October 21, 2026

ग्लोबल मार्केट में मंदी का असर! क्या त्यौहारी मांग से संभलेंगे भारत में सोना-चांदी के भाव? जानें आज के रेट्स

एशियाई बाजारों में 21 अक्टूबर को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरें ऊंची बनाए रखने या आगे बढ़ाने की आशंकाओं ने कीमती धातुओं पर दबाव डाला। हालांकि, भू-राजनीतिक अनिश्चितता, सेंट्रल बैंकों की खरीदारी और भारत में त्योहारों व शादियों के सीजन की मांग से कीमतों को कुछ सहारा मिलने की उम्मीद है।उपलब्ध बाजार आंकड़ों के मुताबिक, कॉमेक्स पर सोने का वायदा भाव 14.10 डॉलर यानी 0.34% गिरकर 4,128.50 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। इसका पिछला बंद भाव 4,143.40 डॉलर प्रति औंस था।वहीं, चांदी का वायदा भाव 0.30 डॉलर यानी 0.52% टूटकर 57.70 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि पिछला बंद भाव 58.155 डॉलर प्रति औंस था।

सोने की कीमतों पर क्यों बना हुआ है दबाव?

सोने पर निवेशकों को ब्याज नहीं मिलता। ऐसे में जब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरें बढ़ने की संभावना होती है, तो कुछ निवेशकों के लिए सोने की तुलना में ब्याज देने वाले विकल्प अधिक आकर्षक हो जाते हैं। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर मजबूत होने पर भी सोने की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।

ओम्नीसाइंस कैपिटल के स्मॉलकेस मैनेजर और सीईओ विकास गुप्ता के मुताबिक, सोने की कीमतों में तेजी के साथ महंगाई और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाएं बाजार के लिए चुनौती बनी हुई हैं।उनका मानना है कि सेंट्रल बैंक सोने की खरीदारी जारी रख सकते हैं, लेकिन दूसरे निवेशकों की बिकवाली इस मांग के असर को कम कर सकती है। इससे कीमतों में तेजी सीमित रह सकती है।

क्या अमेरिकी फेड बढ़ा सकता है ब्याज दरें?

सोने और चांदी की आगे की चाल काफी हद तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति पर निर्भर करेगी। खबर में उद्धृत 20 अक्टूबर को प्रकाशित रॉयटर्स पोल के अनुसार, अर्थशास्त्रियों को उम्मीद थी कि फेड 27-28 अक्टूबर की बैठक में ब्याज दरों में बदलाव नहीं करेगा, जबकि दिसंबर में एक और बढ़ोतरी की आशंका जताई गई थी।लगातार महंगाई और ऊर्जा की ऊंची कीमतें ब्याज दरों को लेकर इन चिंताओं की प्रमुख वजह हैं। यदि ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं, तो सोने की कीमतों में तेजी पर रोक लग सकती है। इसके विपरीत, दरों में कटौती की संभावना बढ़ने पर सोने को समर्थन मिल सकता है।

भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद क्यों नहीं चढ़ रहा सोना?

आमतौर पर युद्ध, अंतरराष्ट्रीय तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के समय निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में देखते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर तनाव के दौरान सोने की कीमतें बढ़ेंगी ही।यदि भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो महंगाई का दबाव भी बढ़ सकता है। इससे केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरें घटाना मुश्किल हो सकता है, जो सोने के लिए नकारात्मक साबित हो सकता है।पीएल कैपिटल के चीफ बिजनेस ऑफिसर-विक्रम कसाट के अनुसार, ब्रेंट क्रूड का करीब 108 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर रहना महंगाई और कंपनियों के मुनाफे के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।इसलिए सोने की कीमतों पर दो तरह की ताकतें असर डाल रही हैं। एक ओर सुरक्षित निवेश की मांग है, तो दूसरी ओर ऊंची ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड का दबाव।

क्या त्योहारों में सोने की कीमतों को मिलेगा सहारा?

भारत में त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन के कारण सोने की मांग बढ़ सकती है। हालांकि, ऊंची कीमतें ग्राहकों की खरीदारी क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं।ब्रिकवर्क रेटिंग्स के रिसर्च हेड राजीव शरण के मुताबिक, दशहरे के आसपास 24 कैरेट सोना करीब ₹1.48 लाख प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। उनके अनुसार, अमेरिकी ब्याज दरों की संभावनाएं सोने की तेजी को सीमित कर सकती हैं और कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

महंगी ज्वेलरी खरीदने के बजाय कुछ ग्राहक हल्के वजन के गहने, सोने के सिक्के, बार या गोल्ड ETF जैसे विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। इससे पता चलता है कि ग्राहक त्योहारों की खरीदारी जारी रखते हुए अपने बजट में बदलाव कर रहे हैं।वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने 20 अक्टूबर को बताया कि भारत में मौसमी मांग में तेजी आ रही है और घरेलू बाजार में सोने पर मिलने वाली छूट कम हुई है। त्योहारों और शादियों से पहले ज्वेलर्स को अच्छे ऑर्डर मिलने की खबरें भी सामने आई हैं। हालांकि, ऊंची कीमतें कुल खरीदारी की मात्रा को सीमित कर सकती हैं।

चांदी की कीमतों में आगे क्या होगा?

चांदी की कीमतों पर भी अमेरिकी ब्याज दरों और डॉलर का असर पड़ता है, लेकिन इसमें एक अतिरिक्त पहलू भी है। चांदी का इस्तेमाल उद्योगों में बड़े पैमाने पर होता है। इसलिए इसकी कीमत निवेशकों की मांग के साथ-साथ औद्योगिक गतिविधियों और वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति से भी प्रभावित होती है।

यदि औद्योगिक मांग मजबूत रहती है, तो चांदी को सहारा मिल सकता है। इसके उलट, वैश्विक आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती आने से इसकी कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।सोने की तरह चांदी को भी सुरक्षित निवेश के रूप में खरीदा जाता है, लेकिन इसकी औद्योगिक मांग के कारण दोनों धातुओं की कीमतों में एक जैसी तेजी या गिरावट जरूरी नहीं है।

निवेशकों को अब किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?

आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक ये होंगे:

  • अमेरिकी महंगाई के आंकड़े: महंगाई बढ़ने पर ब्याज दरें ऊंची रहने की आशंका बढ़ सकती है।

  • फेडरल रिजर्व के संकेत: ब्याज दरों को लेकर फेड का रुख कीमतों को प्रभावित करेगा।

  • अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड: डॉलर और यील्ड में मजबूती सोने पर दबाव डाल सकती है।

  • भू-राजनीतिक घटनाएं: अंतरराष्ट्रीय तनाव सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ा सकता है।

  • भारत में त्योहारों की मांग: घरेलू खरीदारी से स्थानीय बाजार को समर्थन मिल सकता है।

  • रुपये की चाल: डॉलर के मुकाबले रुपये में बदलाव भारत में सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकता है।

क्या अभी सोना-चांदी खरीदना सही रहेगा?

कीमतों में गिरावट को खरीदारी का अवसर माना जा सकता है, लेकिन केवल गिरावट के आधार पर निवेश का फैसला करना उचित नहीं है। बाजार में अभी अमेरिकी मौद्रिक नीति, महंगाई, डॉलर और मौसमी मांग को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।खरीदारी करने वाले ग्राहकों को अपनी जरूरत, बजट और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना चाहिए। वहीं, निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि त्योहारों की मांग से कीमतों में तेजी आने की कोई गारंटी नहीं है।