वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने भरी अंतिम उड़ान, 'किरण' विमान से जुड़ीं पुरानी यादों को किया ताजा
रिटायरमेंट से पहले वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने मंगलवार को हैदराबाद के पास डंडीगल में मौजूद एयर फोर्स एकेडमी में ‘किरण’ विमान से अपनी अंतिम ट्रेनर उड़ान भरी. उतरने पर उन्हें वाटर कैनन सैल्यूट दिया गया.
रिटायरमेंट से पहले वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने मंगलवार को हैदराबाद के पास डंडीगल में मौजूद एयर फोर्स एकेडमी में ‘किरण’ विमान से अपनी अंतिम ट्रेनर उड़ान भरी. उतरने पर उन्हें वाटर कैनन सैल्यूट दिया गया.
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आईएएफ प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह इस माह के अंत में रिटायर होने वाले हैं. उन्होंने मंगलवार को हैदराबाद के पास डंडीगल में मौजूद एयर फोर्स एकेडमी (एएफए) में आखिरी ट्रेनर सॉर्टी (उड़ान) के दौरान 'किरण' विमान उड़ाया. यह जानकारी अधिकरियों ने दी. वायु सेना प्रमुख (CAS), एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने मंगलवार को भारतीय वायु सेना (IAF) के विमान HJT-16 किरण Mk-1 ट्रेनर विमान को उड़ाकर अपनी अंतिम उड़ान पूरी की. इसके साथ ही उनके उड़ान करियर का एक यादगार अध्याय संपन्न हो गया.
शुरुआती यादों से फिर से जोड़ दिया
यह 55 मिनट की उड़ान विशेष रूप से यादगार मानी गई है. CAS ने अपने पहले उड़ान प्रशिक्षक, विंग कमांडर वी.एस. कोचर (सेवानिवृत्त) के साथ उड़ान भरी. उन्होंने जिस विमान में उड़ान भरी, उसका टेल नंबर U 707 था. यह अवसर प्रशिक्षक और छात्र के बीच एक भावुक पुनर्मिलन का प्रतीक बताया गया था. इसने CAS को भारतीय वायु सेना में उनके उड़ान सफर की शुरुआती यादों से फिर से जोड़ दिया.
'सपना सच होने' जैसा बताया
उड़ान के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए, एपी सिंह ने इस पल को'सपना सच होने' जैसा बताया. उन्होंने याद किया कि कैसे उनका उड़ान का सफर इसी विमान से आरंभ हुआ था. उन्होंने अपने पहले उड़ान प्रशिक्षक, विंग कमांडर वी एस कोचर (रिटायर्ड) का आभार जताया. उन्होंने कहा, "यह सच में एक सपना सच होने जैसा है. मैंने अपना सफर इसी विमान से आरंभ किया था. मुझे लगता है कि मैं शायद इकलौता ऐसा चीफ हूं जो उस समय रिटायर हो रहा है, जब वह शुरुआती विमान जिससे उसने उड़ान सीखी थी, आज भी सेवा में है."
कमांडर कोचर सर का बहुत शुक्रगुजार हूं
सिंह ने आगे कहा, "मैं बहुत आभारी हूं. मैं अपने प्रशिक्षक, विंग कमांडर कोचर सर का बहुत शुक्रगुजार हूं, जिन्होंने मुझे शुरुआत में, यहीं पर उड़ान सिखाई थी. मैं बस इस सफर का एक पूरा चक्र (सर्कल) पूरा करना चाहता था. मैंने 28 जनवरी 1984 को, यहीं पर, उनके साथ 'किरण' विमान में अपनी पहली उड़ान भरी थी. और आज, मैंने उन्हीं के साथ, उसी 'किरण' विमान में, वर्दी पहनकर अपनी आखिरी उड़ान भरी है."
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