October 27, 2026

टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में बड़ा एक्शन, सभी आरोपियों पर लगा मकोका

मुंबई(उत्तम हिन्दू न्यूज)- बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग के मामले में मुंबई पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने अब इस मामले में आरोपियों के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका), 1999 की गंभीर धाराएं लगाई हैं। इससे पहले मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था। मामले में आगे की जांच जारी है।

मुंबई पुलिस ने आरोपियों पर मकोका लगाने के लिए सक्षम अधिकारी से अनुमति मांगी थी। मंगलवार को मंजूरी मिलने के बाद सभी आरोपियों के खिलाफ मकोका की तीन धाराएं जोड़ दी गईं।

फायरिंग 18 अक्टूबर को मुंबई के जुहू इलाके में की गई थी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक टाइगर श्रॉफ एक फुटबॉल क्लब से आ रहे थे, तभी बाइक सवार हमलावरों ने उनकी कार पर पांच से छह राउंड गोलियां चलाईं और फरार हो गए। इस घटना में अभिनेता बाल-बाल बच गए, जबकि उनका ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति घायल हो गया था। घटना के बाद मुंबई पुलिस ने मामले की जांच शुरू की आरोपियों की तलाश में हरियाणा के सोनीपत और दिल्ली समेत कई जगहों पर छापेमारी की। शुरुआती गिरफ्तारियों में रेहान उर्फ सुक्का, फूल सिंह और ऋतिक कुर्मी उर्फ रोशन के नाम सामने आए। पुलिस ने आरोप लगाया कि इन लोगों की भूमिका फायरिंग की घटना में थी। हालांकि इस मामले में सभी आरोपियों की भूमिका और उनके बीच संबंधों की जांच अभी जारी है।

जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने हमलावरों तक हथियार पहुंचाने में मदद की थी। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि फायरिंग के लिए हथियार कहां से आए, आरोपियों के बीच किस तरह संपर्क हुआ और घटना के पीछे किसकी क्या भूमिका थी। इस मामले में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े अनिल पंडित का नाम भी सामने आया है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए फायरिंग की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया था।

जानिए क्या है मकोका
बता दें कि मकोका का पूरा नाम ‘महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम’ (Maharashtra Control of Organised Crime Act) है। यह भारत का एक बहुत ही सख्त और कड़ा कानून है, जिसे संगठित अपराध (Organized Crime) और अंडरवर्ल्ड सिंडिकेट्स को खत्म करने के लिए बनाया गया है। इसे सबसे पहले 1999 में महाराष्ट्र सरकार ने अंडरवर्ल्ड और गैंगस्टरों की बढ़ती गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए बनाया था। वर्ष 2002 में दिल्ली सरकार ने भी इसे अपनी राजधानी में लागू कर दिया था।

यह कानून आम अपराधियों पर नहीं, बल्कि उन अपराधियों या गैंग के सिंडिकेट पर लगाया जाता है जो आदतन (bar-bar) गंभीर अपराध करते हैं। इसके तहत मामला दर्ज करने के लिए पिछले 10 सालों में आरोपी के खिलाफ कम से कम दो संगठित अपराध के मामले दर्ज होने जरूरी हैं। इसमें दोषी पाए जाने पर कम से कम 5 साल से लेकर उम्रकैद या मौत की सजा (फांसी) तक का प्रावधान है। इसके अलावा आरोपी पर भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

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