October 26, 2026

झालावाड़ में खाद-बीज की गुणवत्ता पर डिजिटल पहरा: जीपीएस जियो-टैगिंग से पारदर्शिता बढ़ेगी, एग्री क्यूएमएस ऐप से होगा संग्रहण - jhalawar News

झालावाड़ में उर्वरकों की बिक्री में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कृषि विभाग ने जिले में डिजिटल निगरानी तेज कर दी है।

झालावाड़ के किसानों को गुणवत्तायुक्त बीज, खाद और कीटनाशी उपलब्ध कराने तथा उर्वरकों की बिक्री में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कृषि विभाग ने जिले में डिजिटल निगरानी तेज कर दी है। अब कृषि उत्पादों के नमूने लेने से लेकर उनकी जियो-टैगिंग, सीलिंग और प्रयोग

.

वहीं, 462 उर्वरक विक्रय प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया जा चुका है, जिसमें झालावाड़ प्रदेश में छठे और हाड़ौती संभाग में पहले स्थान पर है। किसानों को यूरिया और डीएपी निर्धारित दरों पर उपलब्ध कराने के लिए भी निगरानी की जा रही है।

ऐप से होगी नमूनों की जियो-टैगिंग

कृषि आदान निरीक्षक एग्रीक्यूएमएस ऐप के माध्यम से मौके पर ही बीज, खाद और कीटनाशी के नमूने लेंगे। नमूनों की जीपीएस आधारित जियो-टैगिंग की जाएगी। निरीक्षण के दौरान फोटो और जरूरी दस्तावेज ऐप पर अपलोड होंगे। इसके बाद क्यूआर कोड तैयार कर नमूने के पैकेट पर लगाया जाएगा और उसे सील किया जाएगा। इस प्रक्रिया से नमूनों की पहचान और निगरानी आसान होगी।

रैंडम तरीके से तय होगी जांच प्रयोगशाला

नमूनों की जांच में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए निरीक्षक अपनी पसंद की प्रयोगशाला नहीं चुन सकेंगे। एग्रीक्यूएमएस ऐप के माध्यम से रैंडम तरीके से लैब निर्धारित होगी। इससे जांच प्रक्रिया में निष्पक्षता बढ़ेगी और किसी विशेष प्रयोगशाला को अनुचित लाभ मिलने की आशंका कम होगी।

नमूनों के जयपुर पहुंचने पर उनकी पहचान छिपाई जाएगी। इसके बाद डाक विभाग की स्पीड पोस्ट और बिजनेस पोस्ट सेवाओं के जरिए उन्हें सुरक्षित तरीके से प्रयोगशालाओं तक भेजा जाएगा। ट्रैकिंग व्यवस्था से नमूनों की आवाजाही पर नजर रखी जा सकेगी।

यूरिया 266.50 और डीएपी 1350 रुपए प्रति बैग

भारत सरकार ने यूरिया की निर्धारित दर 266 रुपए 50 पैसे प्रति बैग और डीएपी की दर 1350 रुपए प्रति बैग तय की है। निर्धारित दर से अधिक राशि वसूलने या उर्वरक के साथ टैगिंग कर किसानों को अनावश्यक रूप से दूसरे उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य करने पर संबंधित विक्रेता के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

राज एग्रीक्यूएसआई ऐप से विक्रेताओं की निगरानी

कृषि विभाग जिले में उर्वरक विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों का राज एग्रीक्यूएसआई ऐप के माध्यम से सघन निरीक्षण कर रहा है। इसका उद्देश्य उर्वरकों की बिक्री में पारदर्शिता बनाए रखना, अनियमितताओं पर नियंत्रण करना और किसानों को निर्धारित दर पर गुणवत्तायुक्त उर्वरक उपलब्ध कराना है। अब तक 462 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया जा चुका है। इस उपलब्धि के साथ झालावाड़ प्रदेश में छठे और हाड़ौती संभाग में प्रथम स्थान पर है।

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए तीन साल का समझौता

प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने, किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों का विस्तार करने के लिए कृषि विभाग और ब्रह्माकुमारी संस्थान के बीच तीन वर्ष का समझौता किया गया है। इसके तहत गांव-गांव तक संयुक्त जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

अभियान के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक खेती के लाभों और टिकाऊ कृषि पद्धतियों की जानकारी दी जाएगी।