October 26, 2026

भारत ने बना ली अपनी ड्रोन बोट, एलीट ग्रुप में हुआ शामिल... समंदर में बादशाहत

दुनिया भर में युद्ध के तरीकों में बड़ा बदलाव आ रहा है. ब्लैक सी से लेकर लाल सागर तक बिना चालक वाले सिस्टम नौसैनिक लड़ाई का चेहरा बदल रहे हैं. ऐसे समय में भारत ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. भारत अब उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है जो अनमैन्ड सरफेस वेसल यानी यूएसवी बना सकते हैं. यानी पानी पर चलने वाली ड्रोन नाव. जिसका इस्तेमाल रूस-यूक्रेन संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हो रहा है. 

यह उपलब्धि सिर्फ तकनीकी नहीं बल्कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए भी बड़ी सफलता है. पुणे स्थित निजी रक्षा स्टार्टअप सागर डिफेंस इंजीनियरिंग ने यह स्वदेशी यूएसवी विकसित किया है. यूएसवी ऐसा समुद्री जहाज होता है जिसमें कोई नाविक नहीं बैठता. यह दूर से नियंत्रित या स्वचालित तरीके से काम करता है. 

सागर डिफेंस इंजीनियरिंग के संस्थापक निकुंज पराशर के अनुसार यह जहाज खासतौर पर खतरनाक मिशनों के लिए बनाया गया है. इसमें निगरानी, टोही, बल सुरक्षा और विषम युद्ध जैसे काम शामिल हैं. सबसे बड़ा फायदा यह है कि जवानों को खतरे में डालने की जरूरत नहीं पड़ती. आज के युद्ध में जहां ड्रोन और बिना चालक वाले सिस्टम हावी हो रहे हैं, वहां यूएसवी नौसेना की ताकत बढ़ाने वाला अहम हथियार बन गया है.

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स्वालंबन प्रदर्शनी में पहली बार प्रदर्शन

इस यूएसवी को भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किए जाने के बाद पहली बार दिल्ली में आयोजित स्वालंबन प्रदर्शनी में दिखाया गया. स्वालंबन भारतीय नौसेना की पहल है जिसका मकसद नवाचार और स्वदेशीकरण को बढ़ावा देना है. यह प्रदर्शनी सशस्त्र बलों और भारतीय उद्योग-स्टार्टअप इकोसिस्टम के बीच की दूरी कम करने के लिए आयोजित की जाती है. यहां इस यूएसवी के प्रदर्शन से साफ संदेश गया कि भारत अब सिर्फ आयात पर निर्भर नहीं रहना चाहता बल्कि खुद अत्याधुनिक सिस्टम बनाने में सक्षम हो गया है.

यूएसवी के शामिल होने से भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता काफी बढ़ेगी. खासकर हिंद महासागर क्षेत्र में लगातार निगरानी रखने की ताकत मजबूत होगी. दुनिया भर की नौसेनाएं तेजी से बिना चालक और स्वचालित प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रही हैं. ऐसे में भारत का यह कदम समय के साथ मेल खाता है. अमेरिका, चीन, इजरायल और ब्रिटेन जैसे देशों के साथ अब भारत भी इस तकनीक में शामिल हो गया है. यह उपलब्धि न सिर्फ सुरक्षा बल्कि रक्षा निर्यात की संभावनाओं को भी बढ़ाती है.

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निजी क्षेत्र की भूमिका और आगे की राह

सागर डिफेंस इंजीनियरिंग जैसी निजी कंपनी का यह योगदान बताता है कि रक्षा क्षेत्र में स्टार्टअप्स कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान ने निजी कंपनियों को मौका दिया है और नतीजा सामने आ रहा है. आगे चलकर ऐसे और सिस्टम बन सकते हैं जो अलग-अलग मिशनों के लिए तैयार हों. समुद्री सीमा की सुरक्षा, तस्करी रोकने और युद्ध की स्थिति में दुश्मन पर नजर रखने जैसे कामों में यूएसवी बहुत उपयोगी साबित होंगे.

कुल मिलाकर यह विकास भारत की समुद्री शक्ति को नई दिशा दे रहा है. बिना चालक वाले सिस्टम भविष्य के युद्ध का हिस्सा बन चुके हैं और भारत ने इस दौड़ में अपनी जगह बना ली है. स्वदेशी तकनीक पर जोर देने से न सिर्फ विदेशी निर्भरता घटेगी बल्कि देश की सुरक्षा और मजबूत होगी.

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