सब्जियां धोने के लिए कोई खास तरीका है?
A.
हाँ, नमक के पानी या पोटेशियम परमैंगनेट के घोल में सब्जियां धोना बेहतर है।
Q.
बासी खाना क्यों नहीं खाना चाहिए?
A.
मानसून में बैक्टीरिया बहुत तेजी से पनपते हैं, जिससे फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ता है।
Q.
डिहाइड्रेशन के लक्षण क्या हैं?
A.
चक्कर आना, कम पेशाब आना और मुंह सूखना।
Q.
क्या बारिश का पानी सीधे पीना सुरक्षित है?
A.
बिल्कुल नहीं, इसमें वातावरण के प्रदूषक तत्व हो सकते हैं।